अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर आदित्यनाथ ने कहा, ‘कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं’

अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर आदित्यनाथ ने कहा, ‘कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं’

अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर आदित्यनाथ ने कहा, ‘कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं’
Modified Date: February 13, 2026 / 10:19 pm IST
Published Date: February 13, 2026 10:19 pm IST

लखनऊ, 13 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पिछले महीने प्रयागराज में आयोजित माघ मेले के दौरान स्नान के लिए जाते समय ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को पुलिस द्वारा रोके जाने से जुड़े विवाद पर पहली बार चुप्पी तोड़ते हुए शुक्रवार को कहा कि कोई भी व्यक्ति कानून से ऊपर नहीं है।

उन्होंने इस मामले पर समाजवादी पार्टी (सपा) पर भी निशाना साधते हुए कहा कि इस घटना ने वर्ष 2015 में सपा के शासनकाल में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद पर वाराणसी में हुए लाठीचार्ज व मुकदमे की याद दिलायी और कहा कि कानून की नजर में सब बराबर हैं।

योगी ने कहा कि वह कानून का पालन करना जानते हैं और पालन कराना भी जानते हैं।

आदित्यनाथ ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा, “मैं कहता हूं कि क्या हर व्यक्ति मुख्यमंत्री बनकर प्रदेश में घूम सकता है… मंत्री बनकर घूम सकता है…समाजवादी पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनकर घूम सकता है? इसके लिये एक व्यवस्था है। भारत के सनातन धर्म की भी यही व्यवस्थाएं हैं।”

उन्होंने कहा कि शंकराचार्य का पद सनातन धर्म में सर्वोच्च और सम्मानित पद माना जाता है, हर कोई खुद को शंकराचार्य नहीं लिख सकता।

मुख्यंत्री ने वर्ष 2015 में तत्कालीन सपा सरकार में अविमुक्तेश्वरानंद पर हुए लाठीचार्ज का जिक्र करते हुए कहा, “अगर वह शंकराचार्य थे तो आप लोगों ने वाराणसी में उनपर लाठीचार्ज क्यों किया था? मुकदमा क्यों दर्ज किया था? आप नैतिकता की बात करते हैं?”

योगी ने कहा, “सपा को उन्हें पूजना है तो पूजे, लेकिन हम मर्यादा में रहते हैं। कानून के शासन पर विश्वास करते हैं। कानून का पालन करना भी जानते हैं, करवाना भी जानते हैं।”

पुलिस ने मेला क्षेत्र को ‘नो-व्हीकल जोन’ बताते हुए अविमुक्तेश्वरानंद को संगम तट पर जाने से रोक दिया था।

इसके बाद शंकराचार्य के समर्थकों और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प व धक्का-मुक्की हुई थी।

अंत में अविमुक्तेश्वरानंद ने स्‍नान करने से मना कर दिया था।

भाषा सलीम जितेंद्र

जितेंद्र


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