आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों से इलाज का अनुभव जानेगा एआई आधारित वॉइस बॉट : ब्रजेश पाठक

आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों से इलाज का अनुभव जानेगा एआई आधारित वॉइस बॉट : ब्रजेश पाठक

आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों से इलाज का अनुभव जानेगा एआई आधारित वॉइस बॉट : ब्रजेश पाठक
Modified Date: August 30, 2026 / 10:09 pm IST
Published Date: August 30, 2026 10:09 pm IST

लखनऊ, 30 अगस्त (भाषा) उत्तर प्रदेश में आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों और उनके तीमारदारों से इलाज और अस्पताल में मिले अनुभव की जानकारी लेने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित वॉइस बॉट विकसित किए जा रहे हैं। इसके माध्यम से मरीजों से फोन पर सीधे प्रतिक्रिया ली जाएगी।

प्रदेश के उपमुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने रविवार को बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को और बेहतर बनाने के लिए नोडल एजेंसी ‘साचीज’ (स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज) ने मरीजों के अनुभव और उनकी राय को महत्वपूर्ण आधार बनाने की दिशा में यह पहल शुरू की है।

पाठक ने बताया कि साचीज द्वारा विकसित किए जा रहे एआई आधारित वॉइस बॉट के जरिए आयुष्मान कार्ड धारक मरीजों और उनके परिजनों से फोन पर उनके इलाज, अस्पताल की सुविधाओं और वहां मिले अनुभव के बारे में जानकारी ली जाएगी।

उन्होंने कहा कि इस प्रणाली का उद्देश्य केवल मरीजों से प्रतिक्रिया प्राप्त करना नहीं है, बल्कि तकनीक की मदद से उन प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण कर ऐसी जानकारियां सामने लाना है, जिनके आधार पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि इससे अस्पतालों की निगरानी, शिकायतों के समाधान, ऑडिट और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने में मदद मिलेगी।

साचीज की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) अर्चना वर्मा ने बताया कि इस पहल का उद्देश्य मरीजों की प्रतिक्रियाओं में उन मामलों की पहचान करना है, जिन पर आगे कार्रवाई की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि एआई आधारित विश्लेषण के माध्यम से बड़ी संख्या में मिलने वाली प्रतिक्रियाओं को व्यवस्थित किया जा सकेगा। यदि किसी मरीज द्वारा इलाज नहीं मिलने, अनधिकृत शुल्क वसूले जाने, खराब व्यवहार या किसी अन्य समस्या की जानकारी दी जाती है तो ऐसे मामलों को संबंधित टीमों तक पहुंचाया जाएगा।

वर्मा ने कहा कि इससे शिकायतों के निस्तारण और अस्पतालों की निगरानी व्यवस्था को और प्रभावी बनाने में सहायता मिलेगी। इस व्यवस्था के लागू होने से स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी केवल आंकड़ों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि मरीजों के वास्तविक अनुभव को भी इसमें शामिल किया जा सकेगा।

भाषा

सलीम रवि कांत


लेखक के बारे में