राम मंदिर दान विवाद की जांच के लिए गठित एसआईटी ने सरकार को प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंपा

राम मंदिर दान विवाद की जांच के लिए गठित एसआईटी ने सरकार को प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंपा

राम मंदिर दान विवाद की जांच के लिए गठित एसआईटी ने सरकार को प्रारंभिक प्रतिवेदन सौंपा
Modified Date: June 23, 2026 / 12:43 pm IST
Published Date: June 23, 2026 12:43 pm IST

लखनऊ, 23 जून (भाषा) अयोध्या में राम मंदिर दान के वित्तीय प्रबंधन में कथित हेराफेरी की जांच कर रहे विशेष जांच दल (एसआईटी) ने मंगलवार को उप्र सरकार के अपर मुख्‍य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को अपनी प्रारंभिक प्रतिवदेन रिपोर्ट सौंप दी। जांच दल का नेतृत्‍व कर रहे एक वरिष्‍ठ अधिकारी ने यह जानकारी दी।

एसआईटी के अध्‍यक्ष और लखनऊ के मंडलायुक्‍त विजय विश्‍वास पंत ने पत्रकारों को बताया ‘‘आज हमने शासन द्वारा गठित तीन सदस्‍यीय एसआईटी की जांच रिपोर्ट अपर मुख्‍य सचिव (गृह) को सौंपी है। यह एक प्रारंभिक प्रतिवेदन है और उसी क्रम में आज इसे अपर मुख्‍य सचिव को सौंप दिया गया है।’’

गबन से जुड़े सवालों के जवाब में उन्‍होंने कहा कि यह एक गोपनीय जांच हैं और उसे बताने के लिए हम इस समय अधिकृत नहीं हैं। उन्‍होंने कहा कि जो हमारी जांच थी, वह हमने उपलब्‍ध करा दिया है।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने राम मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन और दान राशि से संबंधित आरोपों की जांच के लिए 13 जून को तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया।

अधिकारियों ने बताया था कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के अनुरोध के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एसआईटी गठित की गई। यह दल तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों के संबंध में लगाए जा रहे आरोपों की जांच कर सरकार को अपनी रिपोर्ट देगा।

एसआईटी में भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी तथा लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत, भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) अधिकारी व पुलिस महानिरीक्षक किरन एस. और वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन शामिल हैं।

अयोध्या स्थित तीर्थ क्षेत्र में दानपात्रों को लेकर सोशल मीडिया पर फैल रही अफवाहों को गंभीरता से लेते हुए श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने मामले की निष्पक्ष जांच के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से विशेष जांच दल गठित किए जाने का अनुरोध किया था।

ट्रस्ट के अनुसार अफवाहों पर रोक लगाने और मामले की सच्चाई सामने लाने के लिए इसकी गहन जांच आवश्यक है। यह तीर्थ क्षेत्र की छवि और करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था को चोट पहुंचाने की गहरी साजिश है, जिसका पर्दाफाश होना बेहद जरूरी है।

इस मामले की शुरुआत सात जून को हुई जब समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और उप्र के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कुछ तथ्यों का हवाला देते हुए मंदिर के दान में गबन का मामला उठाया और इसमें न्यायिक संज्ञान लेने की अपील की।

योगी आदित्यनाथ ने हाल में अपनी अयोध्‍या यात्रा में यह दावा किया था कि इस जांच में एसआईटी दूध का दूध और पानी का पानी करेगी। उन्होंने राम भक्तों से कहा कि पांच सौ वर्षों तक इंतजार किया और 15 दिन और इंतजार करके देख लो।

भाषा आनन्‍द

मनीषा

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