बिना ट्रीटमेंट खारून नदी में छोड़ा जा रहा सीवेज लाइन का पानी
बिना ट्रीटमेंट खारून नदी में छोड़ा जा रहा सीवेज लाइन का पानी
रायपुर के पेयजल में मल में पाए जाने वाले ई कोलाई बैक्टीरिया होने के खुलासे के बाद IBC24 ने फिल्टर प्लांट की पड़ताल किया। खारुन की हालत देखकर शायद आप नगर निगम की ओर से सप्लाई किया जाने वाला पानी पीना ही छोड़ दें।

पाइपलाइन से खारुन नदी में गिर रहे पानी को देखकर ये मत समझिए. कि नदी का जलस्तर बढ़ाया जा रहा है, बल्कि ये शहर की सीवरेज लाइन का पानी है, जो बिना साफ किए ही सीधे नदी में छोड़ा जा रहा।

यही नहीं 17 बड़े नाले.24 घंटे खारुन में 2 लाख एमएलडी ज़हरीला पानी पहुंचा रहे हैं, जबकि खारुन से रायपुर नगर निगम और WRS के प्लांट को पानी भेजा रहा है।
हैरत की बात तो ये है, कि राज्य गठन के 17 साल बाद भी खारुन के किनारे इन नालों का पानी साफ करने.एक भी सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट नहीं लगाया जा सका है। अब खारुन से कुम्हारी को भी नाले के पास से ही पानी सप्लाई करने की तैयारी है।

बात सिर्फ गंदे नालों की नहीं है, रायपुर की लाइफ लाइन कहे जाने वाली खारुन. अधिकारियों की लापरवाही का भी दंश झेल रही है। गणेश और दुर्गा पक्ष के समय से ओवरब्रिज के नीचे दर्जनों ढांचे, मिट्टी के ढेर और कचरे का ढेर पड़ा है।

नदी का पानी रुक कर सड़ने लगा है। यही हाल सरोना और महादेव घाट के पास है। यहां प्लास्टिक और कचरे का ढेर जमकर पत्थर-सा सख्त हो गया है और दुर्गंध तो इतनी है, कि यहां खड़े रहना भी मुश्किल है।
शासन लक्ष्मण झूला बना रहा है तो रिवर फ्रंट और घाट बनाने के लिए भी करोड़ों खर्च किए जा रहें हैं लेकिन नदी के पानी को साफ रखने के लिए कोई कवायद नहीं की जा रही है।
वेब डेक्स, IBC24

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