संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण पारपंरिक ज़्यादा तथा आमजन के लिए उपयोगी कम:मायावती

संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण पारपंरिक ज़्यादा तथा आमजन के लिए उपयोगी कम:मायावती

संसद में राष्ट्रपति का अभिभाषण पारपंरिक ज़्यादा तथा आमजन के लिए उपयोगी कम:मायावती
Modified Date: January 28, 2026 / 05:17 pm IST
Published Date: January 28, 2026 5:17 pm IST

लखनऊ, 28 जनवरी (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख मायावती ने बुधवार को कहा कि बजट सत्र की शुरुआत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संसद में दिया गया अभिभाषण ‘ज़्यादा पारंपरिक और आम लोगों के लिए कम उपयोगी’ लगा।

मायावती ने कहा कि सरकार को आत्मनिर्भरता, विदेश नीति और आर्थिक चुनौतियों के मुद्दों पर लोगों का ज़्यादा भरोसा जीतने की ज़रूरत है।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि यद्यपि बजट सत्र की शुरुआत संसद के संयुक्त सत्र में राष्ट्रपति मुर्मू के संबोधन से हुई, लेकिन भाषण से देश की गंभीर समस्याओं के शीघ्र समाधान या इसे वास्तविक आत्मनिर्भरता की ओर दृढ़ता से ले जाने की कोई नई उम्मीद नहीं जगी।

उन्होंने कहा कि आज से बजट सत्र शुरू होने के साथ ही, लोगों को उम्मीद थी कि बजट भाषण देश की ज्वलंत समस्याओं के त्वरित समाधान की नई उम्मीद जगाएगा और भारत को आत्मनिर्भरता की ओर निर्णायक रूप से ले जाएगा, लेकिन कई लोगों को यह भाषण अधिक पारंपरिक और आम लोगों के लिए कम उपयोगी लगा।

वैश्विक स्थिति का जिक्र करते हुए, पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिका द्वारा ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति अपनाने के कारण दुनिया में व्यापक उथल-पुथल देखी जा रही है, और इस घटनाक्रम से भारत का प्रभावित होना स्वाभाविक है।

उन्होंने कहा कि ऐसे समय में, समाधान के रूप में निजी क्षेत्र पर सरकार की अत्यधिक निर्भरता से लोगों में चिंता और आशंकाएं पैदा होती हैं कि भारतीय संदर्भ में यह दृष्टिकोण कितना प्रभावी होगा।

बसपा प्रमुख ने कहा कि जहां सरकार संसद के अंदर और बाहर अपने राजनीतिक विरोधियों को आक्रामक रूप से निशाना बनाती है, वहीं जनता को आत्मनिर्भरता, विदेश नीति सहित देश और जनहित से जुड़े मुद्दों पर भी सरकार से उतनी ही प्रखरता की अपेक्षा है, ताकि जन-आत्मविश्वास मज़बूत हो सके।

बसपा नेता ने कहा, ”इस क्रम में भारत का करीब 20 साल बाद यूरोपीय यूनियन के साथ व्यापारिक समझौता बड़े-बड़े पूंजीपतियों व धन्नासेठों के साथ-साथ आमजन के हित व कल्याण में भी अवश्य होना चाहिए।”

भाषा जफर नोमान

नोमान


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