वाराणसी,14 जनवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के वाराणसी में मणिकर्णिका घाट पर पुनर्विकास योजना के तहत जारी अतिक्रमण हटाओ अभियान को लेकर विवाद खड़ा हो गया और कुछ स्थानीय लोगों ने विरास्त स्थल से छेड़छाड़ का आरोप लगाया।
पाल समाज समिति के सदस्य महेन्द्र पाल ने अन्य सदस्यों व स्थानीय नागरिकों के साथ मंगलवार दोपहर प्रदर्शन किया।
पाल ने बताया कि विकास के नाम पर मणिकर्णिका घाट के मूल स्वरूप के साथ छेड़छाड़ की जा रही है, धरोहर को खत्म किया जा रहा है और विरासत को नष्ट किया जा रहा है ।
वहीं प्रशासन ने महेंद्र पाल के आरोपों को खारिज करते हुए बताया कि मणिकर्णिका घाट पर किसी भी मंदिर को ना तो तोड़ा गया और ना ही नुक्सान पहुंचाया गया।
उपजिलाधिकारी आलोक वर्मा ने बताया कि जारी कार्यों को लेकर कुछ गलतफहमी लग रही है इसलिए वह हालात का जायजा लेने यहां पहुंचे हैं।
उन्होंने बताया, “हमें शक है कि इसमें कुछ बाहरी लोग शामिल हैं। मामले की जांच के लिये पुलिस भी मौजूद हैं। घाट और उसके आसपास रहने वाले लोग विरोध नहीं कर रहे हैं। सब कुछ उनके सामने हो रहा है।”
जिलाधिकारी सतेंद्र कुमार ने बताया कि मणिकर्णिका घाट पर विकास कार्य जारी हैं और इससे किसी मंदिर को नुक्सान नहीं पहुंचा है।
उन्होंने बताया कि पहले चरण में सीढ़ियां बनायी जा रही है और खुदाई के दौरान कुछ मूर्तियां व कलाकृतियां मिली हैं, जिन्हें संरक्षित कराया गया है।
अधिकारी ने बताया कि घाट पर निर्माण कार्य पूरा होने के बाद मूर्तियां लगवाई जाएंगी।
भाषा सं जफर जितेंद्र
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