Bareilly News: निजी मकान में नमाज पढ़ने पर डीएम-एसएसपी ने लगाई थी रोक, अब हाईकोर्ट ने उठाया ये कदम, दोनों अफसरों से मांगा जवाब

Bareilly News: निजी मकान में नमाज पढ़ने पर डीएम-एसएसपी ने लगाई थी रोक, अब हाईकोर्ट ने उठाया ये कदम, दोनों अफसरों से मांगा जवाब

Bareilly News: निजी मकान में नमाज पढ़ने पर डीएम-एसएसपी ने लगाई थी रोक, अब हाईकोर्ट ने उठाया ये कदम, दोनों अफसरों से मांगा जवाब

Bareilly News | Photo Credit: IBC24

Modified Date: February 17, 2026 / 01:35 pm IST
Published Date: February 17, 2026 1:31 pm IST
HIGHLIGHTS
  • इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के डीएम और एसएसपी को अवमानना नोटिस जारी किया
  • कोर्ट ने कहा कि निजी संपत्ति पर धार्मिक प्रार्थना के लिए अनुमति जरूरी नहीं
  • अगली सुनवाई 11 मार्च 2026 को होगी

बरेली: Bareilly News इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बरेली के डीएम रविंद्र कुमार और एसएसपी अनुराग आर्य को अवमानना नोटिस जारी किया है। इन अफसरों पर आरोप है कि उन्होंने मोहम्मदगंज गांव में मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों को निजी घर में सामूहिक नमाज पढ़ने से रोका था।

UP Bareilly News मिली जानकारी के अनुसार, मामला 16 जनवरी का है। दरअसल, यहां मोहम्मदगंज गांव के रेशमा खान के घर मुस्लिम समुदाय के कुछ लोगों ने नमाज पढ़ रहे थे। बताया जा रहा है कि घर के मालिक ने उन्हें अनुमति भी दी थी, लेकिन आसपास के हिंदू परिवार ने इसकी शिकायत की थी, जिसके बाद पुलिस ने इसपर रोक लगा दी थी और कार्रवाई की।

जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक

जिसके बाद याचिकाकर्ता तारिक खान की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति अतुल श्रीधरन और न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने कहा कि हाल ही में पारित एक फैसले में निजी परिसरों में धार्मिक प्रार्थना सभा के लिए पूर्व अनुमति की आवश्यकता नहीं है। साथ ही, याचिकाकर्ता तारिक खान के खिलाफ किसी भी तरह की जबरदस्ती की कार्रवाई पर रोक लगा दी। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि संविधान के अनुच्छेद 25 के तहत धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार में निजी संपत्ति पर प्रार्थना शामिल है, बशर्ते यह सार्वजनिक सड़क या संपत्ति पर न फैले। हाई कोर्ट ने सुनवाई की अगली तारीख 11 मार्च तय की और उनसे जवाब मांगा।

क्या है पूरा मामला?

पूरा मामला 16 जनवरी 2026 का है। जहां कुछ मुसलमानों को एक खाली घर में नमाज पढ़ने के दौरान रोका गया था। हालांकि बाद में उन्हें छोड़ दिया गया। लेकिन घटना ने कानूनी और प्रशासनिक बहस को जन्म दे दिया। घर की मालकिन रेशमा खान ने बताया कि उन्होंने इस सभा की इजाजत दी थी और नमाज सिर्फ उनके निजी परिसर के अंदर ही हो रही थी।

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