आजमगढ़ हत्याकांड : पुलिस अधीक्षक ने ली दो बच्चियों की परवरिश की जिम्मेदारी

आजमगढ़ हत्याकांड : पुलिस अधीक्षक ने ली दो बच्चियों की परवरिश की जिम्मेदारी

आजमगढ़ हत्याकांड : पुलिस अधीक्षक ने ली दो बच्चियों की परवरिश की जिम्मेदारी
Modified Date: September 25, 2026 / 12:20 am IST
Published Date: September 25, 2026 12:20 am IST

आजमगढ़, 24 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में धार्मिक अनुष्ठान के दौरान पत्नी और दो पुजारियों की कथित तौर पर गोली मारकर हत्या करने वाले व्यक्ति के छह वर्षीय घायल बेटे की भी उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।

पुलिस ने बताया कि घटना में घायल उसकी दो बेटियों को बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। घटना के बाद अनाथ हुई दोनों बच्चियों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी आजमगढ़ के पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार ने लेने की घोषणा की है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, मृत बच्चे की पहचान शौर्य सिंह के रूप में हुई है। वह अपने पिता अरविंद सिंह द्वारा कथित तौर पर गोली चलाए जाने से घायल हो गया था।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक अनिल कुमार ने संवाददाताओं को बताया, ‘‘शौर्य को आजमगढ़ के जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां बुधवार को उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।’’

उन्होंने बताया कि अरविंद की पांच वर्षीय बेटी परी और सात माह की बेटी शांभवी को भी घटना के बाद मानसिक आघात के कारण जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। दोनों को बृहस्पतिवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई और पुलिस उन्हें घर लेकर गई।

वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने दोनों बच्चियों के पालन-पोषण की जिम्मेदारी लेने की घोषणा करते हुए कहा कि वह उनके माता-पिता की भूमिका निभाएंगे।

उन्होंने पीड़ित बच्चियों के लिए अपना एक माह का वेतन देने की भी घोषणा की और कहा कि जिले के सभी पुलिसकर्मी अपनी एक दिन की तनख्वाह देंगे।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, मंगलवार शाम अरविंद के घर लौटने के समय वहां धार्मिक अनुष्ठान चल रहा था। परिवार के लोगों के अनुसार, घर में कथित तौर पर भूत-प्रेत या किसी अन्य अलौकिक प्रभाव की आशंका के चलते यह अनुष्ठान कराया जा रहा था।

सूत्रों ने बताया कि अनुष्ठान में अरविंद की 32 वर्षीय पत्नी बबीता सिंह और दो पुजारी-महेंद्र पाठक (60) तथा अखिलेश मिश्रा (55)-शामिल थे।

पुलिस के मुताबिक, अरविंद ने पुजारियों से सवाल-जवाब किए और उनके आधार कार्ड मांगे। इसके बाद उसने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से बबीता, पाठक और मिश्रा को गोली मार दी, जिससे उनकी मौत हो गई।

सूत्रों ने बताया कि घटना के बाद अरविंद तीनों बच्चों को लेकर एक कमरे में बंद हो गया और कथित तौर पर उन्हें जान से मारने की धमकी देने लगा।

पुलिस ने आठ थानों की टीमों को मौके पर तैनात कर घर को घेर लिया। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने कई घंटे तक अरविंद को समझाकर आत्मसमर्पण के लिए मनाने का प्रयास किया। पुलिस ने उसके रिश्तेदारों को भी मौके पर बुलाया, ताकि वे उससे बात कर सकें, लेकिन वह कमरे से बाहर आने के लिए तैयार नहीं हुआ।

ग्रामीणों ने पुलिस को बताया कि घटना के दौरान अरविंद की मानसिक स्थिति सामान्य नहीं लग रही थी।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, करीब सात घंटे तक चले गतिरोध के बाद रात करीब 12 बजकर 20 मिनट पर आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस) की टीम को मौके पर बुलाया गया। अरविंद ने सुबह एटीएस से बात करने का संकेत दिया, लेकिन वह बच्चों के साथ कमरे के अंदर ही रहा।

सूत्रों ने बताया कि स्थिति उस समय गंभीर हो गई जब पुलिस ने कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज सुनी। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। कमरे का दरवाजा तोड़ने से पहले आंसू गैस के गोले छोड़े गए और फिर एसएसपी तथा विशेष कार्य बल (एसओजी) के जवान कमरे में दाखिल हुए।

पुलिस के अनुसार, अरविंद ने पुलिस टीम पर कथित तौर पर पांच गोलियां चलाईं। इसके बाद पुलिस की जवाबी कार्रवाई में अरविंद घायल हो गया और बुधवार तड़के करीब साढ़े तीन बजे उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।

पुलिस घटना के कारणों और पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

भाषा

सं, सलीम रवि कांत


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