लोरमी विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, देखिए क्या कहता है जनता का मूड-मीटर

लोरमी विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, देखिए क्या कहता है जनता का मूड-मीटर

लोरमी विधानसभा के विधायकजी का रिपोर्ट कार्ड, देखिए क्या कहता है जनता का मूड-मीटर
Modified Date: November 29, 2022 / 08:09 pm IST
Published Date: August 9, 2018 2:08 pm IST

मुंगेली। विधायकजी के रिपोर्ट कार्ड में आज बारी है छत्तीसगढ़ की लोरमी विधानसभा क्षेत्र कीमुंगेली जिले में आने वाली इस सीट पर सियासी पैंतरेबाजी शुरू हो चुकी हैमुद्दे और मसले भी गूंजने लगे हैं इलाके में भरपूर पानी होने के बावजूद लोग पीने के पानी के लिए तरस रहे हैं तो वहीं इस इलाके में जिले का सबसे बड़ा डैम होने के बावजूद क्षेत्र के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। सड़क, बिजली, पानी का हाल बेहाल है।

इन हालात को देखकर ही लोरमी विधानसभा क्षेत्र में विकास का अंदाजा लगाया जा सकता हैजंगल से घिरे छोटे-छोटे गांवों में बसे इस इलाके में बुनियादी सुविधाओं का इंतजार है हालात ये है कि 2009 में गठन हुए अचानकमार रिजर्व के कोर जोन में बसे 25 गांवों में से सिर्फ 6 गांवों का ही विस्थापन सरकार अब तक कर पाई हैअभी भी 19 गांवों के लोग विस्थापन का इंतजार कर रहे हैं..चुनाव नजदीक है तो इस मुद्दे को लेकर सियासत होना भी लाजमी है।

लोरमी विधानसभा क्षेत्र में सड़क, पानी और बिजली को लेकर भी लोगों की शिकायतें कम नहीं हैमुंगेली जिले का सबसे बड़ा डैम खुड़िया जलाशय होने के बावजूद क्षेत्र के किसान पिछले कई सालों से सूखे की मार झेल रहे हैं। वहीं मनियारी नदी का अस्तित्व भी खतरे में हैं, जिसे लेकर इलाके की जनता अपने नेताओं से आने वाले चुनाव में सवाल जरूर पूछेगी

यह भी पढ़ें : शिक्षाकर्मियों को वरिष्ठता सूची का इंतजार, लेटलतीफी हुई तो आचार संहिता में फंसने की आशंका

लचर चिकित्सा व्यवस्था भी लोरमी विधानसभा के लोगों के लिए बड़ी समस्या है। अस्पताल बन गया है, लेकिन डॉक्टर नहीं हैमलेरिया, डायरिया जैसी मौसमी बीमारियों की चपेट में आकर लोगों की मौत हो रही है। बीते कुछ सालों में मरवाही के बाद लोरमी विकासखण्ड में सर्वाधिक लोगों की जान मलेरिया से गई है। शिक्षा और रोजगार के मुद्दे को लेकर भी तोखन साहू पर आरोप लग रहे हैं..हालांकि विधायक जी का दावा है कि उनके कार्यकाल में बेहतर विकास हुआ है। प्रशासनिक अधिकारियों की मनमानी को लेकर भी लोरमी विधानसभा के लोगों में भारी गुस्सा नजर आता है। इसके अलावा मनरेगा ओडीएफ और प्रधानमंत्री आवास योजना में भ्रष्टाचार का मुद्दा भी यहां बड़ा मुद्दा होगा।

लोरमी विधानसभा क्षेत्र ने प्रदेश की राजनीति में कई दिग्गज नेता दिए हैं। ये इलाका किसी एक राजनीतिक दल का गढ़ कभी नहीं रहा लेकिन यहां की जनता ने सबसे ज्यादा कांग्रेस को मौका दिया है अब तक हुए 14 चुनावों में 7 बार कांग्रेस, 3 बार रामराज्य परिषद और 4 बार बीजेपी का कब्जा रहा है। फिलहाल यहां से बीजेपी के तोखन साहू विधायक हैं। कांग्रेस के प्रभाव वाली लोरमी विधानसभा में पूर्व विधायक धरमजीत सिंह के जेसीसीजे में शामिल होने के बाद यहां सियासी समीकरण बेहद दिलचस्प हो गया है।

श्रेणी की तलहटी में बसा लोरमी कुदरती तौर पर काफी समृद्ध नजर आता हैअचानकमार टाइगर रिजर्व और खुड़िया जलाशय इस इलाके को अलग पहचान देते हैं51 हजार 146 हेक्टेयर में फैली लोरमी विधानसभा क्षेत्र में एक नगर पंचायत लोरमी और 133 ग्राम पंचायतें शामिल हैंअंग्रेजों के जमाने से ही ये इलाका चर्चा में रहा हैवैसे इसके सियासी इतिहास की बात की जाए तो शुरूआत से ही यहां की सियासत पर राज परिवारों और जमींदारों का कब्जा रहा हैकांग्रेस के रुझान वाले लोरमी विधानसभा सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा हैयहां से सात बार कांग्रेस के उम्मीदवार जीते हैं, जिसमें मध्यप्रदेश के पूर्व मंत्री और छत्तीसगढ़ के पहले विधानसभा अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद शुक्ल और धरमजीत सिंह यहां से चुनाव जीते हैं। जबकि भारतीय जनता पार्टी को चार बार सफलता मिली हैइसमें निरंजन केशरवानी, भूपेंद्र सिंह ठाकुर, मुनीराम साहू और वर्तमान विधायक तोखन साहू शामिल हैंयदि 2013 के विधानसभा चुनाव की बात की जाए तो तोखन साहू ने धरमजीत सिंह को 6 हजार 241 वोटों से हरायाइस चुनाव में जहां बीजेपी को 52302 वोट मिले वहीं कांग्रेस के खाते में 46061 वोट आए

1 लाख 88 हजार 234 मतदाता वाले लोरमी विधानसभा में जातिगत समीकरण की बात करें तो यहां 30 फीसदी अनुसूचित जाति और 20 फीसदी अनुसूचित जनजाति के वोटर्स हैं। इसके बाद 35 फीसदी पिछड़ा वर्ग के लोग यहां बसते हैं, जिसमें साहू सर्वाधिक हैंइसके अलावा 15 फीसदी में ब्राह्मण, ठाकुर और दूसरे सामान्य मतदाता आते हैंजातिगत आधार पर ही इस सीट से इस बार भी कई नेता अपनी दावेदारी जताने में जुटे हैं। हालांकि जाति समीकरण के अलावा यहां कई ऐसे दूसरे मुद्दे भी हैं जो इस बार यहां की सियासी किस्मत तय करेंगे।

यह भी पढ़ें : कांग्रेस का आरोप- शिवराज सरकार में भी मुजफ्फरपुर शेल्टर होम जैसा केस, भाजपा ने ये कहा

लोरमी में आगामी विधानसभा चुनाव बेहद रोचक होगा, क्योंकि चुनाव से पहले ही यहां दोनों प्रमुख राजनीतिक दल बीजेपी और कांग्रेस प्रत्याशियों की भीड़ से जूझ रहे हैं। कांग्रेस में तो प्रत्याशियों की भीड़ समझ में आती है, लेकिन सिटिंग एमएलए होने के बावजूद तोखन साहू को भी दूसरे दावेदारों से जूझना पड़ रहा है। उधर कांग्रेस छोड़ जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ में गए धरमजीत सिंह यहां के प्रत्याशी घोषित हो चुके हैं और वे अकेले ही धुआंधार प्रचार कर रहे हैं।

सियासत के रंग में लोरमी में दीवारें रंगी नजर आती हैं। पार्टी सिंबल के साथ बड़ेबड़े अक्षरों में इन नामों के लिखे जाने के पीछे खास मकसद हैदरअसल ये उन नेताओं के नाम हैंजिन्होंने दीवारों को अपनी दावेदारी जताने का जरिया बना लिया हैपार्टी का टिकट चाहने वाले नेताओं के बीच हर उस दीवार पर कब्जा जमा लेने की होड़ मची है

कांग्रेस की बात की जाए तो तीन बार के विधायक धरमजीत सिंह के जेसीसीजे में शामिल होने और प्रत्याशी घोषित होने के बाद यहां कई कांग्रेसियों में टिकट की उम्मीद जगा दी हैयूं तो कांग्रेस में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त है लेकिन इसमें भी जिनका दावा सबसे ज्यादा मजबूत है उनमें पूर्व जिला पंचायत सदस्य मायारानी सिंह, राजपरिवार के अनिल कुमार दास, उनके भतीजे पवन कुमार दास, युवा कांग्रेस नेता सागर सिंह बैस, नगर पंचायत के उपाध्यक्ष शत्रुघन चंद्राकर हैं। इनके साथ ही राकेश तिवारी, विद्यानंद और शोभा कश्यप के नाम भी गूंज रहे हैं। सभी का कहना है कि हमें टिकिट मिलेगी तो हम पूरी तरह समर्पित भाव से चुनाव लड़ेंगे और जीतेंगे

कांग्रेस में तो हर चुनाव में एक से अधिक दावेदार रहते ही हैंबीजेपी में भी कमोबेश हालात वही हैंसिटिंग एमएलए तोखन साहू के अलावा भी लोरमी विधानसभा सीट के कई नेता टिकट के लिए दावेदारी कर रहे हैं। हालांकि ये दावेदार कैमरे पर टिकट को आलाकमान का विषय बताते हैं, लेकिन आफ द रिकार्ड सभी यह स्वीकार करते हैं कि वे टिकिट के लिए प्रयास कर रहे हैंउधर अपनी ही पार्टी के टिकिट दावेदारों की भीड़ पर मौजूदा विधायक तोखन साहू कहते हैं कि लोकतंत्र है, सभी को टिकिट मांगने का अधिकार है, लेकिन पार्टी जिसे कहेगी उसी के लिए सभी काम करेंगे

यह भी पढ़ें : केंद्रीय मंत्रिमंडल ने तीन तलाक बिल में संशोधनों को दी मंजूरी, अब ये प्रावधान

लोरमी में इस बार मुकाबला कांग्रेस और बीजेपी के बीच नहीं रहकर त्रिकोणीय रहने की पूरी संभावना दिख रही हैदरअसल नई नवेली जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ ने यहां से तीन बार विधायक रह चुके धरमजीत सिंह को अपना प्रत्याशी घोषित किया है और वो चुनावी तैयारियों में भी जुट गए हैं। इस इलाके में गोंडवाना गणतंत्र पार्टी और बीएसपी की भी मौजूदगी रही है। आदिवासी वोटों पर भी उनका प्रभाव रहा है। कुल मिलाकर इस सीट पर कई ऐसे सियासी समीकरण हैं जो नतीजों पर असर डालेंगे और सभी पार्टियां इन समीकरणों का साधने में लग गई हैं 

वेब डेस्क, IBC24


लेखक के बारे में