अखिलेश का तंज : भाजपा विधायकों की चिट्ठी जनहित नहीं, टिकट के लिए आवेदन पत्र

अखिलेश का तंज : भाजपा विधायकों की चिट्ठी जनहित नहीं, टिकट के लिए आवेदन पत्र

अखिलेश का तंज : भाजपा विधायकों की चिट्ठी जनहित नहीं, टिकट के लिए आवेदन पत्र
Modified Date: May 25, 2026 / 01:29 pm IST
Published Date: May 25, 2026 1:29 pm IST

लखनऊ, 25 मई (भाषा) समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोमवार को राज्य में बिजली संकट को लेकर भाजपा सरकार और विधायकों-सांसदों पर तीखा हमला बोला है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश में ‘महा विद्युत आपदा’ से जनता का आक्रोश बढ़ रहा है और इससे बचने के लिए भाजपाई नेता दिखावटी चिट्ठियां लिखकर ‘काग़ज़ी कवच’ से खुद को बचा रहे हैं।

अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया मंच “एक्स” पर पोस्ट में कहा, ‘भयभीत भाजपाई विधायक-सांसद जिस चिट्ठी से खुद को बचाना चाह रहे हैं, वह दरअसल अपनी सरकार को लिखा कोई जनहित का पत्र नहीं है, बल्कि भाजपा रूपी डूबते जहाज़ को छोड़कर विपक्ष से आगामी चुनावों में टिकट पाने के लिए आवेदन पत्र है।’

सपा प्रमुख ने इसी पोस्ट में स्पष्ट किया कि उनके गठबंधन में ऐसे नेताओं के लिए कोई जगह नहीं है, ‘जो जनता को दुख-दर्द और दिक्कतों के सिवा कुछ नहीं देते।’

उन्होंने कहा कि “इस जानलेवा गर्मी में बड़े-बुजुर्गों, बीमारों, बच्चों और पानी-बिजली की कमी से जूझ रही महिलाओं की दुर्दशा परिवारवाले ही समझ सकते हैं।”

अखिलेश ने नौकरशाह से राजनीतिज्ञ बने ऊर्जा मंत्री अरविंद कुमार शर्मा का बिना नाम लिए तंज कसते हुए पोस्ट में आगे कहा, ‘कभी आपदा में अवसर ढूंढने वालों ने अवसर की जगह जिस ‘अफसर’ को ढूंढा था, वो अफसर अब स्वयं आपदा साबित हो रहा है। समस्या का समाधान पूछने पर दोनों हाथ खड़े करके नारा लगाकर बच निकलने वालों के रहते समस्या नहीं सुलझेगी।’

उन्होंने सवाल उठाया कि भाजपा के डबल इंजन की आपसी टकराहट का खामियाजा जनता क्यों भुगते? अखिलेश ने कहा कि यह बड़ा मौका है कि पूरी तरह नाकाम हो चुके किसी ‘दूत-मंत्री’ को हटा दिया जाए। इससे मुख्य जी (मुख्यमंत्री) को मंत्रिमंडल विस्तार करने और किसी ‘घाटहीन’ को समायोजित करने का मौका भी मिल जाएगा, जो सत्ता सुख के लालच में हाथ मलते रह गए हैं।

सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि उप्र की भाजपा सरकार जानती है कि वह अब वापस नहीं आएगी, इसलिए जनता की मुश्किलों को नजरअंदाज कर सिर्फ खजाना भरने में लगी है। उन्होंने नारा दिया, ‘जन-जन कहे आज का, भार बन गयी भाजपा!’

भाषा आनन्द

मनीषा

मनीषा


लेखक के बारे में