अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण जौहर विश्वविद्यालय गिराने के मामले की सुनवाई 13 अगस्त तक टली

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अधिवक्ताओं की हड़ताल के कारण जौहर विश्वविद्यालय गिराने के मामले की सुनवाई 13 अगस्त तक टली

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  • Publish Date - August 10, 2026 / 08:09 PM IST,
    Updated On - August 10, 2026 / 08:09 PM IST

मुरादाबाद/रामपुर (उप्र), 10 अगस्त (भाषा) मुरादाबाद के मंडलायुक्त की अदालत में मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय को गिराने के मामले की सुनवाई सोमवार को 13 अगस्त तक टाल दी गई, क्योंकि मुरादाबाद जिला अदालत के अधिवक्ताओं ने न्यायिक कामकाज से दूरी बनाए रखी। विश्वविद्यालय के अधिवक्ता ने यह जानकारी दी।

जौहर विश्वविद्यालय के अधिवक्‍ता जुनैद एजाज ने बताया कि वकीलों की हड़ताल के कारण किसी भी मामले की सुनवाई नहीं हो सकी। एजाज ने कहा, ‘‘दोनों पक्षों ने पहले ही विस्तार से अपनी दलीलें पेश कर दी हैं और मामला अब अंतिम चरण में है, अगली सुनवाई 13 अगस्त को होगी।’’

यह मामला रामपुर में विश्वविद्यालय की 40 में से 38 इमारतों को गिराने के प्रस्ताव से जुड़ा है। इस विश्वविद्यालय की स्थापना समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के पूर्व मंत्री आजम खान ने की थी।

रामपुर विकास प्राधिकरण (आरडीए) ने उत्तर प्रदेश शहरी योजना और विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत इन्हें गिराने का आदेश दिया है। प्राधिकरण का आरोप था कि ये इमारतें भवन योजना के बिना मंजूरी के बनाई गई थीं।

मुरादाबाद मंडल के आयुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने 27 जुलाई को गिराने के प्रस्ताव पर रोक लगा दी थी। बाद में, तीन अगस्त को हुई सुनवाई के दौरान इस अंतरिम सुरक्षा को 10 अगस्त तक बढ़ा दिया गया था।

इलाहाबाद उच्‍च न्‍यायालय ने इससे पहले गिराने के नोटिस में दखल देने से इनकार कर दिया था, क्योंकि अपीलीय प्राधिकरण ने पहले ही अंतरिम सुरक्षा दे दी थी। इमारतों को गिराने के प्रस्ताव के कारण विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने विरोध प्रदर्शन किया था ।

समाजवादी पार्टी तथा अन्य विपक्षी दलों ने भी प्राधिकरण के आदेश की आलोचना की है। उनका आरोप था कि यह कार्रवाई राजनीतिक कारणों से प्रेरित है।

हालांकि, अधिकारियों का कहना है कि यह कार्रवाई भवन नियमों के कथित उल्लंघन से जुड़ी है।

भाषा सं आनन्द

राजकुमार

राजकुमार