देखिए जबलपुर उत्तर विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड और जनता का मूड-मीटर
देखिए जबलपुर उत्तर विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड और जनता का मूड-मीटर
जबलपुर। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज बारी है मध्यप्रदेश की जबलपुर उत्तर विधानसभा सीट की। जबलपुर जिले में आने वाला जबलपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र एक तरह से बीजेपी का गढ़ रहा है। वर्तमान में बीजेपी विधायक शरद जैन यहां से जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। शरद जैन जो मध्यप्रदेश सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण और चिकित्सा शिक्षा राज्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। लेकिन अब इस इलाके में खुद शरद जैन ही मुद्दा बन गए हैं। दरअसल मौजूदा विधायक शिवराज सरकार में दो अलग-अलग विभागों के राज्यमंत्री होने के बाद भी अपने इलाके में जनता की मूलभूत समस्याएं दूर नहीं कर पाए। इलाके में जलसंकट और जलप्लावन की समस्या से हर साल आम बात है। वहीं मुख्य बाज़ारों के बुरे हाल के साथ स्मार्ट सिटी और अधूरी परियोजनाओं का विरोध भी चुनावी मुद्दा बनता जा रहा है।
जनता का आक्रोश और नाराजगी बताने के लिए काफी है कि जबलपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र की जनता के दिल और दिमाग में इन दिनों क्या चल रहा है और वक्त रहते इनकी नाराजगी दूर नहीं की गई तो आने वाले चुनाव में ये गुस्सा जीत की हैट्रिक लगा चुके शरद जैन को भारी पड़ सकता है। जबलपुर का व्यापारिक केंद्र होने के बावजूद यहां की जनता बरसों से मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है। खासकर बड़ा फुहारा, छोटा फुहारा, कमानिया, सराफा, निवाड़गंज और अंधेरदेव के व्यापारिक इलाकों में पार्किंग की समस्या, बदहाल ट्रेफिक, आवारा पशु, तंग सड़कें, और अतिक्रमण ऐसी समस्याएं बने हुए हैं, जिन्हें आज तक सुलझाने के लिए रत्ती भर काम नहीं किया गया। दूसरी बड़ी समस्याओं की बात करें तो हर साल गर्मी में जलसंकट और बारिश जलप्लावन की समस्या आम है। विपक्ष इन मुद्दों को लेकर मौजूदा विधायक को घेरने की तैयारी में जुट गया है। जबकि शरद जैन विकास को सतत प्रक्रिया बताकर और वक्त की मांग कर रहे हैं।
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सियासी महासमर 2018 में यहां स्मार्ट सिटी का मुद्दा भी जमकर गूंजना तय है। दरअसल केंद्र सरकार की प्रस्तावित स्मार्ट सिटी जबलपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में ही विकसित की जानी है, जिसमें इस विधानसभा क्षेत्र के रानीताल, गोलबाज़ार, नेपियर टाऊन और राइट टाऊन इलाकों की करीब साढ़े सात सौ एकड़ जमीन शामिल है। योजना के तहत यहां अब तक कोई भी बड़ा विकास कार्य नहीं किया गया दूसरा स्मार्ट सिटी में सड़कों के चौड़ीकरण के लिए हो रही तोड़फोड़ से जनता ख़ासी नाराज़ है।
मौजूदा विधायक के स्वास्थ्य राज्य मंत्री होने के बाद भी जबलपुर की सरकारी डिस्पेंसरियों और जिला अस्पताल में डॉक्टर्स की कमी है, जिसे लेकर आए दिन मरीज परेशान होते हैं। वहीं गोंडवाना शासनकाल की सबसे बड़ी निशानी रानी दुर्गावती के रानीताल की बदहाली और उसपर अतिक्रमण भी यहां बड़ा मुद्दा है। विपक्ष तो इस बार अनाप शनाप बिजली बिलों को भी बड़ा मुद्दा बना रहा है। हालांकि विधायक शऱद जैन के पास इनका जवाब तैयार है। कुल मिलाकर विकास को अपना मूल मुद्दा बताने वाली भारतीय जनता पार्टी के लगातार 15 साल के राज के बाद भी जबलपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र विकास के नक्शे पर रेंगता नज़र आता है। लेकिन अब जनता की बारी है और देखना है वो विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में क्या लिखती है।
सीट से सियासी इतिहास की बात की जाए तो जबलपुर की दिल कही जाने वाली इस अहम सीट पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही सियासी घमासान होते आया है। हालांकि नतीजों पर नजर डालें तो बीजेपी का पलड़ा यहां भारी रहा है। इस वक्त भी सीट पर बीजेपी का कब्जा है। जबलपुर की ये विधानसभा सीट वैसे तो अनारक्षित लेकिन यहां जाति समीकरण चुनाव नतीजों को प्रभावित करते हैं। आगामी सियासी महासमर के मद्देनजर एक बार फिर दोनों पार्टियों ने जोर आजमाईश शुरू कर दी है।
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कमानिया गेट के नाम से मशहूर ये स्मारक 1939 में यहां हुए कांग्रेस के 52वें अधिवेशन की निशानी है। जबलपुर की उत्तर विधानसभा क्षेत्र में मौजूद इसी कमानिया गेट के सामने कभी कांग्रेस ने स्वराज का सपना संजोया था। लेकिन अब ये इलाका बीजेपी का अभेद्य किला बन गया है। जबलपुर उत्तर विधानसभा में पिछले 15 सालों से बीजेपी का परचम लहरा रहा है। शरद जैन यहां से 2003, 2008 और 2013 में जीत की हैट्रिक लगा चुके हैं। वैसे पहले भी अधिकांश समय यहां बीजेपी ने ही राज किया है। 2013 के विधानसभा चुनाव की बात करें तो बीजेपी के शरद जैन ने कांग्रेस के नरेश सराफ को शिकस्त दी थी। इस चुनाव में बीजेपी को जहां 74656 वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस के खाते में महज 41093 वोट आए थे। इस प्रकार जीत का अंतर 33563 वोटों का रहा।
जबलपुर उत्तर विधानसभा के जातिगत समीकरण की बात की जाए तो इस फैक्टर को साधे बिना यहां जीत हासिल करना मुश्किल है। हालांकि जबलपुर ज़िले की दीगर विधानसभा क्षेत्रों के अलग इस सीट पर मतदाताओं की साक्षरता दर ज्यादा है। फिर भी यहां जातिगत समीकरण निर्णायक भूमिका निभाते हैं। जाहिर है मिशन 2018 की तैयारियों में जुटे सियासी पार्टियां इसी को ध्यान में रखकर अपनी रणनीति बनाएंगे। बीजेपी जहां इस बार भी जैन या ब्राम्हण चेहरे को प्रत्याशी बना सकती है। वहीं कांग्रेस को भरोसा है कि बहुजन समाज पार्टी से उसका संभावित गठबंधन उसे मिशन 2018 की बाजी जीताएगा।
देखा जाए तो विकास के मुद्दे पर ही जबलपुर उत्तर विधानसभा क्षेत्र में साल 2018 की सियासी महाभारत छिड़ने जा रही है। चुनाव में आमने-सामने होने से पहले दोनों ही प्रमुख दल यानि बीजेपी और कांग्रेस दावेदारों की टशन से जूझ रही हैं। शरद जैन के राज्यमंत्री होने के बावजूद जहां बीजेपी में उनके खिलाफ दावेदारों की कमी नहीं हैं वहीं कांग्रेस में तो यहां दावेदारों की बाढ़ सी आ गई है। ऐसे में जीत सकने वाले उम्मीदवार को उतारना दोनों पार्टियों के लिए किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
जबलपुर जिले के 8 विधानसभा सीटों में जबलपुर उत्तर विधानसभा सीट की सबसे सेफ सीट मानी जाती है। लेकिन इस बार हालात जुदा हैं। बीते 15 सालों से विधायक शरद जैन के खिलाफ असंतोष और एंटी इंकमबेंसी फेक्टर साफ नज़र आने लगा है। बीते दिनों ऐसे कई वाकए भी सामने आए जब बीजेपी के ही कुछ नेताओं ने मंत्री शरद जैन का विरोध किया। पार्टी की सेफ सीट मानकर कई बीजेपी नेता इस बार टिकट के लिए जोर आजमाईश कर रहे हैं। शरद जैन को पार्टी के अंदर खेमे से बड़ी चुनौती मिल रही हैं। बीजेपी के संभावित दावेदारों की बात करें तो भारतीय जनता युवा मोर्चा के पूर्व अध्यक्ष धीरज पटेरिया, महाकौशल विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष प्रभात साहू, जबलपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष डॉक्टर विनोद मिश्रा, पूर्व मंत्री अजय विश्नोई, नगर निगम के एमआईसी सदस्य नवीन रिछारिया और श्रीराम शुक्ला टिकट के प्रबल दावेदार हैं।
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वहीं दूसरी तरफ जबलपुर उत्तर विधानसभा पर जीत की हैट्रिक लगा चुके मंत्री शरद जैन अपनी टिकट को लेकर आश्वस्त हैं। हालांकि वो भी पार्टी लाईन पर ही चलने की बात कह रहे हैं। आरएसएस से उनकी नजदीकी भी उनके दावे को मजबूत करता है।
वो कांग्रेस ही क्या जहां दावेदारों की भीड़ ना हो। हाल ही में पार्टी के प्रदेश सह प्रभारी हर्षवर्धन सकपाल ने जब यहां आकर टिकट के दावेदारों से वन टू वन चर्चा की तो वो भी दावेदारों की तादात से हैरान नज़र आए। कांग्रेस में इस सीट से विनय सक्सेना, सौरभ शर्मा, बाबू विश्वमोहन और अमरीश मिश्रा टिकट के लिए जोर लगा रहे हैं। इसके अलावा राशिद सुहैल सिद्दकी, अनुराग जैन गढ़वाल, सचिन यादव, नरेश सराफ, कल्याणी पाण्डेय समेत दर्जन भर नेता अपनी दावेदारी ठोंक रहे हैं।
पिछले विधानसभा चुनाव के नतीजों पर गौर करें तो इस बार भी जबलपुर उत्तर विधानसभा में सियासी जंग कांग्रेस और बीजेपी के बीच ही होगी। दरअसल यहां बीजेपी और कांग्रेस छोड़ तमाम प्रत्याशियों की जमानतें हर विधानसभा चुनावों में जब्त होती आई है। लिहाजा दोनों ही पार्टियों से टिकट पाने वालों की फेहरिस्त ख़ासी लंबी है।
वेब डेस्क, IBC24

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