उप्र सरकार का एक लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा ‘चुनावी चाल’ जैसा लग रहा: मायावती

उप्र सरकार का एक लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा 'चुनावी चाल' जैसा लग रहा: मायावती

उप्र सरकार का एक लाख युवाओं को नौकरी देने का वादा ‘चुनावी चाल’ जैसा लग रहा: मायावती
Modified Date: August 27, 2026 / 02:44 pm IST
Published Date: August 27, 2026 2:44 pm IST

लखनऊ, 27 अगस्त (भाषा) बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अध्यक्ष मायावती ने अगले छह महीनों में एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने के उत्तर प्रदेश सरकार के वादे पर तंज करते हुए बृहस्पतिवार को कहा कि यह कदम राज्य के विधानसभा चुनाव से पहले चली गयी ‘चुनावी चाल’ जैसा लग रहा है।

मायावती ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर अपनी एक पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अगले छह महीनों में यानी विधानसभा आमचुनाव तक एक लाख युवाओं को सरकारी नौकरी देने की घोषणा देर से उठाया गया सही पर चुनावी कदम ज्यादा लगता है।

उन्होंने कहा, ‘‘ये नियुक्तियां पेपरलीक तथा भ्रष्टाचार आदि के अभिशाप से मुक्त रहते हुए समय से पूरी हो जायें तो ठीक रहेगा ताकि यह चुनावी छलावा ना साबित हो। इसके साथ ही अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के आरक्षित पदों के बैकलॉग पर भर्तियों के बारे में भी सरकारी घोषणा की लोगों को उत्सुकता से प्रतीक्षा है।’’

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गत मंगलवार को लखनऊ में एक नियुक्ति पत्र वितरण कार्यक्रम में अगले छह माह में एक लाख युवाओं को नौकरी देने का ऐलान किया था।

बसपा प्रमुख ने 69 हजार शिक्षकों की भर्ती में आरक्षण के नियमों को लेकर 6800 अभ्यर्थियों द्वारा पिछले कई सालों से किये जा रहे आन्दोलन का जिक्र करते हुए कहा कि सरकार को उनके बारे में भी सहानुभूतिपूर्वक सोचना चाहिये।

उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि शायद ‘जेन-जी’ और ‘जेन-अल्फा’ के दबाव में उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में स्कूली शिक्षा की बदहाल व्यवस्था में सुधार की जो थोड़ी अनचाही हलचल सरकारी स्तर पर देखने को मिल रही है वह मामूली ही सही मगर स्कूली शिक्षा में सुधार करने की सही नीयत से हो तो उचित होगा।

मायावती ने पोस्ट में कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा बुजुर्ग महिलाओं के लिए बसों में नि:शुल्क यात्रा की व्यवस्था करने से कहीं ज्यादा जरूरी महिलाओं को हर क्षेत्र में शोषण, अत्याचार, उत्पीड़न आदि से बचाना है। उन्होंने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और आत्मनिर्भरता की दिशा में भी सरकारों को सही नीयत और नीति के साथ कार्य करने की जरूरत है।

भाषा सलीम मनीषा संतोष

संतोष


लेखक के बारे में