गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 10 साल से प्रथम वर्ष में अटका है एमबीबीएस का छात्र

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 10 साल से प्रथम वर्ष में अटका है एमबीबीएस का छात्र

गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में 10 साल से प्रथम वर्ष में अटका है एमबीबीएस का छात्र
Modified Date: January 4, 2026 / 07:03 pm IST
Published Date: January 4, 2026 7:03 pm IST

गोरखपुर, चार जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में एक अजीबोगरीब मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन को नियमों से जुड़ी पेचीदगियों से जूझने पर मजबूर कर दिया है। यह मामला 2014 बैच के एक एमबीबीएस छात्र से जुड़ा है, जो एक दशक से अधिक समय से प्रथम वर्ष में ही अटका हुआ है।

आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि समस्या को और भी जटिल बनाते हुए, छात्र के पिता ने कॉलेज अधिकारियों के फोन कॉल को बार-बार अनसुना कर दिया है और अपने बेटे के शैक्षणिक भविष्य के प्रति कोई चिंता नहीं दिखाई है।

कॉलेज अधिकारियों के अनुसार छात्र 2014 से नए स्नातक छात्रावास में रह रहा है, लेकिन पिछले 11 वर्षों में एक बार भी प्रथम वर्ष की एमबीबीएस परीक्षा उत्तीर्ण करने में असफल रहा है। वर्ष 2015 में परीक्षा में असफल होने के बाद, उसने न तो दोबारा परीक्षा फॉर्म भरा और न ही बाद में परीक्षा दी। वह नियमित पढ़ाई में भी संलग्न नहीं है।

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अधिकारियों ने बताया कि प्रचलित चिकित्सा शिक्षा नियमों के अनुसार, प्रथम वर्ष की एमबीबीएस परीक्षा में असफल होने वाले छात्र को नए सिरे से प्रवेश लेने की आवश्यकता नहीं होती है और वह केवल परीक्षा फॉर्म भरकर दोबारा परीक्षा दे सकता है।

इस प्रावधान का हवाला देते हुए, छात्र का नामांकन तकनीकी रूप से वैध बना हुआ है, जिससे कॉलेज को उसका प्रवेश रद्द करने से रोका जा रहा है।

उन्होंने कहा कि बार-बार परामर्श देने के बावजूद जब कोई नतीजा नहीं निकला, तो कॉलेज प्रशासन ने छात्र के पिता से संपर्क किया। प्रधानाचार्य कार्यालय से तीन बार फोन करके उन्हें कॉलेज आने के लिए कहा गया, लेकिन वे अभी तक नहीं आए हैं।

हालात और भी पेचीदा हो गए हैं क्योंकि छात्र का नामांकन जारी रहने के कारण उसे छात्रावास से निकालना मुश्किल हो रहा है। परीक्षा फॉर्म के साथ ही मेस शुल्क भी लिया जाता है, इसलिए छात्र ने कई वर्षों से मेस शुल्क नहीं चुकाया है, लेकिन फिर भी उसे मुफ्त भोजन की सुविधा मिल रही है।

कॉलेज ने अब राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद (एनएमसी) से इस संबंध में मार्गदर्शन मांगा है।

बीआरडी मेडिकल कॉलेज के प्रधानाचार्य डॉ. रामकुमार जायसवाल ने कहा, ‘एनएमसी से स्पष्ट निर्देश मिलने के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।’

भाषा

सं, आनन्द रवि कांत


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