उप्र विधानसभा में विशेष सत्र के प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति जताई, अध्यक्ष बोले- चर्चा संभव

उप्र विधानसभा में विशेष सत्र के प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति जताई, अध्यक्ष बोले- चर्चा संभव

उप्र विधानसभा में विशेष सत्र के प्रस्ताव पर नेता प्रतिपक्ष ने आपत्ति जताई, अध्यक्ष बोले- चर्चा संभव
Modified Date: April 30, 2026 / 03:04 pm IST
Published Date: April 30, 2026 3:04 pm IST

लखनऊ, 30 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा के एक दिवसीय विशेष सत्र में बृहस्पतिवार को लाए गए प्रस्ताव को लेकर नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने आपत्ति जताई और कहा कि जो विषय राज्य सरकार का नहीं है, उस पर चर्चा नहीं हो सकती।

सदन की कार्यवाही शुरू होते ही संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने कार्यमंत्रणा के प्रस्ताव की जानकारी दी। इस पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष रह चुके नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने कहा, ‘‘नियमावली कहती है कि जो मुख्यतः राज्य सरकार का विषय न हो, उस पर बहस या मतदान नहीं कराया जाना चाहिए। महिला आरक्षण विधेयक संसद के अधिकार का विषय है, राज्य सरकार का नहीं, इसलिए इस पर चर्चा नहीं होनी चाहिए।’’

पांडेय ने कहा, ‘‘हम नारी सशक्तीकरण या नारी आरक्षण के विरोध में नहीं हैं, हम समर्थन में हैं। लेकिन प्रस्ताव में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ में बाधा उत्पन्न करने की बात निंदात्मक है। सवाल है कि बाधा कहां उत्पन्न की जा रही है? यह विषय कहां से आता है?’’

इस पर संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कहा, ‘‘दुख हुआ कि इतने महत्वपूर्ण विषय पर नेता प्रतिपक्ष, जो स्वयं सदन के अध्यक्ष रह चुके हैं, यह आपत्ति उठा रहे हैं। हमारा प्रस्ताव महिला सशक्तीकरण पर है, महिला आरक्षण पर नहीं। आरक्षण केंद्र का विषय है।’’

खन्‍ना ने कहा, ‘‘हम आरक्षण पर चर्चा नहीं कर रहे, बल्कि उप्र की आधी आबादी के सशक्तीकरण पर बात कर रहे हैं। यह प्रस्ताव नियम-103 के अंतर्गत ही है।’’

विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने नियमावली का हवाला देते हुए व्यवस्था दी कि चर्चा कराई जा सकती है। उन्होंने कहा, ‘‘उप्र विधानसभा की प्रक्रिया तथा कार्य संचालन नियमावली के नियम-103 के तहत अध्यक्ष की सहमति से सदन में प्रस्ताव प्रस्तुत किया जा सकता है और उस पर चर्चा हो सकती है।’’

अध्यक्ष ने कहा, ‘‘नारी सशक्तीकरण पर चर्चा को लेकर कोई प्रतिबंध नहीं माना जा सकता। जनहित से जुड़े किसी भी विषय पर चर्चा संभव है।’’

उन्‍होंने कहा, ‘‘संसदीय लोकतंत्र में संविधान निर्माताओं ने विशिष्ट विषयों पर चर्चा को लेकर कोई विशेष नियम नहीं बनाए हैं। सदन की सहमति और अध्यक्ष के अनुमोदन से समाज या जनता से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हो सकती है।’’

महाना ने कहा कि विधानसभा अपनी प्रक्रिया के निर्धारण के लिए सक्षम एवं सर्वोपरि है, तथा नियम-103 के अंतर्गत प्रस्ताव की ग्राह्यता और विषय पर अध्यक्ष का निर्णय अंतिम होगा।

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भाषा आनन्द मनीषा नेत्रपाल

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