सेवा और संवेदना का पेशा है नर्सिंग : योगी आदित्यनाथ
सेवा और संवेदना का पेशा है नर्सिंग : योगी आदित्यनाथ
लखनऊ, 22 मार्च (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नर्सिंग को सेवा और संवेदना का पेशा बताते हुए रविवार को कहा कि जब सेवा और संवेदना मरीज के साथ जुड़ती हैं, तो उसके सकारात्मक परिणाम सामने आते हैं।
उन्होंने कहा कि इसी भावना के साथ राज्य सरकार नर्सिंग अधिकारियों को स्वास्थ्य सेवाओं से जोड़ रही है।
मुख्यमंत्री ने यहां चिकित्सा शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित समारोह में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग से चयनित नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र वितरित करने के बाद कहा, ‘‘ नर्सिंग का पेशा सेवा और संवेदना का है। आपकी सेवा और संवेदना जब मरीज के साथ जुड़ती है, तो उसके परिणाम हम सबके सामने आते हैं।’’
एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार इस अवसर पर 1,228 नर्सिंग अधिकारियों को नियुक्ति पत्र दिए गए, जिनमें 1,097 महिलाएं और 131 पुरुष शामिल हैं।
आदित्यनाथ ने कहा, “नवरात्र के अवसर पर बेटियों को नियुक्ति पत्र मिलना नारी सशक्तीकरण का एक आदर्श उदाहरण है। मैं सभी अभ्यर्थियों को हृदय से बधाई देता हूं और उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग को धन्यवाद देता हूं।”
उन्होंने कहा, “वह समय बीत चुका है जब यह सोचा जाता था कि मेडिकल कॉलेज या नर्सिंग कॉलेज खोलने से क्या होगा। मेडिकल शिक्षा महंगी हो सकती है, लेकिन नर्सिंग ऐसा क्षेत्र है जिसमें डिग्री प्राप्त करने के बाद रोजगार की पूरी संभावना रहती है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय नर्सिंग पेशेवरों की मांग केवल देश में ही नहीं, बल्कि दुनिया भर में हो रही है।
उन्होंने कहा, “हाल ही में मैं जापान गया था, जहां बड़ी संख्या में नर्सिंग पेशेवरों की मांग है। जर्मनी, कोरिया और यूरोप के अन्य देशों में भी भारतीय नर्सों की मांग है और उन्हें भरोसा है कि वे उत्कृष्ट कार्य करेंगी।”
आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य सरकार मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों में बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए नर्सिंग अधिकारियों को सेवाओं से जोड़ रही है।
उन्होंने कहा, “आपका चयन लोकसेवा आयोग से हुआ है और अब चिकित्सा शिक्षा विभाग के माध्यम से आपको इस अभियान को आगे बढ़ाना है।”
पूर्ववर्ती सरकारों पर निशाना साधते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि 2017 से पहले प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा कमजोर था।
उन्होंने कहा, “1947 से 2017 तक 70 वर्षों में प्रदेश में केवल 17 सरकारी मेडिकल कॉलेज थे और निजी क्षेत्र सहित कुल संख्या 40 थी। आज सरकारी और निजी क्षेत्र मिलाकर इनकी संख्या बढ़कर 81 हो गई है। यह उपलब्धि नौ वर्षों में हासिल की गई है।”
मुख्यमंत्री ने कहा कि भर्ती प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी और निष्पक्ष है तथा समाज के हर वर्ग को बिना भेदभाव के अवसर दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पिछले नौ वर्षों में प्रदेश सरकार ने नौ लाख से अधिक सरकारी नौकरियां दी हैं, जो देश में किसी भी राज्य द्वारा दी गई सबसे बड़ी संख्या मानी जा रही है।
अपनी सरकार की उपलब्धियां गिनाते हुए उन्होंने कहा कि वर्षों से बंद पड़े एएनएम और जीएनएम प्रशिक्षण संस्थानों को पुनः शुरू किया गया है। प्रदेश में 35 बंद एएनएम प्रशिक्षण केंद्रों को फिर से संचालित किया गया है, जबकि 31 नए नर्सिंग कॉलेजों का निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण की दिशा में भी प्रदेश ने महत्वपूर्ण प्रगति की है।
उन्होंने नर्सिंग क्षेत्र से जुड़ी छात्राओं से आह्वान किया कि वे बीएससी नर्सिंग और जीएनएम पाठ्यक्रम के साथ मराठी, तेलुगु, मलयालम, तमिल और बांग्ला जैसी भारतीय भाषाओं का भी ज्ञान प्राप्त करें, ताकि देश-विदेश में सेवा के अवसरों का लाभ उठा सकें।
इस अवसर पर स्वास्थ्य विभाग का दायित्व संभाल रहे उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने मुख्यमंत्री के प्रति आभार व्यक्त करते हुए नर्सिंग अधिकारियों को सेवा भाव से कार्य करने के लिए प्रेरित किया। पाठक ने कहा कि किसी भी प्रकार की कठिनाई होने पर वे उनसे सीधे संपर्क कर सकते हैं।
इस समारोह को चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह ने भी संबोधित किया।
भाषा
आनन्द रवि कांत

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