अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में सपा 2017 की स्थिति में पहुंच जाएगी: ओमप्रकाश राजभर
अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में सपा 2017 की स्थिति में पहुंच जाएगी: ओमप्रकाश राजभर
आजमगढ़ (उप्र) 22 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश में सत्तारूढ़ भाजपा नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) में सहयोगी दल सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने रविवार को दावा किया कि अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी (सपा) 2017 की स्थिति में पहुंच जाएगी।
सपा ने 2017 में कांग्रेस के साथ मिलकर उत्तर प्रदेश की 403 सदस्यीय विधानसभा का चुनाव लड़ा था। गठबंधन के तहत सपा ने 298 सीट पर और कांग्रेस ने 105 सीट पर अपने उम्मीदवार उतारे थे और इनमें सपा को मात्र 47 और कांग्रेस को सात सीट पर जीत मिली थी।
उत्तर प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर रविवार को यहां अहरौला विकास खंड के टिकुरिया मैदान में महाराजा सुहेलदेव जयंती के अवसर पर आयोजित समरसता महारैली को संबोधित कर रहे थे।
राजभर ने 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर दावा किया कि राजग आजमगढ़ की सभी 10 सीट पर जीत दर्ज करेगा। उन्होंने कहा कि सपा 2027 में फिर 2017 वाली स्थिति में पहुंच जाएगी।
आजमगढ़ जिले की 10 विधानसभा सीट पर 2022 के चुनाव में सपा को जीत मिली थी। उस समय सुभासपा का उसके साथ गठबंधन था। हालांकि, चुनाव के कुछ समय बाद ही राजभर सपा से अलग हो गए और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राजग गठबंधन में शामिल हो गए।
राजभर ने 2017 में राजग के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था लेकिन बाद में अलग हो गए थे।
राजभर ने कहा कि अहरौला के मैदान में उमड़ा जनसमूह इस बात का संकेत है कि अब आजमगढ़ की राजनीति बदलने वाली है। उन्होंने दावा किया कि पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का लाभ अब तक सीमित जातियों को ही मिला है।
सुभासपा प्रमुख ने कहा कि जल्द ही आरक्षण को सात, नौ और 11 प्रतिशत के तीन वर्गों में विभाजित कर रोहिणी आयोग की रिपोर्ट लागू की जाएगी। उन्होंने कहा कि यह कदम सामाजिक न्याय की दिशा में ऐतिहासिक साबित होगा।
सुभासपा की रैली में ब्राह्मण समाज को शामिल करने के लिए पार्टी ने अभियान चलाया था। उन्होंने दावा किया कि रैली में 10 हजार ब्राह्मणों की भागीदारी का लक्ष्य रखा गया था और प्रबुद्ध वर्ग की बड़ी मौजूदगी यह दर्शाती है कि अब सपा का प्रभाव समाप्त होने वाला है।
हालांकि सुभासपा के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता और ओमप्रकाश राजभर के छोटे बेटे अरुण राजभर ने भाजपा सरकार के ही श्रम मंत्री अनिल राजभर पर तीखा हमला बोलते हुए उन्हें समाज का ‘कालनेमी’ बताया।
अरुण ने कहा कि अगर भाजपा का झंडा हटा लिया जाए तो उनकी वास्तविक स्वीकार्यता सामने आ जाएगी।
उन्होंने आरोप लगाया कि रैली में आने वाले समर्थकों की गाड़ियों को रोका गया और अधिकारियों पर दबाव बनाया गया।
अरुण राजभर ने कहा कि सामाजिक सहभागिता रैली में हर वर्ग की भागीदारी रही और यह सपा के गढ़ को कमजोर करने की दिशा में बड़ा कदम है।
समरसता महारैली में पहुंचे प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दया शंकर सिंह ने कहा कि रैली की सफलता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि 12 किलोमीटर लंबा जाम लग गया। उन्होंने कहा कि सपा के गढ़ में इस तरह का आयोजन कर उनके किले को ढहाने का काम शुरू हो चुका है और 2027 के विधानसभा चुनाव में यह किला पूरी तरह ध्वस्त हो जाएगा।
भाषा सं आनन्द
धीरज
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