लखनऊ, 17 सितंबर (भाषा) लखनऊ की एक स्थानीय अदालत ने 2018 में एप्पल कंपनी के क्षेत्रीय सेल्स प्रबंधक की हत्या के मामले में एक कॉन्स्टेबल को गैर-इरादतन हत्या का दोषी ठहराया।
अदालत ने दोषी करार दिये गये पुलिसकर्मी के साथी सिपाही को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।
सत्र न्यायाधीश मलखान सिंह की अदालत ने एप्पल के क्षेत्रीय सेल्स प्रबंधक विवेक तिवारी की हत्या के मामले में कॉन्स्टेबल प्रशांत चौधरी को दोषी ठहराया। उसे सजा पर सुनवाई के लिये 21 सितंबर को अदालत में पेश करने का आदेश दिया गया है।
अदालत ने सबूतों के अभाव में चौधरी के साथी सिपाही संदीप कुमार को बरी कर दिया।
अदालत ने सुनवाई के दौरान पेश किए गए सबूतों के आधार पर माना कि इस बात का कोई प्रमाण नहीं है कि चौधरी का तिवारी को मारने का कोई पहले से इरादा या मकसद था। अदालत ने कहा कि यह घटना अचानक झड़प के दौरान हुई थी इसलिए चौधरी पर हत्या का अपराध साबित नहीं हुआ।
अभियोजन पक्ष के अनुसार, 29 सितंबर 2018 की रात करीब एक बजकर 40 मिनट पर एप्पल के क्षेत्रीय सेल्स प्रबंधक विवेक तिवारी तिवारी अपनी सहकर्मी सना खान के साथ कार से घर लौट रहे थे तभी गोमती नगर विस्तार क्षेत्र में सरयू अपार्टमेंट के पास दो पुलिसकर्मियों ने कथित तौर पर उनकी गाड़ी रोकने की कोशिश की।
आरोप है कि चौधरी ने अपनी लाइसेंसी पिस्तौल से तिवारी पर गोली चलाई जबकि संदीप ने कथित तौर पर सना के साथ मारपीट की और कार के बोनट पर प्रहार किया। इस घटना के बाद तिवारी को राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
सना ने सुबह करीब पांच बजे गोमती नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई, जिसमें कहा गया कि पुलिसकर्मियों ने उनकी गाड़ी रोकने की कोशिश की और उनमें से एक ने अचानक गोली चला दी।
बाद में, विवेक तिवारी की पत्नी कल्पना ने भी दोनों पुलिसकर्मियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करायी थी।
कल्पना के वकील प्रांशु अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने 19 दिसंबर 2018 को चौधरी और संदीप के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया था।
फिर 24 दिसंबर को तत्कालीन मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने मामले का संज्ञान लेते हुए इसे सत्र अदालत में भेज दिया था। उसके बाद 22 मार्च 2019 को तत्कालीन अपर जिला न्यायाधीश संजय शंकर पांडेय ने दोनों आरोपियों के खिलाफ आरोप तय किये थे।
भाषा सं. सलीम गोला
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