US 100% Tariff on India: भारत समेत इन 5 देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा US! संसद से रूस प्रतिबंध विधेयक पारित, जानें भारत पर क्या असर होगा?

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US 100% Tariff on India: भारत समेत इन 5 देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा US! संसद से रूस प्रतिबंध विधेयक पारित, जानें भारत पर क्या असर होगा?

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  • Publish Date - August 8, 2026 / 08:39 AM IST,
    Updated On - August 8, 2026 / 10:32 AM IST

US 100% Tariff on India: भारत समेत इन 5 देशों पर 100% टैरिफ लगाएगा US! संसद से रूस प्रतिबंध विधेयक पारित, जानें भारत पर क्या असर होगा? /image: AI Generated

HIGHLIGHTS
  • US सीनेट ने रूस प्रतिबंध विधेयक को 86-11 मतों से मंजूरी दी
  • भारत और चीन समेत 5 देशों पर 100% शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव
  • बिल अब अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा, जहां 31 अगस्त से सत्र शुरू होगा

वाशिंगटन। US 100% Tariff on India: अमेरिकी सीनेट ने रूस तथा उसके पेट्रोलियम उत्पादों के चीन एवं भारत (America Tariff on India) जैसे प्रमुख खरीदार देशों को दंडित करने के उद्देश्य से लाए गए एक विधेयक को भारी बहुमत से मंजूरी दे दी है। विधेयक में दावा किया गया है कि रूस के साथ इस प्रकार का व्यापार यूक्रेन युद्ध को जारी रखने में मदद कर रहा है। सीनेट ने ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ नाम के इस विधेयक को 11 के मुकाबले 86 मतों से मंजूरी दी।

भारत समेत इन 5 देशों पर 100% टैरिफ की तैयारी

यह विधेयक अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Trump India Tariff) को रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देशों से आने वाले सामान पर 100 प्रतिशत शुल्क लगाने का अधिकार देता है। चीन, भारत, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया रूस से तेल और गैस का सबसे अधिक आयात करने वाले पांच देश हैं।रूस पर प्रतिबंधों के अलावा विधेयक में 1996 के ‘ईरान प्रतिबंध अधिनियम’ की अवधि 2031 तक बढ़ाने का भी प्रावधान है। इस कानून के तहत ईरान के ऊर्जा क्षेत्र में निवेश करने वाली कंपनियों पर दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।

US 100% Tariff on India इस द्विदलीय विधेयक को रिपब्लिकन पार्टी के नेता एवं सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट पार्टी के नेता एवं सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने प्रस्तावित किया था। ग्राहम का 11 जुलाई को निधन हो गया था। कीव की यात्रा के बाद ग्राहम के अचानक निधन के पश्चात दोनों दलों के नेताओं ने विधेयक को पारित कराने और यूक्रेन के समर्थक के रूप में दिवंगत सांसद की विरासत का सम्मान करने के लिए नए सिरे से प्रयास तेज किए।

ग्राहम के निधन के बाद उनकी सीट से सीनेटर चुनी गईं उनकी बहन डारलाइन ग्राहम ने कहा, ‘‘यह विधेयक रूस की अर्थव्यवस्था को सहारा देने वाले प्रमुख देशों को एक सरल लेकिन बेहद महत्वपूर्ण विकल्प चुनने के लिए मजबूर करता है-अमेरिका के साथ कारोबार करना या सस्ती रूसी ऊर्जा खरीदना।’’विधेयक में रूस के नेताओं और अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाने का भी प्रावधान है। इसके तहत रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, रूस के धनाढ्य कारोबारियों और वित्तीय संस्थानों को निशाना बनाया गया है।

US 100% Tariff on India मतदान के बाद सीनेटर ब्लूमेंथल ने पत्रकारों से कहा, ‘‘हमने जो किया है, ग्राहम को उस पर गर्व होता।’’ब्लूमेंथल ने कहा, ‘‘ये बेहद कड़े प्रतिबंध और शुल्क उन सभी को रोकेंगे जो बहादुर और स्वतंत्र लोगों के खिलाफ इस जानलेवा और आपराधिक आक्रामक युद्ध में सहभागी हैं।’’

ग्रेगरी मीक्स और डॉन बेयर समेत कुछ डेमोक्रेट सांसदों ने हालांकि आगाह किया है कि यह विधेयक ऐसे समय में ट्रंप को शुल्क लगाने की नयी शक्तियां देगा, जब उन्होंने शुल्क को अपनी व्यापार नीति का प्रमुख आधार बनाया हुआ है। यह विधेयक मंजूरी के लिए अब प्रतिनिधि सभा में भेजा जाएगा, जिसका सत्र 31 अगस्त को फिर शुरू होगा।

 

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क्या अमेरिका ने भारत पर अभी 100% टैरिफ लगा दिया है?

नहीं। दिए गए विवरण के अनुसार अमेरिकी सीनेट ने ऐसा विधेयक पारित किया है, जिसमें राष्ट्रपति को रूस से तेल-गैस खरीदने वाले प्रमुख देशों के सामान पर 100% शुल्क लगाने का अधिकार देने का प्रस्ताव है। इसे आगे प्रतिनिधि सभा की मंजूरी की जरूरत है।

किन देशों पर 100% टैरिफ का प्रस्ताव है?

विधेयक में रूस से तेल और गैस के प्रमुख खरीदारों के रूप में भारत, चीन, अजरबैजान, हंगरी और स्लोवाकिया का उल्लेख किया गया है।

अमेरिकी सीनेट ने बिल कितने वोटों से पास किया?

विधेयक 86-11 मतों से पारित हुआ।

100% टैरिफ लगाने का कारण क्या बताया गया है?

विधेयक के समर्थकों का तर्क है कि रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों का व्यापार रूस की अर्थव्यवस्था को समर्थन देता है, जिससे यूक्रेन युद्ध जारी रखने में मदद मिलती है।

अब इस बिल का क्या होगा?

सीनेट से पारित होने के बाद विधेयक अमेरिकी प्रतिनिधि सभा में जाएगा। इसके बाद आगे की विधायी प्रक्रिया और राष्ट्रपति की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।