दो साल के अंदर दूसरा मातृत्व अवकाश देने से मना नहीं किया जा सकता : अदालत

दो साल के अंदर दूसरा मातृत्व अवकाश देने से मना नहीं किया जा सकता : अदालत

दो साल के अंदर दूसरा मातृत्व अवकाश देने से मना नहीं किया जा सकता : अदालत
Modified Date: April 22, 2026 / 01:15 am IST
Published Date: April 22, 2026 1:15 am IST

लखनऊ, 21 अप्रैल (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने मंगलवार को अपने एक अहम फैसले में कहा कि पहली बार छुट्टी के दो साल के अंदर दोबारा मातृत्व अवकाश लेने से मना नहीं किया जा सकता।

अदालत ने कहा कि कानून के तहत मिले अधिकार, वित्तीय हैंडबुक के प्रावधानों से ऊपर होते हैं।

न्यायमूर्ति करुणेश सिंह पवार की पीठ ने मनीषा यादव की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश दिया। यादव ने चार अप्रैल 2026 के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनके दूसरी बार लिये गये मातृत्व अवकाश की अर्जी को नामंजूर कर दिया गया था।

याचिकाकर्ता ने दलील दी कि मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट—1961 एक कल्याणकारी कानून है और इसके प्रावधानों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।

हालांकि, राज्य सरकार ने वित्तीय हैंडबुक के नियम 153(1) का हवाला देते हुए यह तर्क दिया कि दो मातृत्व अवकाश अवधियों के बीच कम से कम दो साल का अंतर होना अनिवार्य है।

अदालत ने पिछले निर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि मैटरनिटी बेनिफिट एक्ट चूंकि संसद द्वारा बनाया गया कानून है इसलिए यह किसी भी कार्यकारी निर्देश या वित्तीय हैंडबुक के प्रावधानों से ऊपर माना जाएगा और अगर कोई विरोधाभास होता है, तो एक्ट के प्रावधान ही मान्य होंगे।

अदालत ने माना कि याचिकाकर्ता की पहली संतान वर्ष 2021 में हुआ था और उसने 2022 में दूसरे मातृत्व अवकाश के लिए अर्जी दी थी, जिसे गलत आधारों पर खारिज कर दिया गया था।

पीठ ने इस आदेश को रद्द करते हुए संबंधित अधिकारी को निर्देश दिया कि वह याचिकाकर्ता को छह अप्रैल 2026 से दो अक्टूबर 2026 तक मातृत्व अवकाश मंजूर करे।

भाषा सं. सलीम रंजन

रंजन


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