यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन
यूजीसी के नए नियमों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में विरोध प्रदर्शन
देवरिया/कौशांबी/रायबरेली, 28 जनवरी (भाषा) विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) के नए नियमों के खिलाफ उत्तर प्रदेश में बुधवार को विरोध तेज हो गया। जहां देवरिया और कौशांबी में बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन हुआ, वहीं रायबरेली में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के एक पदाधिकारी ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया।
अधिकारियों ने कहा कि देवरिया में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (उच्च शिक्षा संस्थानों में समता के संवर्द्धन हेतु) विनियम, 2026 के विरोध में बुधवार को बड़ी संख्या में लोग सरकार विरोधी नारेबाजी करते हुए कचहरी के पास रोड पर एकत्रित हुए और धरना दिया। सुभाष चौक से निकले लोगों ने जिलाधिकारी कार्यालय के बाहर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने कलेक्ट्रेट परिसर से बाहर निकल कर कचहरी के सामने सड़क जाम कर दी जिससे करीब एक घंटे तक यातायात बाधित रहा।
इसके बाद जिलाधिकारी दिव्या मित्तल मौके पर पहुंची और ज्ञापन लेकर जाम को खुलवाया। इस दौरान कलेक्ट्रेट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रीतम मिश्रा ने कहा कि यह नियम लागू होने से सवर्ण समाज के लोगों पर अत्याचार होगा और बच्चों का भविष्य अंधकारमय हो जाएगा।
कुछ वकीलों का कहना है कि सरकार यूजीसी 2026 का नया नियम लागू कर समाज में अराजकता की स्थिति बनाना चाहती है और इससे समाज में अलगाववाद बढ़ेगा।
कौशांबी में ‘सवर्ण आर्मी’ के जिला अध्यक्ष अभिषेक पांडेय ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को एक पत्र लिखकर यूजीसी नियमों को काला कानून बताया और इसे वापस लेने की मांग की।
पांडेय का दावा है कि इन नियमों से सवर्ण युवाओं के भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ेगा। उन्होंने जिलेभर के कार्यकर्ताओं से इसी तरह का विरोध प्रदर्शन करने की अपील की।
इस बीच, यूजीसी के नए नियमों से आहत होकर रायबरेली के भाजपा किसान मोर्चा के सलोन मंडल अध्यक्ष श्याम सुंदर त्रिपाठी ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया। उन्होंने इस संबंध में प्रधानमंत्री को भी पत्र लिखा है।
इसकी सूचना उन्होंने भाजपा किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष और भाजपा जिला अध्यक्ष को भी पत्र के जरिए दी है।
श्याम सुंदर त्रिपाठी ने पत्र में कहा “सवर्ण जाति के बच्चों के विरुद्ध लाए गए यूजीसी जैसे काले कानून के कारण मैं अपने पद से त्यागपत्र देता हूं। यह कानून समाज के प्रति अत्यंत घातक और विभाजनकारी है।”
भाषा सं राजेंद्र नोमान
नोमान


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