जिला अदालत परिसर में वकीलों और मुवक्किल पर हमला, उच्च न्यायालय ने मांगी रिपोर्ट
जिला अदालत परिसर में वकीलों और मुवक्किल पर हमला, उच्च न्यायालय ने मांगी रिपोर्ट
लखनऊ, 21 जुलाई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने लखनऊ जिला अदालत परिसर में वकीलों और उनके मुवक्किल पर हमले और उन्हें न्यायिक कार्यवाही करने से रोके जाने के आरोपों को गंभीरता से लेते हुए मंगलवार की रात जिला जज और पुलिस आयुक्त को बुधवार पूर्वाह्न सवा 10 बजे तक विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया।
इस मामले की तत्काल सुनवाई के लिए मंगलवार शाम सात बजे मुख्य न्यायाधीश के निर्देश पर न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की एक विशेष पीठ बनाई गई।
अदालत ने कहा कि अगर आरोप सही पाए जाते हैं तो यह घटना न केवल एक अपराध होगी बल्कि न्याय प्रशासन में गंभीर हस्तक्षेप भी होगा, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।
यह मामला दिल्ली के वकील अभिप्सा मोहंती, कोमल अग्रवाल और आशुतोष श्रीवास्तव द्वारा दायर एक अंतरिम अर्जी के जरिए अदालत के सामने लाया गया।
याचियों ने आरोप लगाया कि वे एक दीवानी मामले में अपने मुवक्किल मोहम्मद शाकिर की ओर से वकालतनामा दाखिल करने के लिए लखनऊ की जिला अदालत पहुंचे थे लेकिन चूंकि संबंधित न्यायालय खाली था इसलिए मामले को दूसरे न्यायालय कक्ष में स्थानांतरित कर दिया गया था।
याचियों ने आरोप लगाया कि वकील सौरभ कुमार वर्मा और उनके कुछ साथियों ने उन्हें अदालत के सामने पेश होने से रोका और विरोध करने पर उन पर हमला किया, अपशब्द कहे और धमकी दी।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि शाकिर की बुरी तरह पिटाई की गई और चेतावनी दी गई कि एक साथी वकील के खिलाफ मामले में अदालत में पेश होने के नतीजे भुगतने होंगे। आरोप है कि शाकिर को वहां से निकलने से पहले जज के चैंबर में शरण लेने के लिए मजबूर होना पड़ा।
याचिका में कहा गया है कि विवाद एक जायदाद से जुड़े मुकदमे को लेकर शुरू हुआ था, जिसमें आरोप लगाया गया कि 30 अप्रैल 2026 को एक अन्य वादी पर भी इसी तरह का हमला हुआ था लेकिन पुलिस ने कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की।
याचियों ने सुनवाई के दौरान कथित घटना का एक वीडियो भी पेश किया, जिसे देखने के बाद पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि वादी पर हमला किया गया था।
अदालत ने यह भी कहा कि लखनऊ जिला अदालत में न्यायिक कामकाज में रुकावट डालने और कुछ वकीलों या वकील बनकर आए लोगों द्वारा न्यायिक कार्यवाही को प्रभावित करने की कोशिशों की शिकायतें पहले भी सामने आई थीं।
अदालत में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिये पेश हुए लखनऊ के पुलिस आयुक्त अमरेंद्र कुमार सेंगर ने न्यायालय को बताया कि मोहम्मद शाकिर का मेडिकल परीक्षण हो रहा है और दूसरी तरफ से भी एक शिकायत मिली है।
जिला जज ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की जांच की गई है और कुछ वकीलों की पहचान की गई है।
उच्च न्यायालय ने जिला जज को सीसीटीवी फुटेज के साथ रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया और पुलिस आयुक्त से घटना की जानकारी, आरोपी का आपराधिक इतिहास (अगर कोई हो) और अब तक की गई कार्रवाई का विवरण मांगा।
अदालत ने संबंधित पुलिस उपायुक्त, वजीरगंज के थानाध्यक्ष और घायल वादी को अगली सुनवाई के दौरान मौजूद रहने का निर्देश भी दिया। न्यायालय ने यह भी आदेश दिया कि कार्यवाही के दौरान दिल्ली के वकीलों को पर्याप्त सुरक्षा दी जाए।
मामले की अगली सुनवाई 22 जुलाई को पूर्वाह्न 10 बजकर 15 मिनट पर होगी। भाषा सं. सलीम रंजन
रंजन

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