उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हाई अलर्ट; एसडीआरएफ, पीएसी नेपाल भेजी गई

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उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में हाई अलर्ट; एसडीआरएफ, पीएसी नेपाल भेजी गई

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  • Publish Date - August 28, 2026 / 12:57 AM IST,
    Updated On - August 28, 2026 / 12:57 AM IST

कुशीनगर/महराजगंज/बलिया (उप्र), 27 अगस्त (भाषा) नेपाल में आयी विनाशकारी बाढ़ में कम से कम 177 लोगों के मारे जाने के बाद महाराजगंज और कुशीनगर जिलों में प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है और गंडक नदी पर निगरानी बढ़ा दी है।

वाल्मीकि गंडक बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से कुशीनगर में नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है और जिला प्रशासन बाढ़ की आशंका को देखते हुए तैयारियों में जुट गया है।

एक आधिकारिक बयान के मुताबिक, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों के बाद प्रदेश सरकार ने बचाव एवं राहत अभियान के लिए 32 सदस्यीय एसडीआरएफ पलटन और 22 पीएसी कर्मियों को नेपाल में तैनात किया है।

एक अतिरिक्त एसडीआरएफ पलटन के साथ रबड़ की चार नावें और एल्युमीनियम की एक नाव भी भेजी जा रही है। राहत आयुक्त का नियंत्रण कक्ष सीमावर्ती जिलों की निगरानी कर रहा है, जबकि वहां फंसे प्रदेशवासी के परिजन 1070 हेल्पलाइन पर संपर्क कर सकते हैं।

महाराजगंज में जिलाधिकारी गौरव सिंह सोगरवाल और पुलिस अधीक्षक शक्ति मोहन अवस्थी ने नारायणी नदी और आसपास के क्षेत्रों का निरीक्षण किया और बाढ़ से निपटने की तैयारियों की समीक्षा की।

जिलाधिकारी ने राजस्व, पुलिस, एसएसबी और एसडीआरएफ कर्मियों को नदी की सतत निगरानी करने और राहत एवं बचाव अभियान के लिए तैयार रहने को कहा।

बलिया में रसड़ा कस्बे के दो लोग — 54 वर्षीय ऊषा देवी और उनका 18 वर्षीय बेटा राहुल नेपाल में आई बाढ़ के बाद से लापता हैं। 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ के समय वे अपने परिवार की दुकान में कथित तौर पर मौजूद थे। बलिया जिलाधिकारी मंगला प्रसाद सिंह ने कहा कि वह इस मामले में जानकारी जुटा रहे हैं।

नेपाल में आयी इस विनाशकारी बाढ़ के बाद बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और महराजगंज में नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका गहरा गयी है।

कुशीनगर जिला प्रशासन के प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को बताया कि नेपाल में आयी प्रलयकारी बाढ़ के बाद वहां स्थित वाल्मीकि गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं, नतीजतन लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से कुशीनगर में भी नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है और सुबह आठ बजे तक वह खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका था।

उन्होंने बताया कि संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर तैनात कर दिया गया है और तमाम टीमों को राहत एवं बचाव के जरूरी उपकरणों के साथ अलर्ट पर रखा गया है।

अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य शुरू करने में किसी तरह की देर नहीं होगी।

पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने बताया कि नारायणी नदी में संभावित बाढ को लेकर पुलिस प्रशासन को अलर्ट किया गया है। बड़ी गंडक नदी के सटे चार थानों में शामिल खड्डा, हनुमानंगज, तरयासुजान और सेवरही के पुलिस कर्मियों और बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका वाले सात गांवों के लोगों को अलर्ट किया गया है।

नदी के दूसरी ओर रेत वाले क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को आशंका है कि अगर वाल्मीकि—गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया और नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा तो निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है।

हालांकि, प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है।

इस बीच, बुधवार को नेपाल में विनाशकारी बाढ़ आने के बाद से नारायणी नदी के भी रौद्र रूप से लेने की आशंका में मरचहवा गांव के दक्षिण टोला में लोग अंधेरे में घरों से बाहर बैठे रहे।

ग्रामीणों के मुताबिक, चारों तरफ पानी भर जाने पर दक्षिण टोला का सड़क संपर्क पूरी तरह कट जाता है, ऐसे में रात के समय बच्चों, महिलाओं और पशुओं को लेकर बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा लिहाजा उन्हें रात किसी तरह जाग कर गुजारी है।

महराजगंज में, अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारियों को संवेदनशील नदी वाले इलाकों में तैनात किया गया है और वे गंडक, दरजनिया, टेल फॉल और नेपाल से पानी पाने वाली अन्य नदियों और जल-धाराओं के जल-स्तर और बहाव पर नजर रख रहे हैं।

अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है ताकि जल-स्तर में अचानक बढ़ोत्तरी होने पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की गई है।

कुमार ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह तैयार है और जलस्तर और नदियों के बहाव की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बेवजह नदियों के पास न जाएं, आधिकारिक सलाह का पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

भाषा

सं. सलीम राजेंद्र सुभाष

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