राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती में मेरी कोई भूमिका नहीं : मंदिर ट्रस्ट कोषाध्यक्ष

राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती में मेरी कोई भूमिका नहीं : मंदिर ट्रस्ट कोषाध्यक्ष

राम मंदिर में चढ़ावे की रकम की गिनती में मेरी कोई भूमिका नहीं : मंदिर ट्रस्ट कोषाध्यक्ष
Modified Date: July 5, 2026 / 09:30 pm IST
Published Date: July 5, 2026 9:30 pm IST

(अरुणव सिन्हा)

लखनऊ, पांच जुलाई (भाषा) श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरि ने राम मंदिर में कथित चढ़ावा चोरी के विवाद पर कहा कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित किये जाने वाले चढ़ावे की रकम की गिनती की प्रक्रिया में उनकी कोई भूमिका नहीं थी।

गिरि ने एक पत्र में कहा, ‘‘इस गिनती की प्रक्रिया की देखरेख स्थानीय ट्रस्टी करते थे।’’

यह पत्र इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक से एक दिन पहले आया है।

गिरि ने ही गत 27 जून को एक पत्र जारी कर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और वरिष्ठ न्यासी अनिल मिश्रा के चढ़ावा चोरी के विवाद की नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दिये जाने की पुष्टि की थी।

हालांकि इस पूरे प्रकरण में गिरि पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या कोषाध्यक्ष के तौर पर उन्हें भी उस चोरी के लिए जिम्मेदार नहीं ठहराया जाना चाहिये।

कोषाध्यक्ष गिरि ने इस मामले पर कहा, ‘‘हम न तो किसी के पक्ष में हैं और न ही किसी के विरुद्ध। हम सच के साथ खड़े हैं। हम पुलिस और जांच एजेंसियों से दोषियों को पकड़ने और उन्हें सजा देने की अपील करते हैं।’’

इस मामले में हो रही अपनी आलोचना का जवाब देते हुए गिरि ने कहा कि न तो उन्हें किसी पद की लालसा है और न ही उन्होंने अपनी बार-बार की यात्राओं के खर्च के लिए ट्रस्ट से ‘‘एक भी रुपया’’ लिया है।

गिरि ने कहा, ‘‘मैंने कभी भी ट्रस्टी या कोषाध्यक्ष (ट्रस्ट का) बनने का अनुरोध या प्रयास नहीं किया। भगवान राम की किसी भी रूप में सेवा करने से खुशी और संतुष्टि मिलती है।’’

उन्होंने चार जुलाई को लिखे अपने पत्र में ट्रस्ट के सदस्यों से अपील करते हुए कहा, ‘‘मैं ट्रस्ट के सदस्यों से अनुरोध करता हूं कि वे भविष्य में पूरी सतर्कता और सावधानी सुनिश्चित करने के लिए पुख्ता प्रबंध करें। विशेषज्ञों से सलाह लेकर एक ऐसी प्रबंधन प्रणाली बनाई जानी चाहिए जो दान की गिनती में पुख्ता जांच और पूरी पारदर्शिता सुनिश्चित करे। भगवान राम के भक्तों द्वारा किसी भी रूप में दिए गए दान के एक-एक पैसे का हिसाब रखा जाना चाहिए।’’

गिरि ने चढ़ावे की गिनती से खुद को अलग करते हुए कहा कि भगवान राम के भक्तों द्वारा हुंडी में चढ़ाए गए चढ़ावे की गिनती वाली जगह से उनका कोई लेना-देना नहीं है।

गिरि ने कहा, ‘‘मैं पुणे में रहता हूं और धार्मिक कार्यों के लिए नियमित रूप से यात्रा करता हूं। दान की गिनती की प्रक्रिया की देखरेख शुरू से ही स्थानीय ट्रस्टी करते रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि न्यासियों ने भारतीय स्टेट बैंक के साथ मिलकर एक मानक संचालन प्रक्रिया तैयार की थी, जिसे उन्हें पिछले महीने ही दिखाया गया था।

गिरि ने कहा, ‘‘शुरुआत से ही ट्रस्ट के आय और व्यय की पूरी ऑडिट रिपोर्ट सुरक्षित हैं और अधिकृत लोग कभी भी इनकी जांच कर सकते हैं।’’

उन्होंने कहा, ‘‘कोषाध्यक्ष के तौर पर आय और खर्च का हिसाब रखना मेरा दायित्व है। मैं लगातार दौरे पर रहता हूं, इसलिए पुणे के कार्यालय के चार्टर्ड अकाउंटेंट हर महीने के आखिरी चार-पांच दिनों में अयोध्या आते हैं ताकि आय और खर्च की समीक्षा कर सकें और ट्रस्ट कार्यालय के साथियों को मदद और ज़रूरी सलाह भी दे सकें।’’

गिरि ने यह भी कहा कि ट्रस्ट का हिसाब-किताब रखने के लिए वह चार्टर्ड अकाउंटेंट पर निर्भर रहते हैं।

उन्होंने कहा कि राम मंदिर के लिए खर्च सीधे बैंक के जरिए किये जाते हैं।

मंदिर ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष ने कहा, ‘‘मैं अधिकृत हस्ताक्षरकर्ता नहीं हूं इसलिए, वहां मेरे हस्ताक्षर मान्य नहीं हैं। हमारे पास चेक-बुक नहीं है। हालांकि, भुगतान नकद में नहीं बल्कि सीधे बैंक के जरिये किये जाते हैं।’’

गिरि ने कहा कि ट्रस्टी बनने के बाद से कुछ अपवादों को छोड़कर उन्होंने कभी भी किसी से नकद या वस्तु के रूप में दान स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने कथित चढ़ावा चोरी के मुद्दे पर कहा, ‘‘दुर्भाग्यपूर्ण चोरी किस हद तक हुई, कब और कैसे हुई, यह सब जांच का हिस्सा है। इस बड़ी घटना की गहन जांच होनी चाहिए और जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।’’

जांच एजेंसी पर भरोसा करने की जरूरत पर जोर देते हुए उन्होंने कहा, ‘‘अदालत अपना काम करेगी। हमें एसआईटी और पुलिस पर भरोसा है। किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। सभी को जांच और न्यायपालिका पर पूरा भरोसा होना चाहिए।’’

गिरि ने कहा, ‘‘अयोध्या मंदिर में हुई चोरी की अविश्वसनीय घटनाओं ने भगवान राम के भक्तों का दिल तोड़ दिया। लाखों भक्तों द्वारा चढ़ाए गए नकद की गिनती के दौरान कुछ लोगों ने दान की चोरी करने जैसा घिनौना पाप किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘हम सभी इससे (चढ़ावा चोरी) बहुत आहत, दुखी और शर्मिंदा हैं।’’

हालांकि, गिरि ने कहा कि हम सनातन धर्म और राम मंदिर की महिमा को धूमिल करने की किसी भी कोशिश को सफल नहीं होने दिया जाएगा।

भाषा अरुणव सलीम शफीक

शफीक


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