हाथरस (उप्र), पांच जनवरी (भाषा) हाथरस की एक विशेष अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दाखिल मानहानि के एक मामले की अगली सुनवाई सात फरवरी को करना तय किया है। एक अधिवक्ता ने सोमवार को यह जानकारी दी।
सांसद-विधायक अदालत के न्यायाधीश दीपक नाथ सरस्वती की अदालत में दाखिल शिकायत में आरोप लगाया गया है कि गांधी ने ‘हाथरस सामूहिक बलात्कार’ मामले में आरोपियों के रूप में तीन युवकों का जिक्र करके मानहानिकारक टिप्पणी की, जबकि उन्हें बलात्कार के आरोपों से बरी कर दिया गया था।
बरी किए गए युवकों का प्रतिनिधित्व कर रहे अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंढीर ने कहा कि मामले की सुनवाई सोमवार को होनी थी, जिस दौरान अदालत ने जांच के हिस्से के तहत पुलिस क्षेत्राधिकारी (सीओ) से पहले मांगी गई रिपोर्ट प्राप्त की। इस मामले में आज सीओ की रिपोर्ट आ गई है और राहुल गांधी को आपत्ति प्रस्तुत करने के लिए नोटिस जारी हुआ है।
यह मुकदमा वर्ष 2020 के हाथरस सामूहिक बलात्कार मामले में बरी किए गए तीन युवकों को कथित तौर पर ‘आरोपी’ कहने से जुड़ा है।
वर्ष 2020 के हाथरस सामूहिक बलात्कार मामले में बरी किए गए रवि, राम कुमार उर्फ रामू और लवकुश की ओर से राहुल गांधी के खिलाफ तीन अलग-अलग मामले दर्ज किए गए थे।
गांधी ने कथित तौर पर 12 दिसंबर, 2024 को बुलगढ़ी गांव में कहा था, ‘‘आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं, जबकि पीड़िता का परिवार घर के अंदर बंद है।’’
अधिवक्ता ने बताया कि यह टिप्पणी उन युवकों के लिए ‘मानहानि करने वाली और अपमानजनक’ थी, जिन्हें केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) अदालत ने ढाई साल जेल में बिताने के बाद बरी कर दिया था।
पुंढीर ने कहा, ‘‘राहुल गांधी को डेढ़ करोड़ रुपये क्षतिपूर्ति का कानूनी नोटिस भेजा गया था, जिसमें तीनों बरी किए गए लोगों के लिए 50-50 लाख रुपये की मांग की गई थी।’’
उन्होंने कहा कि गांधी की ओर से कोई जवाब नहीं मिला, जिसके बाद शिकायत दर्ज कराई गई।
सितंबर 2020 में हाथरस की एक दलित लड़की से कथित तौर पर सामूहिक बलात्कार किया गया था। बाद में दिल्ली के एक अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
घटना के बाद लड़की के गांव के चार लोगों- राम कुमार, लवकुश, रवि और संदीप पर अपराध करने का आरोप लगाया गया था। पुंढीर ने कहा कि सीबीआई जांच और मुकदमे के बाद, केवल संदीप ही गैर इरादतन हत्या और अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत दोषी पाए जाने के बाद जेल में है।
भाषा सं आनन्द राजकुमार वैभव
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