गाजियाबाद में आत्महत्या करने वाली तीन बहनों के बेचे गए मोबाइल फोन की जांच करेगी पुलिस
गाजियाबाद में आत्महत्या करने वाली तीन बहनों के बेचे गए मोबाइल फोन की जांच करेगी पुलिस
गाजियाबाद (उप्र), छह फरवरी (भाषा) गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की कथित आत्महत्या मामले की जांच कर रही पुलिस ने उनके लिए पिता द्वारा खरीदे गए और बाद में बेच दिये गए दो मोबाइल फोन के ‘आईएमईआई’ नंबर हासिल कर लिए गए हैं तथा अब डेटा हासिल करने के लिए उन उपकरणों का पता लगाएगी। एक अधिकारी ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।
आईएमईआई (अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान) 15 अंकों का अनूठा कोड है जो प्रत्येक मोबाइल फोन में होता है।
अधिकारी ने बताया कि अब पुलिस इन मोबाइल फोन का पता लगाएगी, ताकि डेटा हासिल किया जा सके और यह सत्यापित किया जा सके कि क्या लड़कियां कोई ‘टास्क आधारित ऑनलाइन गेम’ खेल रही थीं।
अधिकारी ने बताया कि जांच के तहत घटनाक्रम को समझने के दौरान, बृहस्पतिवार को लड़कियों के माता-पिता से करीब दो घंटे तक पूछताछ की गई।
निशिका (16), प्राची (14) और पाखी (12) ने इस सप्ताह की शुरुआत में ट्रांस-हिंडन क्षेत्र अंतर्गत भारत सिटी सोसाइटी में एक इमारत की नौवीं मंजिल से कूदकर कथित तौर पर आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस का कहना है कि इस मामले को आत्महत्या के रूप में देखा जा रहा है और जांच कथित ऑनलाइन गेमिंग की लत से संबंधित पिता के दावों की पुष्टि करने और परिवार की परिस्थितियों सहित सभी संबंधित पहलुओं की जांच करने पर केंद्रित है।
प्रारंभिक तथ्य, जिनमें बृहस्पतिवार को बहनों के कमरे से बरामद नौ पन्नों की एक छोटी डायरी भी शामिल है, कोरियाई संस्कृति के प्रति उनके गहरे लगाव और कथित पारिवारिक कलह की ओर इशारा करते हैं।
ट्रांस-हिंडन क्षेत्र के पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निमिष पाटिल ने बताया कि लड़कियों के पिता चेतन कुमार ने निशिका के लिए लगभग तीन महीने पहले एक मोबाइल फोन खरीदा था, जबकि प्राची के लिए लगभग 15 दिन पहले दूसरा मोबाइल फोन खरीदा था।
डीसीपी ने कहा, ‘‘कोरियाई संस्कृति के प्रति उनके बढ़ते लगाव को देखते हुए, पिता ने दोनों फोन जब्त कर बेच दिए थे। हमें उपकरणों के आईएमईआई नंबर मिल गए हैं।’’
उन्होंने ‘पीटीआई-भाषा’ को बताया, ‘‘हमारा पहला कदम खरीदारों का पता लगाना और मोबाइल फोन हासिल करना होगा, जिसके बाद हम उनसे डेटा निकालकर यह सत्यापित करेंगे कि वे किस प्रकार के ऑनलाइन गेम या ऐप का उपयोग कर रही थीं।’’
पुलिस को अभी तक पिता के दावे के अनुसार, कोरियाई ‘टास्क-बेस्ड’ ऐप के उपयोग की पुष्टि करने वाला कोई सबूत नहीं मिला है।
अधिकारियों ने बताया कि वे घटना से पहले की व्यापक परिस्थितियों को समझने के लिए परिवार की वित्तीय पृष्ठभूमि की भी जांच कर रहे हैं, जिसमें कथित संपत्ति सौदे और ऋण शामिल हैं।
शुक्रवार सुबह ‘पीटीआई-भाषा’ द्वारा संपर्क किए जाने पर, टीला मोड़ पुलिस थाना प्रभारी रवि बलियान ने बताया कि पूछताछ जारी है और आवश्यकता पड़ने पर परिवार से दोबारा संपर्क किया जाएगा।
अपने आवास पर संवाददाताओं से बातचीत में कुमार ने कहा कि उनकी बेटियां कोरियाई संस्कृति से बहुत प्रभावित थीं और देर रात तक, कभी-कभी आधी रात से सुबह 5 बजे तक ‘टास्क-बेस्ड’ ऑनलाइन गेम खेलती थीं।
उन्होंने दावा किया कि लड़कियों ने अपने-अपने नाम बदलकर कोरियाई नाम रख लिए थे और वे कोरियाई दोस्तों से ऑनलाइन संपर्क में थीं।
लड़कियों के पिता ने स्वीकार किया कि उन्होंने शुरू में उनकी गतिविधियों को हल्के में लिया था। कुमार ने मीडिया के माध्यम से सरकार से युवा पीढ़ी और भारतीय संस्कृति की रक्षा के लिए इस तरह के ऑनलाइन गेमिंग ऐप पर प्रतिबंध लगाने का भी आग्रह किया।
पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के अनुसार, लड़कियों के सिर में गंभीर चोटें आई थीं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, गिरने से उनकी पसलियां टूट गई थीं और अंदरूनी अंगों को नुकसान पहुंचा था।
तीनों बहनों का बुधवार शाम दिल्ली के निगम बोध घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
भाषा
सं आनन्द सुभाष
सुभाष

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