लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास करने वाले लोगों के लिए प्रेरणा बनी भाजपा : योगी आदित्यनाथ

लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास करने वाले लोगों के लिए प्रेरणा बनी भाजपा : योगी आदित्यनाथ

लोकतांत्रिक मूल्यों पर विश्वास करने वाले लोगों के लिए प्रेरणा बनी भाजपा : योगी आदित्यनाथ
Modified Date: June 27, 2026 / 12:53 pm IST
Published Date: June 27, 2026 12:53 pm IST

गोरखपुर 27 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आज दुनिया और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन चुकी है।

योगी ने यहां भाजपा की गोरखपुर महानगर इकाई द्वारा आयोजित ‘पंडित दीनदयाल उपाध्याय प्रशिक्षण महाभियान-2026’ की शुरुआत करते हुए कहा कि भारतीय जनसंघ और भाजपा की स्थापना सत्ता प्राप्ति के लिए नहीं बल्कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए हुई थी।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1951 में भारतीय जनसंघ की स्थापना से लेकर 1977 तक और 1980 में भाजपा के गठन से अब तक संगठन ने जिन उद्देश्यों और मूल्यों को लेकर अपनी यात्रा जारी रखी है, उसी का परिणाम है कि आज भाजपा दुनिया का सबसे बड़ा राजनीतिक दल बनकर उभरी है।

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘दुनिया और लोकतांत्रिक मूल्यों में विश्वास रखने वाले लोगों के लिए भाजपा अगर प्रेरणा बनी है तो इसके पीछे भारतीय जनसंघ के समय से चले आ रहे संस्कार और मूल्य हैं, जिन्हें भाजपा के प्रत्येक कार्यकर्ता ने आत्मसात किया है।’’

उन्होंने कहा कि 1951 में संस्थापक अध्यक्ष डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के नेतृत्व में शुरू हुई यात्रा 1977 तक भारतीय जनसंघ के रूप में आगे बढ़ी।

योगी ने कहा कि डॉ. मुखर्जी स्वतंत्र भारत की पहली सरकार में मंत्री थे लेकिन उन्होंने नेहरू सरकार की नीतियों के विरोध में मंत्रिमंडल से इस्तीफा देकर आंदोलन की शुरुआत की थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय जनसंघ ने सत्ता के लिए नहीं बल्कि देश की एकता और अखंडता की रक्षा तथा कश्मीर के मुद्दे पर कांग्रेस की नीतियों का विरोध करने के लिए संघर्ष किया था।

उन्होंने कहा कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय ने भारतीय राजनीति को अंत्योदय का विचार दिया और आर्थिक नीतियों को समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को केंद्र में रखकर बनाने की वकालत की।

योगी ने कहा कि राजनीति मूल्यों और आदर्शों पर आधारित होनी चाहिए तथा भाजपा अन्य राजनीतिक दलों से इसी कारण अलग है।

भाषा आनन्द जितेंद्र

जितेंद्र


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