पीलीभीत बाघ अभयारण्य के ‘बाघ मित्र’ बनेंगे सरकारी योजनाओं के सेतु
पीलीभीत बाघ अभयारण्य के 'बाघ मित्र' बनेंगे सरकारी योजनाओं के सेतु
बरेली, 19 जुलाई (भाषा) मानव-वन्यजीव संघर्ष को रोकने में अहम भूमिका निभाने वाले पीलीभीत बाघ अभयारण्य (पीटीआर) के ‘बाघ मित्र’ अब नयी जिम्मेदारी भी संभालेंगे।
वन्यजीवों की निगरानी और संरक्षण संबंधी जागरुकता के साथ-साथ वे अब जंगलों से सटे गांवों में लोगों को सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी देंगे और उन्हें इनका लाभ दिलाने में सेतु की भूमिका निभाएंगे।
बरेली के मुख्य वन संरक्षक पी.पी. सिंह ने बताया कि पीलीभीत बाघ अभयारण्य का ‘बाघ मित्र मॉडल’ देशभर में सराहा जा रहा है और कई राज्य इसे अपना रहे हैं। उन्होंने कहा कि पीलीभीत के बाघ मित्र विभिन्न बाघ अभयारण्यों में जाकर स्थानीय लोगों को प्रशिक्षण भी दे रहे हैं।
उन्होंने बताया कि पीलीभीत बाघ अभयारण्य में वर्तमान में 124 बाघ मित्र हैं, जिनमें 120 पुरुष और चार महिलाएं शामिल हैं। ये सभी बाघ अभयारण्य से सटे गांवों के स्थानीय निवासी हैं, जिन्हें वन विभाग ने विशेष प्रशिक्षण दिया है।
सिंह ने बताया कि बाघ मित्रों का मुख्य कार्य बाघों की गतिविधियों की सूचना देना, मानव-बाघ संघर्ष कम करना, ग्रामीणों को जागरुक करना और वन्यजीव संरक्षण के कार्यों में वन विभाग की सहायता करना है।
पीलीभीत बाघ अभयारण्य के प्रभागीय वनाधिकारी (डीएफओ) मनीष सिंह ने बताया कि बाघ मित्रों की इस नयी सामाजिक और प्रशासनिक भूमिका को प्रभावी बनाने के लिए विश्व प्रकृति निधि (डब्ल्यूडब्ल्यूएफ) ने एक विस्तृत कार्ययोजना तैयार की है। इसके तहत उन्हें प्रतिष्ठित स्वयंसेवी संगठन ‘हकदर्शक’ के माध्यम से विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने बताया कि प्रायोगिक तौर पर इस पहल की शुरुआत उत्तर प्रदेश के पीलीभीत और उत्तराखंड के नैनीताल के बाघ मित्रों से की जा रही है। इसके लिए 24 और 25 जुलाई को जिम कॉर्बेट राष्ट्रीय उद्यान के रामनगर में दो दिवसीय विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किया जाएगा।
डीएफओ ने बताया कि इस उच्चस्तरीय प्रशिक्षण में भाग लेने के लिए पीलीभीत से 15 सदस्यीय बाघ मित्रों का दल रामनगर जाएगा, जहां उन्हें ग्रामीण विकास तथा सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न पहलुओं का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद पहले चरण में इस पहल को पीलीभीत बाघ अभयारण्य की माला और महोफ रेंज के संवेदनशील सीमावर्ती गांवों में लागू किया जाएगा।
मनीष सिंह ने बताया कि योजना के सफल परिणाम मिलने के बाद इसका विस्तार बाघ संरक्षण से जुड़ी हरिपुर, बरही और दियोरिया रेंज तक किया जाएगा।
उन्होंने कहा कि इससे न केवल जंगलों और वन्यजीवों की सुरक्षा मजबूत होगी, बल्कि तराई क्षेत्र के दूरदराज के ग्रामीणों तक विकास और सरकारी योजनाओं का लाभ भी अधिक प्रभावी ढंग से पहुंच सकेगा।
भाषा
आनन्द रवि कांत

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