उप्र मंत्रिमंडल विस्तार : ‘पीडीए’ की काट और जातीय समीकरण साधने की कोशिश
उप्र मंत्रिमंडल विस्तार : ‘पीडीए’ की काट और जातीय समीकरण साधने की कोशिश
लखनऊ, 10 मई (भाषा) उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ सरकार के मंत्रिमंडल विस्तार में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी प्रमुख प्रतिद्वंद्वी समाजवादी पार्टी (सपा) के ‘पीडीए’ समीकरण की काट करने और अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले अपने जातीय समीकरण मजबूत करने की कोशिश की है।
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने रविवार को ‘जन भवन’ में आयोजित समारोह में छह नए समेत कुल आठ मंत्रियों को शपथ दिलाई।
इनमें मनोज पांडेय ब्राह्मण समुदाय से हैं, जबकि भूपेंद्र चौधरी, हंसराज विश्वकर्मा, सोमेंद्र तोमर, अजीत सिंह पाल और कैलाश राजपूत अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) से आते हैं।
वहीं, कृष्णा पासवान और सुरेंद्र दिलेर दलित समुदाय का प्रतिनिधित्व करते हैं।
गैर-यादव पिछड़ों में जाट, गुर्जर, लोध, गड़रिया और विश्वकर्मा जातियों का खासा प्रभाव माना जाता है।
राजनीतिक दृष्टि से देखें तो मंत्रिमंडल के इस विस्तार में सपा के ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट स्पष्ट रूप से नजर आती है।
सपा पिछले कुछ समय से ‘पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक’ समीकरण को केंद्र में रखकर राजनीति कर रही है।
सपा ने वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में इसी नारे के सहारे अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए 37 सीट पर जीत हासिल की थी।
उस चुनाव में कांग्रेस के नेतृत्व वाले ‘इंडिया’ गठबंधन में सपा भी साझीदार थी और छह सीट कांग्रेस को भी मिली थीं।
इससे पहले पांच मार्च, 2024 को मंत्रिमंडल विस्तार हुआ था।
लोकसभा चुनाव 2024 में उप्र में भाजपा को करारा झटका लगा था, जब सपा-कांग्रेस गठबंधन ने 80 लोकसभा सीट में से 43 पर जीत हासिल की।
राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, भाजपा ने इस मंत्रिमंडल विस्तार में ‘पीडीए’ की तर्ज पर सामाजिक संतुलन साधने की कोशिश की है लेकिन उसके समीकरण में ‘अल्पसंख्यक’ की जगह ‘अगड़ी जाति’, विशेष रूप से ब्राह्मण समुदाय को महत्व दिया गया है।
अयोध्या से सांसद अवधेश प्रसाद ने ‘पीटीआई-भाषा’ से फोन पर बातचीत में कहा, “मैं नए मंत्रियों को बधाई देता हूं लेकिन यह साफ जाहिर है कि सत्तारूढ़ दल, सपा के ‘पीडीए’ दांव से घबरा गया है। यही वजह है कि हमें पूरा यकीन है कि 2027 का साल भाजपा की सत्ता से ‘विदाई’ का साल साबित होगा।”
विश्लेषकों के अनुसार, इस वर्ष की शुरुआत में माघ मेले में स्नान व्यवस्था को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और प्रशासन के बीच विवाद तथा बरेली के उपजिलाधिकारी अलंकार अग्निहोत्री द्वारा ब्राह्मणों के उत्पीड़न का आरोप लगाते हुए इस्तीफा देने के बाद सरकार के खिलाफ जो माहौल बना था, उसकी भरपाई के लिए ब्राह्मण नेता और सपा से निष्कासित विधायक मनोज पांडेय को मंत्रिमंडल में शामिल किया गया है।
पांडेय का ब्राह्मण समाज में अच्छा प्रभाव माना जाता है।
खास बात यह भी है कि मनोज पांडेय का विधानसभा क्षेत्र ऊंचाहार लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के संसदीय क्षेत्र रायबरेली के पांच विधानसभा क्षेत्रों में से एक है।
इस विस्तार से पीडीए की काट के साथ ही भाजपा ने अखिलेश और राहुल गांधी दोनों को ही घेरने की कोशिश की है।
मंत्रिमंडल में शामिल कृष्णा पासवान फतेहपुर जिले की खागा सीट से विधायक हैं, जबकि सुरेंद्र दिलेर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले की खैर सीट का प्रतिनिधित्व करते हैं।
मनोज पांडेय रायबरेली जिले की ऊंचाहार सीट से विधायक हैं।
विधान परिषद सदस्य हंसराज विश्वकर्मा वाराणसी से भाजपा के जिलाध्यक्ष हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी को भी मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मिला है।
राजनीतिक प्रेक्षकों के अनुसार, सपा प्रमुख अखिलेश यादव के संसदीय क्षेत्र कन्नौज के अंतर्गत आने वाली तिर्वा सीट से भाजपा विधायक कैलाश राजपूत को मंत्री बनाकर पार्टी ने लोध बिरादरी में अपनी पकड़ मजबूत करने और क्षेत्रीय समीकरण साधने की कोशिश की है।
सरकार ने राज्य मंत्री अजीत सिंह पाल को स्वतंत्र प्रभार देकर अति पिछड़ी गड़रिया जाति में भी अपने समीकरण मजबूत करने का प्रयास किया है।
सपा के प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल भी इसी बिरादरी से आते हैं और पार्टी में सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति की बात करें तो पिछली बार गुर्जर समाज से आने वाले सोमेंद्र तोमर को केवल राज्य मंत्री बनाया गया था, जबकि उनसे पहले गुर्जर समाज के ही अशोक कटारिया स्वतंत्र प्रभार राज्य मंत्री थे। इसे लेकर गुर्जर समाज में कुछ असंतोष की चर्चा थी।
इसके अलावा, लोनी के विधायक नंद किशोर गुर्जर पिछले तीन वर्षों से विभिन्न मुद्दों पर अपनी ही सरकार और प्रशासनिक तंत्र को घेरते रहे हैं।
ऐसे में सोमेंद्र तोमर का ओहदा बढ़ाकर भाजपा ने एक ओर असंतोष कम करने जबकि दूसरी ओर पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रभावशाली जाट और गुर्जर जातियों को संतुलित संदेश देने की कोशिश की है।
मंत्रिमंडल विस्तार में कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेने वाले भूपेंद्र चौधरी जाट समाज के प्रमुख नेताओं में माने जाते हैं।
वह पहले भी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और कैबिनेट मंत्री रह चुके हैं।
कैलाश राजपूत को राज्य मंत्री बनाए जाने को लोध मतदाताओं में भाजपा की पकड़ और मजबूत करने की रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
राजपूत को पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह का करीबी माना जाता रहा है और लोध समाज में उनकी अच्छी पकड़ बताई जाती है।
हंसराज विश्वकर्मा को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाना विश्वकर्मा समाज को पार्टी से और मजबूती से जोड़ने की कोशिश माना जा रहा है। इसे गाजीपुर में विश्वकर्मा समाज की एक युवती की हत्या के मामले में सपा प्रमुख अखिलेश यादव और उनकी पार्टी की सक्रियता की राजनीतिक काट के रूप में भी देखा जा रहा है।
गाजीपुर की घटना को लेकर अखिलेश यादव सरकार पर लगातार हमलावर रहे थे।
सपा नेता राम आसरे विश्वकर्मा पीड़ित परिवार से मिलने गए थे, लेकिन उनके प्रतिनिधिमंडल पर पथराव हुआ था, जिसे सपा बड़ा मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही थी।
हालांकि, हंसराज विश्वकर्मा ने सरकार के प्रतिनिधि के तौर पर पीड़ित परिवार से मिलकर सक्रिय भूमिका निभाई थी। बाद में पुलिस की कार्रवाई के बाद यह मामला शांत पड़ गया।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले वर्ष फरवरी-मार्च में संभावित हैं लेकिन इसकी राजनीतिक हलचल अभी से शुरू होने के आसार हैं।
ऐसे में सरकार ने मंत्रिमंडल विस्तार के जरिए विभिन्न जातीय और क्षेत्रीय समीकरणों को साधने का प्रयास किया है।
भाषा सलीम आनन्द जितेंद्र
जितेंद्र

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