धार्मिक शहरों का महत्व समझे बगैर भारत को नहीं समझा जा सकता : योगी
धार्मिक शहरों का महत्व समझे बगैर भारत को नहीं समझा जा सकता : योगी
गोरखपुर, 29 सितंबर (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मंगलवार को कहा कि राज्य के प्राचीन धार्मिक शहरों के महत्व को समझे बगैर उत्तर प्रदेश और भारत को नहीं समझा जा सकता।
योगी ने गोरक्षनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ के समापन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि अयोध्या मर्यादा की, काशी आध्यात्मिक चेतना की, मथुरा-वृंदावन भक्ति के और प्रयागराज कुंभ सामाजिक समरसता का प्रतीक है।
उन्होंने कहा, “जिसने अयोध्या की मर्यादा, काशी की चेतना, मथुरा-वृंदावन की भक्ति और प्रयागराज की सामाजिक समरसता को नहीं समझा, वह उत्तर प्रदेश या भारत को नहीं समझ सकता।”
मुख्यमंत्री ने सनातन धर्म को भारत की मूल परंपरा बताते हुए कहा कि देश की सभ्यतागत विरासत को इससे अलग करके नहीं समझा जा सकता। उन्होंने कहा कि अपनी परंपराओं को भूलने से देश के सामने कई चुनौतियां पैदा हुईं।
गो-संरक्षण का जिक्र करते हुए योगी ने कहा कि सनातन परंपरा में गाय का विशेष स्थान है और लोगों को गोशालाओं के रखरखाव में सहयोग करना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश में सात हजार से अधिक गोशालाओं में 16 लाख से ज्यादा गोवंश हैं।
योगी ने कहा कि छुट्टा पशुओं को पालने वाले किसानों को हर महीने प्रति पशु डेढ़ हजार रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।
देशी गोवंश आधारित प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की जरूरत बताते हुए योगी ने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों के अत्यधिक इस्तेमाल से कैंसर, गुर्दे और यकृत संबंधी बीमारियों तथा मधुमेह की समस्या बढ़ रही है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि गंभीर बीमारियों से पीड़ित गरीबों के इलाज के लिए उनके विवेकाधीन कोष से 1,400 करोड़ रुपये दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि इसके अलावा आयुष्मान भारत योजना के तहत भी उपचार की सुविधा उपलब्ध है।
भाषा
सं. सलीम पारुल
पारुल

Facebook


