राहुल गांधी मानहानि मामले में हाथरस में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी
राहुल गांधी मानहानि मामले में हाथरस में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी
हाथरस (उप्र), 19 सितंबर (भाषा) हाथरस की एक अदालत ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष एवं कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मानहानि के एक मामले में पुनरीक्षण याचिका पर उनको नोटिस जारी किया था और मामले में शनिवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन संबंधित न्यायिक अधिकारी के अदालत में नहीं बैठने के कारण सुनवाई नहीं हुई और अब इसकी सुनवायी 15 अक्टूबर को होगी। एक अधिवक्ता ने शनिवार को यह जानकारी दी।
अधिवक्ता मुन्ना सिंह पुंढीर ने बताया कि पिछली तारीख पर अदालत ने राहुल गांधी को जारी नोटिस की तामील मान ली थी। उन्होंने कहा कि आज सुनवाई होनी थी लेकिन न्यायिक अधिकारी के अदालत में नहीं बैठने से आज सुनवाई नहीं हुई और अब मामले में अगली सुनवाई 15 अक्टूबर को होगी।
अतिरिक्त सिविल न्यायाधीश (वरिष्ठ प्रभाग) दीपक नाथ सरस्वती की सांसद-विधायक अदालत ने 13 मई के अपने आदेश में राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज इस परिवाद को खारिज कर दिया था। पुनरीक्षण याचिका स्वीकार होने के बाद अब अपर जिला न्यायाधीश सांसद/ विधायक अदालत नंबर-पांच विजय कुमार द्वितीय की अदालत में मामले की सुनवाई हो रही है।
यह मामला हाथरस के एक गांव से जुड़ा है। इस मामले में दुष्कर्म के आरोप से बरी हुए युवक रवि, राम कुमार उर्फ रामू और लवकुश के वकील मुन्ना सिंह पुंढीर ने बताया कि राहुल गांधी पर उन्होंने तीन मामले अदालत में दायर किये थे, जो राम कुमार, रवि और लवकुश के हैं।
वकील पुंढीर ने यह भी बताया कि इस प्रकरण में युवक संदीप को तो नामजद किया गया था, लेकिन वादी के परिवार के लोगों के कहने पर तीन और लड़कों को झूंठा फंसा दिया गया था। उन्होंने बताया कि मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने की थी और मुकदमा भी ढाई साल चला था जिसमें तीनों लड़के जेल में रहे।
उन्होंने कहा कि जब ये मामले में बरी होकर कर आए, उसके बाद राहुल गांधी 12 दिसंबर 2024 को गांव आए थे जहां उन्होंने कहा था कि आरोपी बाहर घूम रहे हैं और पीड़ित परिवार घर में बंद है, जबकि परिवार सुरक्षा में था।
राहुल गांधी के बयान के बाद मामले में दुष्कर्म के आरोपों से बरी हुए रवि, राम कुमार उर्फ रामू और लवकुश के वकील मुन्ना सिंह पुंढीर ने गांधी को डेढ़ करोड़ रुपये का विधिक नोटिस भेजा था, नोटिस के जरिए तीनों को 50-50 लाख रुपये देने को कहा गया था। नोटिस के बाद में मामले में एसीजेएम अदालत में परिवाद दर्ज कराया गया था।
भाषा सं आनन्द अमित
अमित

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