इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2013 की भर्ती प्रक्रिया से हुई प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां बहाल कीं
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने 2013 की भर्ती प्रक्रिया से हुई प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां बहाल कीं
लखनऊ, 31 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने शुक्रवार को एकल पीठ के उस आदेश को निरस्त कर दिया, जिसमें वर्ष 2013 की भर्ती विज्ञप्ति के तहत विद्यालयों में प्रधानाचार्यों की नियुक्तियों को रद्द कर दिया गया था। इसके साथ ही वर्ष 2022 में अंतिम रूप दी गई नियुक्तियां बहाल हो गई हैं।
न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने श्याम शंकर उपाध्याय एवं अन्य तथा उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड, प्रयागराज की ओर से दायर विशेष अपीलों को स्वीकार कर लिया।
प्रधानाचार्यों के पदों पर भर्ती की प्रक्रिया वर्ष 2013 में जारी विज्ञापन संख्या-3 के माध्यम से शुरू हुई थी। हालांकि, चयन प्रक्रिया लगभग नौ वर्ष तक लंबित रही और नियुक्तियों को वर्ष 2022 में अंतिम रूप दिया गया।
एकल पीठ ने एक फरवरी, 2023 के अपने फैसले में पूरी चयन प्रक्रिया को अवैध करार देते हुए सभी नियुक्तियां रद्द कर दी थीं।
अदालत ने अपने उस फैसले में कहा था कि विज्ञापन जारी होने के लगभग नौ वर्ष बाद भर्ती प्रक्रिया पूरी करना संविधान के अनुच्छेद 14 और 16 का उल्लंघन है, क्योंकि वर्ष 2014 के बाद आवश्यक योग्यता प्राप्त करने वाले अभ्यर्थियों को लंबे समय तक भर्ती प्रक्रिया लंबित रहने के कारण प्रतिस्पर्धा का अवसर नहीं मिल सका। एकल पीठ ने अधिकारियों को कानून के अनुरूप नई भर्ती प्रक्रिया शुरू करने का भी निर्देश दिया था।
इस आदेश को विशेष अपीलों के माध्यम से खंडपीठ में चुनौती दी गई थी। अपीलों पर सुनवाई के दौरान वर्ष 2023 में खंडपीठ ने यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि बड़ी संख्या में नियुक्तियां प्रभावित होंगी और चयनित अभ्यर्थी दिसंबर 2022 से प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत हैं।
खंडपीठ ने शुक्रवार को अपना फैसला सुनाते हुए विशेष अपीलों को स्वीकार कर लिया और एकल पीठ के आदेश को निरस्त कर दिया। इसके साथ ही वर्ष 2013 की भर्ती प्रक्रिया के तहत की गई प्रधानाचार्यों की नियुक्तियां वैध बनी रहेंगी।
भाषा
सं, आनन्द रवि कांत

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