मनमाने ढंग से खाते से लेन-देन रोकने पर उच्च न्यायालय ने बैंक पर लगाया 50 हजार रुपये जुर्माना
मनमाने ढंग से खाते से लेन-देन रोकने पर उच्च न्यायालय ने बैंक पर लगाया 50 हजार रुपये जुर्माना
लखनऊ, एक मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने बैंकों द्वारा बिना वैध कारण के खाते से लेन-देन रोकने की बढ़ती प्रवृत्ति पर नाराजगी जताई है। पीठ ने कहा कि बैंक एक न्यासी की भूमिका निभाता है, जांच एजेंसी की नहीं।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने इंडियन ओवरसीज बैंक पर ग्राहक के खाते से लेन-देन मनमाने तरीके से रोकने के लिए 50,000 रुपये का जुर्माना लगाया। अदालत ने आदेश दिया कि यह राशि चार सप्ताह के भीतर खाताधारक को दी जाए।
यह आदेश एस.ए. एंटरप्राइजेज की याचिका पर आया। कंपनी मत्स्य पालन मशीनरी का कारोबार करती है। 16 जनवरी 2026 को कंपनी के खाते में 23 लाख रुपये आए थे। बैंक ने संदेह जताते हुए खाते से लेन-देन रोक दिया, क्योंकि कंपनी ने खाता खोलते समय सालाना आय 5.76 लाख रुपये घोषित की थी।
बैंक ने बचाव में कहा कि लेन-देन संदिग्ध लगा और धन शोधन निवारण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई।
हालांकि, अदालत ने पाया कि खाते से लेन-देन किसी साइबर अपराध के कारण नहीं, बल्कि बैंक के खुद जांच एजेंसी की भूमिका निभाने के कारण रोका गया था।
उच्च न्यायालय ने कहा कि पुलिस, ईडी या सीबीआई जैसी एजेंसियों के औपचारिक निर्देश के बिना बैंक खुद धन के स्रोत की जांच नहीं कर सकते।
भाषा सं आनन्द शफीक
शफीक

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