उप्र: बलिया में ‘महारोट’ पूजन कार्यक्रम सुरक्षा बंदोबस्त के बीच शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न
उप्र: बलिया में ‘महारोट’ पूजन कार्यक्रम सुरक्षा बंदोबस्त के बीच शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न
बलिया, 20 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में लोक पर्व ‘महारोट’ पूजन का कार्यक्रम सोमवार को व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने बताया कि रसड़ा क्षेत्र के नागपुर गांव में मनाया जाने वाला यह पर्व सिद्ध संत श्री अमरनाथ और समकालीन सूफी संतों के प्रति समान सम्मान तथा साम्प्रदायिक सद्भाव, श्रद्धा व भक्ति का प्रतीक है।
इस आयोजन की विशेषता यह है कि इसमें सबसे पहले सिद्ध संत श्री अमरनाथ बाबा के समकालीन और मित्र माने जाने वाले सूफी संत रोशन शाह की मजार पर ‘प्रसाद’ और चादर चढ़ाई जाती है, जिसके बाद उनकी (अमरनाथ बाबा) की पूजा की जाती है।
स्थानीय निवासी और सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य रवीन्द्र सिंह ने बताया कि इस परंपरा के तहत सबसे पहले रसड़ा स्थित सूफी संत रोशन शाह की मजार पर रोट (मीठी रोटी का व्यंजन) का ‘प्रसाद’ व चादर चढ़ाई जाती है और इसके बाद ही अमरनाथ बाबा की पूजा की जाती है।
उन्होंने बताया कि रोशन शाह और अमरनाथ बाबा समकालीन थे तथा दोनों के बीच मित्रवत संबंध थे।
कार्यक्रम में पहुंचे उत्तर प्रदेश के परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा कि श्रीनाथ बाबा महारोट पूजन समारोह साम्प्रदायिक सद्भाव का अनुपम उदाहरण है, जिसमें सिद्ध संत श्रीनाथ बाबा के साथ-साथ उनके समकालीन सूफी संत रोशन शाह का भी सम्मानपूर्वक स्मरण और पूजन किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस आयोजन में रसड़ा क्षेत्र के 14 कोस के दायरे के हजारों सेंगर वंशीय श्रद्धालुओं के अलावा गाजीपुर, मऊ और बिहार से भी बड़ी संख्या में लोग शामिल होते हैं।
सिंह ने बताया कि यह आयोजन प्रतिवर्ष होता है, जबकि ‘महारोट’ पूजन का विशेष आयोजन 12 वर्ष में एक बार किया जाता है।
उन्होंने बताया कि इस वर्ष 551 क्विंटल ‘महारोट’ तैयार किया गया, जिसे प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया गया।
स्थानीय लोगों के अनुसार, श्री अमरनाथ बाबा सेंगर समुदाय के कुलगुरु माने जाते हैं।
सोमवार सुबह से ही गाजे-बाजे के साथ श्रद्धालुओं का जत्था नागपुर गांव पहुंचने लगा और पूरा क्षेत्र बाबा अमरनाथ के जयघोष से गूंज उठा।
स्थानीय निवासी प्रियांशु सिंह ने बताया कि श्रद्धालु बाबा के मठ की पांच बार परिक्रमा करने के बाद मंदिर के सामने लाठियां फटकारकर शौर्य का प्रदर्शन करते हैं। गांव के निवासी विनोद सिंह ने बताया कि यह आयोजन अब एक पारंपरिक उत्सव का रूप ले चुका है और इसका आयोजन बारी-बारी से रसड़ा, महारापुर, खेजुरी, पटना, टिकादेवरी और नगपुरा समेत विभिन्न स्थानों पर किया जाता है।
रसड़ा कोतवाली प्रभारी योगेंद्र बहादुर सिंह ने बताया कि कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने हिस्सा लिया और व्यापक सुरक्षा व्यवस्था के बीच यह आयोजन सकुशल संपन्न हुआ।
भाषा सं. सलीम जितेंद्र
जितेंद्र

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