Face To Face Madhya Pradesh: किताबों में संघ… MP में नई जंग! आखिर कांग्रेस को संघ के नेताओं की किताबों पर एतराज क्यों?

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Face To Face Madhya Pradesh: किताबों में संघ... MP में नई जंग! आखिर कांग्रेस को संघ के नेताओं की किताबों पर एतराज क्यों?

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  • Publish Date - August 12, 2024 / 09:10 PM IST,
    Updated On - August 12, 2024 / 09:10 PM IST

Face To Face Madhya Pradesh

Face To Face Madhya Pradesh: भोपाल। एमपी के कॉलेजों में अब संघ के नेताओं की लिखी किताबें पढ़ाई जाएंगी। इस खबर ने सूबे की सियासत में नए युद्ध के लिए मोर्चा खोल दिया है। कांग्रेस खुलकर इसके विरोध में आ गई है। संघ की कांग्रेस से अदावत नई नहीं है, लेकिन क्या देश और प्रदेश के लिए संघ अछूत है ? क्या संघ पर कानूनी बंदिश है ? क्या उसकी विचारधारा पर कोई रोक है ? संघ से असहमत होना लोकतांत्रिक हक है। पर, उसे व्यवस्था से बाहर करने की जिद इसके मायने क्या हैं ? क्या समावेशी सियासत का यही अर्थ है कि किसी एक तबके को भरसक बाहर रखा जाए या फिर विचारधारा के स्तर पर विरोध के बाद भी उसे उसका स्पेस दिया जाए?

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मध्यप्रदेश में कांग्रेस-बीजेपी फिर आमने-सामने हैं..जुबानी जंग के केंद्र में एक बार फिर संघ है। सियासी वार-पलटवार की शुरूआत हुई मोहन सरकार के एक फैसले से। बीजेपी सरकार अब कॉलेजों में संघ विचारकों की लिखी किताबें पढ़ाने का निर्णय लिया है। इसके तहत RSS नेताओं की लिखी 88 किताबें भारतीय ज्ञान परंपरा प्रकोष्ठ के जरिए खरीदने का उच्च शिक्षा विभाग को आदेश दिया है। मोहन सरकार के इस फैसले के बाद कांग्रेस आग बबूला है, उसने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा है।

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कांग्रेस के हमलों पर बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा ने भी जोरदार पलटवार किया है। वीडी शर्मा ने कहा कि, कांग्रेस का तो काम ही सिर्फ और सिर्फ विरोध करना है। नफरत का पाठ तो कांग्रेस के राज में पढ़ाया गया है।  सरकार ने आदेश के साथ जिन RSS नेताओं की किताबों की सूची दी है, उसमें संघ के सह सरकार्यवाहक रहे सुरेश सोनी, डॉक्टर अतुल कोठारी, दीनानाथ बत्रा, देवेन्द्र राव देशमुख सहित कई RSS विचारकों की किताबें शामिल है।

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Face To Face Madhya Pradesh: ये बात जगजाहिर है कि बीजेपी के अधिकांश नेता संघ की पृष्ठभूमि से आते हैं। RSS की विचारधारा को मानते और प्रचार करते हैं। अभी ज्यादा दिन नहीं बीते जब 22 जुलाई को ही केंद्र सरकार ने सरकारी कर्मचारियों के संघ के कार्यक्रमों में भाग लेने पर लगा 58 साल पुराना बैन हटाया था। मोहन सरकार का ताजा फैसला RSS के समर्थन में उसी कड़ी में उठाया फैसला माना जा रहा है, जो कांग्रेस को नागवार गुजर रहा है।

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