एकता और वोट की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करें, जो लाख दुखों की एक दवा है : मायावती

एकता और वोट की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करें, जो लाख दुखों की एक दवा है : मायावती

एकता और वोट की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करें, जो लाख दुखों की एक दवा है : मायावती
Modified Date: July 10, 2026 / 11:31 am IST
Published Date: July 10, 2026 11:31 am IST

लखनऊ, 10 जुलाई (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की अध्यक्ष और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्‍यमंत्री मायावती ने शुक्रवार को अपने समर्थकों को सजग करते हुए कहा कि अपनी समस्याओं के हल के लिए बाबा साहेब डॉक्‍टर भीमराव आंबेडकर के बताए गये सही एवं शांतिपूर्ण रास्ते पर चलें तथा अपनी एकता और वोट की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करें।

उन्होंने कानून के दायरे में रहकर अपने हितों की लड़ाई लड़ने का भी सुझाव दिया।

बसपा प्रमुख ने यहां पत्रकारों से बातचीत में कहा कि अपनी समस्याओं का हल आंबेडकर के बताए गये सही एवं शांतिपूर्ण रास्ते पर चलकर हासिल करना चाहिए तथा अपनी एकता और वोट की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करना चाहिए, जो लाख दुखों की एक ही दवा है।”

उन्होंने कहा ”इसके लिए बसपा लगातार प्रयास करती है और ऐसे सभी संगठनों और दलों से इन वर्गों के लोगों को विधानसभा, लोकसभा और निकाय चुनाव में जरूर सचेत रहना है।”

मायावती ने आंबेडकर का स्मरण करते हुए कहा ”बाबा साहब ने अपनी काबिलियत, बुद्धिमत्‍ता और सूझबूझ से तथा जातिवादी लोगों के हथकंडों को ध्‍यान में रखकर इन वर्गों (अनुसूचित जाति, पीड़ित व कमजोर वर्ग) के लोगों को अपने पैरों पर खड़ा करने के लिए वोट की अति महत्वपूर्ण ताकत के बल पर अनेकों कानूनी और मूलभूत संवैधानिक अधिकार दिलाए हैं।”

उन्होंने जोर देकर कहा कि इसका लाभ लेने के लिए इनको केन्‍द्र और राज्‍यों की सत्ता की मास्टर चाबी अपने हाथों में लेनी होगी।

मायावती ने किसी भी मामले पर उत्तेजित होकर सड़क पर उतरकर आंदोलन न करने और दूसरे दलों से सावधान रहने का आह्वान करते हुए कहा ”इस पर अमल करते हुए कांशीराम जी ने बसपा का गठन किया। बाबा साहेब ने यह भी कहा है कि अपने ऊपर होने वाले जुल्म ज्यादती के विरुद्ध लड़ाई कानून को अपने हाथ में लेकर नहीं, बल्कि कानून के दायरे में रहकर लड़ना है।”

बसपा प्रमुख ने सलाह दी कि संघर्ष आदि भी कानूनी दायरे में ही रहकर करना है और यदि मामला अदालत में जाता है तो निचली अदालत में इंसाफ न मिले तो फिर आगे सर्वोच्‍च अदालत में जाना चाहिए। ‘‘यह व्यवस्था भारतीय संविधान में है।”

उन्होंने कहा कि इसके लिए आये दिन देश के अन्‍य राज्‍यों में सड़कों पर उतरकर बवाल करने वालों की तरह सड़क पर बवाल नहीं करना है।

मायावती ने अपने प्रतिद्वन्द्वी दलों पर निशाना साधते हुए कहा ”अक्सर संगठन या पार्टियां अपने राजनीतिक स्‍वार्थ के लिए इन वर्गों के दुखी व पीड़ित लोगों को बरगलाकर उन्हें सड़कों पर उतारती हैं। ये लोग हंगामा, सड़क जाम और बवाल आदि कराते हैं और फिर उनके मुखिया मगरमच्छ के आंसू बहाते हुए घटनास्थल पर पहुंचकर अपनी राजनीतिक रोटी सेंकते हैं। इससे पीड़ितों को न्याय मिलने वाला नहीं है। वर्तमान हालात में इनकी मुसीबत और बढ़ेगी।”

उन्होंने दोहराया ”ऐसे में अपनी समस्याओं का हल बाबा साहेब आंबेडकर के बताए गये सही एवं शांतिपूर्ण रास्‍ते पर चल कर हासिल करें तथा अपनी एकता तथा अपनी वोट की ताकत से सत्ता की मास्टर चाबी प्राप्त करें।”

भाषा आनन्द सिम्मी मनीषा

मनीषा


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