कुशीनगर में नारायणी नदी के बढते जल स्तर को लेकर तैयारियों में जुटा प्रशासन

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कुशीनगर में नारायणी नदी के बढते जल स्तर को लेकर तैयारियों में जुटा प्रशासन

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  • Publish Date - August 27, 2026 / 01:45 PM IST,
    Updated On - August 27, 2026 / 01:45 PM IST

कुशीनगर/महराजगंज (उप्र), 27 अगस्त (भाषा) नेपाल में आयी विनाशकारी बाढ़ के बाद वाल्मीकि गंडक बैराज से लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से कुशीनगर और महराजगंज में नदियों का जलस्तर बढ़ रहा है और जिला प्रशासन बाढ़ की आशंका को देखते हुए तैयारियों में जुट गया है।

नेपाल-चीन सरहद के पास बर्फ और चट्टानों के खिसकने से एक नदी का रास्ता रुक गया जिससे नेपाल में बाढ़ आ गई। नेपाल के आपदा प्रबंधन अधिकारियों के मुताबिक इस बाढ़ से कई जिले प्रभावित हुए हैं और इसमें 160 से ज्यादा लोगों की मौत हो गयी तथा लगभग 826 लोग लापता हैं।

नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के मुताबिक लापता लोगों में लगभग 300 भारतीय पर्यटक भी शामिल हैं।

नेपाल में आयी इस विनाशकारी बाढ़ के बाद बांधों से पानी छोड़े जाने के कारण उत्तर प्रदेश के कुशीनगर और महराजगंज में नदियों का जलस्तर बढ़ने की आशंका गहरा गयी है।

कुशीनगर जिला प्रशासन के प्रवक्ता ने बृहस्पतिवार को बताया कि नेपाल में आयी प्रलयंकारी बाढ़ के बाद वहां स्थित वाल्मीकि गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं, नतीजतन लाखों क्यूसेक पानी छोड़े जाने से कुशीनगर में भी नारायणी नदी का जलस्तर बढ़ रहा है और सुबह आठ बजे तक वह खतरे के निशान से एक सेंटीमीटर ऊपर पहुंच चुका था।

उन्होंने बताया कि संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम को भी मौके पर तैनात कर दिया गया है और तमाम टीमों को राहत एवं बचाव के जरूरी उपकरणों के साथ अलर्ट मोड में रखा गया है।

अधिकारियों का कहना है कि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने और राहत-बचाव कार्य शुरू करने में किसी तरह की देर नहीं होगी।

पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने बताया कि नारायणी नदी में संभावित बाढ को लेकर पुलिस प्रशासन को अलर्ट किया गया है। बड़ी गंडक नदी के सटे चार थानों में शामिल खड्डा, हनुमानंगज, तरयासुजान और सेवरही के पुलिस कर्मियों को और बाढ़ से प्रभावित होने की आशंका वाले सात गांवों के लोगों को अलर्ट किया गया है।

नदी के दूसरी ओर रेत वाले क्षेत्र में रहने वाले ग्रामीणों को आशंका है कि अगर वाल्मीकि—गंडक बैराज से भारी मात्रा में पानी छोड़ा गया और नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा तो निचले इलाकों में परेशानी पैदा हो सकती है।

हालांकि, प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है।

इस बीच, बुधवार को नेपाल में विनाशकारी बाढ़ आने के बाद से नारायणी नदी के भी रौद्र रूप से लेने की आशंका में मरचहवा गांव के दक्षिण टोला में लोग अंधेरे में घरों से बाहर बैठे रहे।

ग्रामीणों के मुताबिक चारों तरफ पानी भर जाने पर दक्षिण टोला का सड़क संपर्क पूरी तरह कट जाता है, ऐसे में रात के समय बच्चों, महिलाओं और पशुओं को लेकर बाहर निकलना बेहद मुश्किल होगा लिहाजा उन्हें रात किसी तरह जाग कर गुजारी है।

महराजगंज में, अपर जिलाधिकारी प्रशांत कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारियों को संवेदनशील नदी वाले इलाकों में तैनात किया गया है और वे गंडक, दरजनिया, टेल फॉल और नेपाल से पानी पाने वाली अन्य नदियों और जल-धाराओं के जल-स्तर और बहाव पर नजर रख रहे हैं।

अधिकारियों को सतर्क रहने का निर्देश दिया गया है ताकि जल-स्तर में अचानक बढ़ोत्तरी होने पर तुरंत राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें। नदी के किनारे बसे गांवों और निचले इलाकों पर कड़ी नजर रखी जा रही है और जरूरत पड़ने पर स्थानीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी भी की गई है।

कुमार ने कहा कि प्रशासन पूरी तरह तैयार है और जलस्तर और नदियों के बहाव की लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बेवजह नदियों के पास न जाएं, आधिकारिक सलाह का पालन करें और अफवाहों पर ध्यान न दें।

भाषा सं. सलीम मनीषा

मनीषा