(फाइल फोटो के साथ)
लखनऊ, 17 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को कहा कि उनकी सरकार ने बिना किसी सिफारिश या भेदभाव के पारदर्शी पुलिस भर्ती सुनिश्चित की है ।
उन्होंने कहा कि पुलिस आयुक्त प्रणाली की शुरूआत राज्य में पुलिस व्यवस्था में सुधारों का हिस्सा है।
आदित्यनाथ ने कहा कि उत्तर प्रदेश में पुलिस आयुक्त प्रणाली लागू करने के प्रस्ताव 1972 से लंबित थे, लेकिन उन पर कार्रवाई नहीं की गई। उन्होंने दावा किया कि आईपीएस अधिकारियों को पहले प्रशासनिक मामलों में आईएएस अधिकारियों के प्रभुत्व का सामना करना पड़ता था।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले उत्तर प्रदेश में आईपीएस अधिकारियों को आईएएस अधिकारियों द्वारा दबाया जाता था। वे फाइलों को दबाकर रखते थे। एक बार जब कोई फाइल बंद हो जाती थी, तो उसे दोबारा खुलवाना लगभग असंभव होता था। यहां तक कि अगर यमराज भी आ जाएं, तो उस फाइल को आईएएस अधिकारी से खुलवाना मुश्किल होता था।’’
मुख्यमंत्री ने कहा कि अब राज्य के सात जिलों में आयुक्त प्रणाली लागू हो गई है जो पुलिस सुधारों का एक हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश सरकार ने जनवरी 2020 में गौतमबुद्धनगर और लखनऊ से शुरुआत करते हुए पुलिस व्यवस्था की आयुक्त प्रणाली की स्थापना की थी । यह प्रणाली अंततः पांच और जिलों वाराणसी, प्रयागराज, गाजियाबाद, कानपुर और आगरा में शुरू की गई।
आयुक्त प्रणाली के तहत, पुलिस आयुक्त (एक आईपीएस अधिकारी) बढ़ी हुई कार्यकारी शक्तियों के साथ पुलिस व्यवस्था का नेतृत्व करता है, जो पहले की व्यवस्था की जगह लेता है । पहले की व्यवस्था में जिला मजिस्ट्रेट और पुलिस अधीक्षक कानून-व्यवस्था की कई जिम्मेदारियां साझा करते थे।
राज्य की राजधानी में एक कार्यक्रम में आदित्यनाथ ने कहा कि कानून का शासन और सुशासन स्थापित करने के लिए पारदर्शी भर्ती आवश्यक थी।
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने उत्तर प्रदेश पुलिस भर्ती और प्रोन्नति बोर्ड द्वारा भर्ती किए गए 930 कंप्यूटर संचालकों (ग्रेड-ए) को नियुक्ति पत्र वितरित किए।
उन्होंने कहा, ‘‘आज हम 930 कंप्यूटर संचालकों को नियुक्ति पत्र वितरित कर रहे हैं। हाल में पुलिस के आरक्षी के लगभग 35,000 पदों के लिए परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें लगभग 28 लाख युवाओं ने आवेदन किया था। इससे पहले, 41,000 होम गार्ड पदों के लिए भी परीक्षा आयोजित की गई थी।’’
मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘पिछले नौ वर्षों में विभिन्न चरणों में लगभग 2.15 लाख पुलिस कर्मियों की भर्ती की गई है। ये सभी प्रक्रियाएं पूरी पारदर्शिता के साथ पूरी की गई हैं। इसमें कोई सिफारिश नहीं की गई है, कोई भेदभाव नहीं किया गया है।’’
उन्होंने कहा कि मजबूत कानून-व्यवस्था एक निष्पक्ष भर्ती प्रक्रिया और उसके बाद उचित कर्मियों के प्रशिक्षण से शुरू होती है।
आदित्यनाथ ने कहा कि राज्य में अपराध विज्ञान सुविधाओं के विस्तार के साथ पुलिस बुनियादी ढांचे को भी मजबूत किया गया है।
उन्होंने कहा, ‘‘पहले उत्तर प्रदेश में केवल चार अपराध विज्ञान प्रयोगशालाएं थीं, लेकिन आज हमने इसे बढ़ाकर 12 कर दिया है। पुलिस के पास अपना खुद का अपराध विज्ञान संस्थान भी है।’’
उन्होंने कहा कि अब हर जिले में मोबाइल फोरेंसिक प्रयोगशालाएं हैं, बड़े जिलों में तीन ऐसी इकाइयां हैं और छोटे जिलों में दो इकाइयां हैं।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर ये तैयारियां पहले से नहीं की गई होतीं तो तीन नए आपराधिक कानून प्रभावी ढंग से लागू नहीं हो पाते।’’
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि उत्तर प्रदेश में पहले केवल एक साइबर थाना था, लेकिन अब हर जिले में एक साइबर थाना है और ऑनलाइन धोखाधड़ी के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए हर थाने में एक साइबर हेल्प डेस्क है।
लगभग एक दशक पहले राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति को याद करते हुए, आदित्यनाथ ने कहा कि एक समय था जब पुलिस अधिकारी भी सुरक्षित नहीं थे।
उन्होंने मुरादाबाद की एक घटना का जिक्र करते हुए कहा कि हिंसा के दौरान भीड़ ने एक डीआइजी रैंक के आईपीएस अधिकारी पर हमला कर दिया था, जो उस समय पुलिस के सामने आने वाली चुनौतियों पर प्रकाश डालता है।
उन्होंने कहा, ‘‘अगर एक आईपीएस अधिकारी तब सुरक्षित नहीं था, तो आम नागरिकों और महिलाओं की स्थिति की कल्पना की जा सकती है।’’
उन्होंने कहा कि उनकी सरकार में स्थिति बदल गई है और कानून व्यवस्था में सुधार हुआ है।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश खन्ना, अपर मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद और डीजीपी राजीव कृष्ण सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
भाषा जफर राजकुमार
राजकुमार