उप्र: अदालत ने बहराइच में दर्ज प्राथमिकी में मौजूद विसंगतियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा
उप्र: अदालत ने बहराइच में दर्ज प्राथमिकी में मौजूद विसंगतियों के बारे में स्पष्टीकरण मांगा
लखनऊ, 21 फरवरी (भाषा) इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ पीठ ने बहराइच के पुलिस अधीक्षक से गोहत्या मामले में जिला पुलिस द्वारा दर्ज प्राथमिकी में मौजूद विसंगतियों पर स्पष्टीकरण मांगा है।
इस बीच, याचिकाकर्ता को गिरफ्तारी से राहत देते हुए पीठ ने कहा कि यदि पुलिस अधीक्षक अपना व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल नहीं करते हैं तो उन्हें मामले के पूरे रिकॉर्ड के साथ अदालत में उपस्थित होना होगा।
पीठ ने अगली सुनवाई की तारीख 16 मार्च तय की है।
न्यायमूर्ति अब्दुल मोइन और न्यायमूर्ति पी.के. श्रीवास्तव की पीठ ने अकबर अली की ओर से दायर उस रिट याचिका पर 16 फरवरी को यह आदेश पारित किया जिसमें उन्होंने 22 जनवरी 2026 को जरवल रोड थाने में दर्ज प्राथमिकी को चुनौती दी थी।
पुलिस दल ने गोहत्या और हत्या के प्रयास के आरोप में तीन लोगों को गिरफ्तार किया था। तीनों को मौके पर ही पकड़ा गया था, जबकि चौथा व्यक्ति घटनास्थल से फरार हो गया था। बाद में इन व्यक्तियों ने पूछताछ में याचिकाकर्ता का नाम भी लिया।
प्राथमिकी की जांच करते हुए पीठ ने पाया कि घटना का समय सुबह 10 बजकर 45 मिनट बताया गया, जबकि पुलिस के मौके पर पहुंचने पर आरोपियों को यह कहते हुए सुना गया कि उन्हें भाग जाना चाहिए क्योंकि ‘‘सुबह होने वाली है।’’
पीठ ने इस पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि सुबह 10 बजकर 45 मिनट पर ‘‘भोर’’ कैसे हो सकती है।
पीठ ने प्राथमिकी में दर्ज कुछ सामान्य टिप्पणियों पर भी ध्यान दिया और कहा कि वे किसी फिल्म की पटकथा जैसी लगती हैं।
प्राथमिकी दर्ज करने के तरीके पर नाराजगी जताते हुए पीठ ने टिप्पणी की, ‘‘इस न्यायालय ने बार-बार कहा है कि मामलों में प्रयुक्त भाषा जमीनी स्थिति को प्रतिबिंबित नहीं करती, बल्कि सुनी-सुनाई बातों पर आधारित, मनगढ़ंत और फिल्मी पटकथाओं से प्रेरित प्रतीत होती है तथा अतिरंजित है।’’
पीठ ने कहा, ‘‘अब समय आ गया है कि न्यायालय हस्तक्षेप करे और अधिकारियों द्वारा दर्ज की जा रही ऐसी मनगढ़ंत और अतिरंजित प्राथमिकी पर रोक लगाए, जिसका यह मामला स्पष्ट उदाहरण है।’’
भाषा सं आनन्द खारी
खारी

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