उप्र : अस्पताल प्रशासन ने ‘पद्मश्री’ डॉक्टर लहरी के मारपीट के आरोप को ‘तथ्यहीन’ बताया

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उप्र : अस्पताल प्रशासन ने 'पद्मश्री' डॉक्टर लहरी के मारपीट के आरोप को 'तथ्यहीन' बताया

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  • Publish Date - September 7, 2026 / 03:12 PM IST,
    Updated On - September 7, 2026 / 03:12 PM IST

वाराणसी (उप्र), सात सितंबर (भाषा) वाराणसी में काशी हिन्दू विश्वविद्यालय के सर सुंदरलाल अस्पताल (एसएसएल) ने सुपर स्पेशियलिटी वार्ड में भर्ती ‘इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज-बीएचयू’ के एमेरिटस प्रोफेसर और ‘पद्मश्री’ से सम्मानित डॉक्टर टी.के. लहरी के साथ एक डॉक्टर द्वारा मारपीट किए जाने के आरोप को तथ्यहीन बताया है।

काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के एक प्रवक्ता द्वारा सोमवार को यहां जारी एक बयान के मुताबिक एसएसएल के चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर पुनीत कुमार ने 85 वर्षीय डॉक्टर लहरी के साथ किसी भी प्रकार की मारपीट और दुर्व्यवहार को ‘तथ्यहीन’ बताया है।

बयान के मुताबिक वैसे, मामले की विस्तृत जांच के लिये एक समिति गठित की गयी है जिसने अपना काम शुरू कर दिया है।

अस्पताल में एक अधिकारी ने बताया कि अस्पताल प्रशासन को प्रोफेसर लाहिड़ी के परिजन से ईमेल के जरिए एक शिकायत मिली थी जिसमें आरोप लगाया गया है कि एक एसोसिएट प्रोफेसर डॉक्टर ने उनके साथ बदसलूकी की और उन्हें थप्पड़ मारा, जिससे उनके चेहरे पर चोट आई है।

उन्होंने बताया, ‘‘प्रोफेसर लाहिड़ी के परिवार वालों से ईमेल के जरिये शिकायत मिली थी। मामले की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया गया है और इसकी रिपोर्ट जल्द ही सौंपी जाएगी।’’

बयान के मुताबिक डॉक्टर लहरी के साथ कथित दुर्व्यवहार के बारे में बीएचयू के कुलपति प्रोफसर अजीत कुमार चतुर्वेदी, आईएमएस निदेशक प्रोफसर एस. एन. शंखवार और चिकित्सा अधीक्षक डॉक्टर पुनीत कुमार को ई-मेल प्राप्त हुआ था, जिसके बाद शंखवार और कुमार उनसे मुलाकात के लिये वार्ड पहुंचे थे।

प्रवक्ता ने बयान में बताया कि चिकित्सा अधीक्षक ने गत तीन सितंबर को विशेषज्ञ चिकित्सकों को डॉक्टर लहरी की स्वास्थ्य जांच का आदेश जारी किया था जिनकी रिपोर्ट के अनुसार लहरी को हृदय रोग और तपेदिक टीबी जैसी शारीरिक बीमारियों के साथ-साथ वृद्धावस्था के चलते ‘सिनाइल डिमेंशिया’ और व्यवहार परिवर्तन जैसी मानसिक रोग भी हैं।

बयान के मुताबिक डॉक्टर लहरी उम्र जनित शारीरिक और मानसिक बीमारियों के चलते अपने उपचार और नित्यकर्म तथा साफ-सफाई को लेकर भी आनाकानी करते हैं तथा अस्पतालकर्मियों को अक्सर उनकी देखभाल में मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

बयान के अनुसार डॉक्टर लहरी इसी साल 27 जनवरी को छाती की कुछ समस्याओं को लेकर सर सुन्दर लाल अस्पताल में भर्ती हुए थे, जिसके बाद से अस्पताल के चिकित्साधिकारी और कर्मचारी निरंतर उनका ध्यान रख रहे हैं।

बयान के मुताबिक बीएचयू प्रशासन ने डॉक्टर लहरी के परिजनों से भी उनके स्वास्थ्य को लेकर संपर्क करने की कोशिश की, मगर कोई भी परिजन उनकी देखभाल के लिये अभी तक नहीं आया है।

आरोप है कि सर सुंदरलाल अस्पताल में इलाज करा रहे लाहिड़ी के साथ एक एसोसिएट प्रोफेसर ने बदसलूकी की और उन्हें थप्पड़ मारा था।

इस घटना के बाद अधिकारियों ने आरोपों की जांच के लिए एक मेडिकल बोर्ड का गठन किया है।

अस्पताल के एक अधिकारी ने बताया कि ‘डॉक्टर गॉड’ के नाम से मशहूर प्रोफेसर लाहिड़ी पिछले कुछ महीनों से अस्पताल के ‘कार्डियोथोरेसिक’ विभाग में अपना इलाज करा रहे हैं।

प्रोफेसर लाहिड़ी 2003 में बीएचयू के ‘इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज’ से सेवानिवृत्त हुए थे मगर सेवानिवृत्ति के बाद भी वह मरीजों को मुफ्त चिकित्सीय सलाह देते रहे।

समाज सेवा के कार्यों के लिए मशहूर प्रोफेसर लाहिड़ी ने अपनी पेंशन का एक बड़ा हिस्सा भी दान किया है। समाज और चिकित्सा के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें 2006 में पद्मश्री से सम्मानित किया गया था।

भाषा सं. सलीम मनीषा राजकुमार

राजकुमार