‘चलते रहो’ का सूत्र वाक्य हमें जीवन में न रुकने का संदेश देता है: योगी आदित्यनाथ

‘चलते रहो’ का सूत्र वाक्य हमें जीवन में न रुकने का संदेश देता है: योगी आदित्यनाथ

‘चलते रहो’ का सूत्र वाक्य हमें जीवन में न रुकने का संदेश देता है: योगी आदित्यनाथ
Modified Date: April 27, 2026 / 09:04 am IST
Published Date: April 27, 2026 9:04 am IST

लखनऊ, 27 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य की बोर्ड परीक्षा में शामिल हुए विद्यार्थियों को पत्र लिखकर प्रेरित किया और कहा कि ‘‘चलते रहो-चलते रहो’’ का सूत्र वाक्य हमें निरंतर परिश्रम, प्रगति और जीवन में न रुकने का संदेश देता है।

इस पत्र को ‘एक्स’ पर साझा कर योगी आदित्यनाथ ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, ‘‘उत्तर प्रदेश बोर्ड की 10वीं और 12वीं कक्षाओं के परीक्षा परिणाम आ चुके हैं। इस वर्ष का परीक्षा परिणाम अत्यंत उत्साहजनक है। अनेक विद्यार्थियों ने लगन और कठिन परिश्रम से पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। मेरी ओर से सभी को उनके उज्ज्वल भविष्य के लिए ढेरों बधाइयां और आशीर्वाद।’’

पत्र में उन्होंने कहा, ‘‘मेरी यह पाती विशेषकर उन विद्यार्थियों के लिए है, जो किन्हीं कारणों से अपेक्षित परिणाम नहीं ला पाए। सफलता और असफलता जीवन के अंग हैं। सफलता हमें उत्साहित करती है, लेकिन असफलता से निराशा घर कर सकती है।’’

योगी ने विद्यार्थियों का हौसला बढ़ाते हुए कहा, ‘‘हमें इस निराशा को दूर कर ‘चरैवेति-चरैवेति’ के मंत्र पर आगे बढ़ना है। ‘चलते रहो, चलते रहो’ का यह सूत्र वाक्य हमें निरंतर परिश्रम, प्रगति और जीवन में न रुकने का संदेश देता है।’’

उन्होंने सजग करते हुए कहा, ‘‘याद रखिए एक असफलता, भविष्य की असीमित सफलताओं और संभावनाओं की जननी हो सकती है।’’

मुख्यमंत्री ने कहा, ‘‘कोई भी परिणाम जीवन का पहला और अंतिम नहीं होता, बल्कि एक नए आरंभ का अवसर होता है। सोना तपकर ही कुंदन बनता है।’’

योगी ने उदाहरण देते हुए कहा, ‘‘महान आविष्कारक थॉमस अल्वा एडिसन ने बल्ब के आविष्कार के लिए हजारों प्रयोग किए। हर प्रयोग नाकाम रहा, लेकिन उन्होंने प्रयास जारी रखा। आखिरकार मेहनत रंग लाई और उन्होंने बल्ब का आविष्कार कर पूरी दुनिया को आलोकित किया।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विश्व के महान गणितज्ञों में से एक श्रीनिवास रामानुजन सहित कई ऐसी विभूतियां हुई हैं, जिन्होंने बाधाओं और असफलताओं से हार नहीं मानी, बल्कि अपने-अपने क्षेत्र में शिखर पर पहुंचे।’’

मुख्यमंत्री ने अभिभावकों से भी कहा, ‘‘बच्चे देश का भविष्य हैं। यदि वे किसी कारणवश अपेक्षित परिणाम नहीं ला पाए हैं, तो निराश होने के बजाय उनका हौसला बढ़ाएं। उनकी रुचि किस विषय में है, इसे समझने का प्रयास करें।’’

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे अनेक क्षेत्र हैं, जहां करियर निर्माण की अपार संभावनाएं हैं। इन अवसरों को पहचानने में बच्चों की मदद करें और उनकी प्रतिभा को खिलने दें।’’

भाषा आनन्द खारी

खारी


लेखक के बारे में