हुक्का बार चलाना संविधान के तहत मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

हुक्का बार चलाना संविधान के तहत मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय

हुक्का बार चलाना संविधान के तहत मौलिक अधिकार नहीं: इलाहाबाद उच्च न्यायालय
Modified Date: May 28, 2026 / 12:43 am IST
Published Date: May 28, 2026 12:43 am IST

लखनऊ, 27 मई (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बुधवार को कहा कि हुक्का बार चलाना संविधान के तहत एक मौलिक अधिकार नहीं है और लोगों के स्वास्थ्य के हित में इस तरह की गतिविधियों पर प्रतिबंध लगाने का राज्य सरकार के पास पूरा अधिकार है।

न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने हुक्का बार संचालकों की दलीलें खारिज करते हुए यह टिप्पणी की। संचालकों ने दलील दी थी कि इस तरह के प्रतिष्ठान चलाने को मौलिक अधिकार के तहत संरक्षण प्राप्त है।

अदालत ने कहा कि हुक्का बार में तंबाकू और निकोटिन का उपभोग किया जाता है जिससे लोगों के स्वास्थ्य को गंभीर खतरा है। इसलिए इस तरह की गतिविधियों को संरक्षित व्यापार और कारोबार अधिकारों के दायरे से उसी तरह बाहर रखा जा सकता है जैसे शराब और जुए को।

भाषा सं राजेंद्र शोभना

शोभना


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