हत्या के 42 साल पुराने मामले में 100 वर्षीय एक बुजुर्ग हुए बरी, परिवार को मिला सुकून
हत्या के 42 साल पुराने मामले में 100 वर्षीय एक बुजुर्ग हुए बरी, परिवार को मिला सुकून
हमीरपुर (उप्र), पांच फरवरी (भाषा) हमीरपुर के करीब 100 वर्षीय धनीराम के दामन पर लगा कत्ल के इल्जाम का दाग धुलने में चार दशक से भी ज्यादा का वक्त लग गया। अब वह और उनके परिवार के सदस्य सुकून महसूस कर रहे हैं।
करीब 42 वर्ष तक चली कानूनी लड़ाई के बाद इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने बुधवार को धनीराम को निचली अदालत से मिली उम्रकैद की सजा को रद्द करते हुए उसे बरी कर दिया।
न्यायमूर्ति चंद्र धारी सिंह और न्यायमूर्ति संजीव कुमार की खंडपीठ ने जमीन के विवाद को लेकर 1982 में हुई गुनुवा की हत्या के मामले में 1984 में हमीरपुर की सत्र अदालत द्वारा धनी राम को दी गई उम्रकैद की सजा को रद्द कर दिया।
गुनुवा की हत्या को लेकर धनीराम को दो अन्य अभियुक्तों– सत्ती दीन और मैकू के साथ दोषी ठहराया गया था। मैकू जमानत पर रिहा होने के बाद फरार हो गया जबकि सत्ती दीन की अदालती प्रक्रिया के दौरान मौत हो गई। वर्ष 1986 से उच्च न्यायालय के आदेश पर जमानत से बाहर रहे धनीराम इस मामले में अकेले अपीलकर्ता थे।
उच्च न्यायालय द्वारा बरी किये जाने पर धनीराम के परिवार को 42 साल बाद सुकून मिला है।
धनीराम के सबसे छोटे बेटे और भुलसी गांव के प्रधान लल्लू राम ने बताया कि उनके पिता की याददाश्त अब कमजोर हो गयी है लेकिन वह एक बात कभी नहीं भूले कि उनके खिलाफ हत्या का एक मुकदमा चल रहा है।
लल्लू राम ने कहा कि जब उनके पिता को पता चला कि अदालत ने उन्हें बरी कर दिया है तो उन्हें चैन मिला।
धनीराम को निचली अदालत द्वारा सजा सुनाये जाने से उनकी सामाजिक छवि पर भी असर पड़ा। उनके बेटे लल्लू राम ने कहा, ‘‘निचली अदालत ने जो सजा सुनायी, वह हमारे परिवार के लिये किसी कलंक से कम नहीं थी। रिश्तेदारों और करीबी लोगों ने उनसे दूरी बना ली। घर के बच्चों की शादी करना भी मुश्किल हो गया था क्योंकि कोई भी हत्या के आरोपी के बेटों से शादी नहीं करना चाहता था।’’
वर्ष 1982 में घटना के समय पूरा परिवार धनीराम पर निर्भर था। परिजन के मुताबिक इस मामले में लंबे समय तक फंसे रहने के कारण उन्हें गंभीर आर्थिक परेशानी और मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा। उनके अनुसार जिंदगी का ज़्यादातर हिस्सा अदालत और कचहरी जाने, वकीलों का इंतजाम करने और अनिश्चितता में जीने में बीता।
लल्लू राम ने दावा किया कि उच्च न्यायालय ने धनी राम को मामले के गुण—दोष के आधार पर भी बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को संदेह से परे साबित करने में नाकाम रहा।
भाषा सं. सलीम राजकुमार
राजकुमार

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