भाजपा सांसद करण भूषण सिंह और उनके पिता नए यूजीसी नियमों के खिलाफ

भाजपा सांसद करण भूषण सिंह और उनके पिता नए यूजीसी नियमों के खिलाफ

भाजपा सांसद करण भूषण सिंह और उनके पिता नए यूजीसी नियमों के खिलाफ
Modified Date: January 28, 2026 / 10:08 pm IST
Published Date: January 28, 2026 10:08 pm IST

लखनऊ, 28 जनवरी (भाषा) भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सांसद करण भूषण सिंह और उनके पिता बृजभूषण सिंह बुधवार को नए यूजीसी नियमों के खिलाफ खुलकर सामने आए और उन्होंने समाज में जाति आधारित बैर रोकने के लिए इस पर पुनर्विचार की मांग की।

कैसरगंज से भाजपा सांसद करण भूषण ने यह भी स्पष्ट किया कि संसद की जिस स्थायी समिति के वह सदस्य हैं, उस समिति का इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं है।

उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा, ‘‘सोशल मीडिया और समाचार चैनलों के माध्यम से मीडिया के एक धड़े द्वारा यूजीसी के नए नियम को लेकर मेरे खिलाफ अनेक भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं। बिना मेरा पक्ष जाने, ऐसा अभियान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।’’

करण भूषण सिंह ने लिखा, ‘‘मैं यह स्पष्ट करना चाहता हूं कि संसद की जिस स्थायी समिति का मैं सदस्य हूं, उस समिति का इन नियमों के निर्माण में कोई योगदान नहीं है।’’

उन्होंने लिखा, ‘‘मेरी भावनाएं हमारे समाज के लोगों के साथ हैं और मेरी मांग है कि यूजीसी अपने इस नियम पर पुनर्विचार करते हुए जनभावना का सम्मान करे और इसमें आवश्यक सुधार लेकर आए जिससे समाज में जाति आधारित किसी प्रकार की वैमनस्यता ना फैलने पाए।’’

उन्होंने कहा, “हम अपने शिक्षण संस्थानों को जातिगत युद्ध का केंद्र नहीं बनने दे सकते हैं। हम सबको साथ लेकर चलना चाहते हैं।”

करण भूषण सिंह के पिता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने ‘एक्स’ पर एक वीडियो पोस्ट कर कहा, “पिछले कई दिनों से यूजीसी को लेकर देशभर में विवाद हो रहा है। सरकार पढ़ने वाले बच्चों के बीच में यदि सवर्ण बच्चों से कोई घटना घट जाती है तो दलित और ओबीसी बच्चों के संरक्षण के लिए यह कानून लेकर आई है।”

उन्होंने कहा कि कुछ घटनाओं के आधार पर बनाए गए एक कानून ने समाज में भ्रम की स्थिति पैदा की है और इसका व्यापक विरोध हो रहा है। यह कानून के नाम पर समुदायों के बीच अविश्वास पैदा कर रहा है जोकि उचित नहीं है।

अपने परिवार का एक उदाहरण देते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि सवर्ण जाति, दलित और पिछले समुदायों से बच्चे आते हैं और बिना भेदभाव खेलते हैं और यहां तक कि एक दूसरे घर जाकर खाते पीते हैं।

उन्होंने कहा कि यह किसी कानून की वजह से नहीं है बल्कि सनातन परंपरा की एक विरासत के कारण है।

पंडित दीनदयाल उपाध्याय का संदर्भ देते हुए उन्होंने कहा कि सनातन संस्कृति कमजोर तबकों को ऊपर उठाने की शिक्षा देती है ना कि समाज को बांटने की।

उन्होंने चेताया,‘‘ ऐसा कानून भविष्य में एक अस्वस्थ समाजिक माहौल पैदा कर सकता है जहां कुछ समुदाय के लोगों को घर में घुसने से मना किया जा सकता है। जहां अपराध करने वालों को दंड दिया जाना आवश्यक है, कानून बनाते समय संतुलन आवश्यक है।’’

भाषा राजेंद्र शोभना

शोभना


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