भोपाल। मध्यप्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिए वोटिंग से पहले फूट रहे लेटर बम से यहां का सियासी माहौल दहशत में है। वक्त है बदलाव का दावा करने वाली कांग्रेस और अबकी बार दो सौ पार का राग अलापने वाली भाजपा दोनों के ही चेहरों पर लेटर बम के धमाकों का डर दिखाई दे रहा है। अभी तक इससे कोई बडा सियासी नुकसान किसी को नहीं हुआ है। लेकिन चुनाव में नुकसान की आशंका जताई जा रही है।
मध्यप्रदेश में जब वोटिंग के लिए कुछ ही दिन बचे हैं, तब सोशल मीडिया के प्लेटफार्म पर सियासी लेटर बम बम फोड़े जा रहे हैं। बुधनी से कांग्रेस प्रत्याशी अरुण यादव का एक लेटर वाइरल हुआ, जिसमें उन्होंने खुद को साजिश के तहत बुधनी से चुनाव मैदान में उतारा जाना बताया। इसके बाद आरएसएस का एक लेटर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष के नाम वाइरल हुआ, जिसमें भाजपा की स्थिति को बेहद कमजोर बताया गया है। अरुण यादव ने ट्वीट करके अपने वाइरल लेटर पर सफाई दे दी है तो कमलनाथ ने दोनों ही जहां अरुण यादव के लेटर को गलत बताया तो वहीं संघ के लेटर को सही ठहरा दिया। कांग्रेस इस मुद्दे पर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रही है।
इस लेटर बम का असर कांग्रेस के साथ भाजपा पर भी पड़ रहा है। लेकिन वह भी कांग्रेस की तरह ही व्यवहार कर रही है। उसे संघ वाला वाइरल लेटर फर्जी और साजिशाना हरकत बताने में देर नहीं लगती, लेकिन अरुण यादव के वाइरल लेटर को वह हकीकत बताने से परहेज नहीं कर रही है।
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सोशल मीडिया पर नकेल कसने की चुनाव आयोग की तमाम कोशिशें भी सफल नहीं रही हैं। चुनाव आयोग सब के फायदे लिए नकेल कसना चाहता तो सियासी दल सिर्फ तब इस पक्ष में होते हैं जब मामला उनकी छीछालेदर वाला है। अन्यथा कांग्रेस और भाजपा दोनों ही वाइरल लेटर को सही ठहरा देते हैं। यही कारण है कि तमाम कोशिशों के बाद भी सोशल मीडिया सियासी बम फोड़ने का प्लेटफार्म बन चुका है। अब चुनाव में कुछ घंटे ही बचे हैं और इस बात की आशंका बढ़ती जा रही है कि इस तरह की बमबाजी कोई बड़ा नुकसान न करा दे।