उप्र:सत्ता पक्ष ने नारी सशक्तीकरण में विपक्ष को बताया बाधक, विपक्ष ने किया पलटवार

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उप्र:सत्ता पक्ष ने नारी सशक्तीकरण में विपक्ष को बताया बाधक, विपक्ष ने किया पलटवार

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  • Publish Date - April 30, 2026 / 10:29 PM IST,
    Updated On - April 30, 2026 / 10:29 PM IST

लखनऊ, 30 अप्रैल (भाषा) उत्तर प्रदेश विधानसभा में बृहस्पतिवार को ‘नारी सशक्तीकरण’ विषय पर बुलाए गए एक दिवसीय विशेष सत्र में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक हुई।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नीत राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस को महिलाओं के राजनीतिक विकास में बाधक बताया, वहीं विपक्ष ने पलटवार करते हुए कहा कि सरकार में जरा भी नैतिकता बची है तो मौजूदा स्थिति में ही महिला आरक्षण लागू करे।

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के सदस्यों ने सड़क से सदन तक प्रदर्शन और नारेबाजी कर माहौल गरमा दिया। सदन में प्रस्ताव रखते हुए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। जवाब में नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय ने सरकार की मंशा पर सवाल उठाए।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘पंचायती राज में जब 33 प्रतिशत आरक्षण की बात आई थी, तब भाजपा ने विरोध किया था। विश्वनाथ प्रताप सिंह सरकार ने जब मंडल आयोग की सिफारिशें लागू कीं, तो भाजपा ने सरकार गिरा दी थी।’’

दरअसल, यह विशेष सत्र 2029 के संसदीय चुनाव से पहले महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण लागू करने वाले संविधान संशोधन विधेयक के 17 अप्रैल को लोकसभा में पारित न होने के बाद बुलाया गया था। भाजपा-नीत राजग ने इसके लिए सपा, कांग्रेस समेत विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ को जिम्मेदार ठहराया। जबकि विपक्ष ने दलील दी कि वह महिला आरक्षण का समर्थक है और सरकार चाहे तो 2011 की जनगणना के आधार पर 525 सदस्यों की मौजूदा स्थिति में ही आरक्षण लागू कर सकती है।

उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि देश में महिलाओं के बलिदान का इतिहास रहा है। उन्होंने रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होल्कर से लेकर कल्पना चावला तक का जिक्र किया।

उन्होंने कहा, ‘‘महिला लोकतंत्र की आधारशिला है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डबल इंजन सरकार महिला सशक्तीकरण के लिए कई योजनाएं चला रही है। हर क्षेत्र में महिलाएं अग्रणी भूमिका निभा रही हैं।’’

उन्होंने नेता प्रतिपक्ष से सकारात्मक कदम उठाने का आह्वान किया।

भाजपा विधायक मंजू सिवाच ने कहा, ‘‘संविधान के अनुरूप महिलाओं को अधिकार नहीं मिल सका। कोई शुभ कार्य मन में आए तो जल्दी कर लेना चाहिए।’’

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘विपक्ष हमेशा गलत बयान देता है। महिलाओं के प्रति इनका नजरिया ठीक नहीं। ये कलाकार को नाचने वाली कहकर अपमानित करते हैं।’’

कांग्रेस विधानमंडल दल की नेता आराधना मिश्रा ‘मोना’ ने सत्ता पक्ष की आलोचना करते हुए कहा, ‘‘विशेष सत्र को समय की जंजीरों में बांध दिया गया है।’’

उन्होंने कहा कि 1928 में मोतीलाल नेहरू ने महिलाओं को पुरुषों के बराबर मौलिक अधिकार देने की बात कही थी। 1931 के कराची अधिवेशन का भी उल्लेख किया।

उन्होंने कहा, ‘‘आजादी के बाद महिलाओं को अधिकार मिले। राजीव गांधी सरकार में वोट देने की उम्र 18 वर्ष की गई। पंचायत में 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रस्ताव लाए तो भाजपा ने विरोध किया। नरसिंह राव सरकार में कांग्रेस ने पंचायतों-निकायों में 33 प्रतिशत महिलाओं को आरक्षण दिया।’’

सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर ने कहा, ‘‘यह विशेष सत्र भाजपा का राजनीतिक षड्यंत्र ज्यादा लगता है, महिला अधिकारों पर वास्तविक चर्चा नहीं। अगर वाकई भाजपा को चिंता होती तो 2023 में पारित विधेयक का संशोधन आधी रात को ढाई साल बाद नहीं लाया जाता।’’

वहीं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश कुमार खन्‍ना ने कहा कि ”जबसे मोदी ने प्रधानमंत्री और योगी ने मुख्‍यमंत्री पद की कमान संभाली तबसे सबसे ज्‍यादा कार्य इसी महिला सशक्तीकरण के लिए किया गया है।

उन्‍होंने कहा कि ”परिवारों में यह भाव आया कि अब कन्‍या हमारे लिए बोझ नहीं होगी।”

खन्‍ना ने महिलाओं के लिए संचालित योजनाएं भी गिनाई।

समाज कल्‍याण राज्‍य मंत्री (स्‍वतंत्र प्रभार) असीम अरुण ने समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना चाहते हुए कहा कि आरक्षण का आधार केवल धर्म आधारित नहीं शैक्षणिक और सामाजिक भी होना चाहिए।

भाजपा के सहयोगी दल निषाद पार्टी के अध्यक्ष और उप्र सरकार में मत्स्य मंत्री संजय निषाद ने कहा कि ”यह भीख नहीं महिलाओं का अधिकार है।”

उन्होंने आरोप लगाया की सपा ने महिलओं को अपनी सरकार में पढ़ने से रोका था। उन्होंने कहा कि मुगलों से और अंग्रेजों से लड़ने में आधी आबादी का योगदान है और उन्‍हें नीति निर्धारण में भी पर्याप्‍त अधिकार मिलना चाहिए।

राज्य मंत्री विजयलक्ष्मी गौतम ने कहा कि महिलाएं पुरुषों से कंधा मिलाकर आगे बढ़ रही हैं। देश के प्रधानमंत्री मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी ने ऐसा माहौल बनाया है कि महिलाएं बारह बजे रात को भी काम करती हैं और उन्हें डर नहीं लगता है।

अपना दल (एस) के नेता और उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री आशीष पटेल ने कहा, ‘‘ सभी धर्म में महिला और पुरुष को समान अधिकार दिया गया है। मतलब ईश्वर की नजर में सभी सामान है। सदन में जब महिलाओं के आज के लिए संशोधन विधेयक पेश किया गया तो 2023 में समर्थन देने वाले साथी रोड़ा बन गए।’’

उप्र सरकार में मंत्री रजनी तिवारी ने विपक्षी दलों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि ”महिलाओं की सामर्थ्य सिर्फ घर में चौकी चूल्हे तक सीमित नहीं है, महिलाएं देश की दिशा बदल सकती है, प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने यह करके दिखाया है।

सपा सदस्य अतुल प्रधान ने उप्र सरकार के पंचायती राज मंत्री और सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी के अध्‍यक्ष ओम प्रकाश राजभर के खिलाफ तीखे बयान दिए।

प्रधान की बातों को सदन की कार्यवाही से पीठ ने निकालने का आदेश दिया। सपा सदस्य पिंकी यादव ने सरकार की नीयत और मंशा पर संदेह जताया।

उप्र सरकार की महिला एवं बाल विकास पुष्टाहार मंत्री बेबी रानी मौर्य ने कहा कि पंचायत से लेकर संसद तक जब भी महिलाओं को जिम्मेदारी मिलती तो वह बेहतर कार्य करती है।

सपा सदस्य नसीम सोलंकी ने कहा कि जब चुनाव आता है तब भारतीय जनता पार्टी राजनीति करती है, यह राजनीति बंद करे।

वहीं भाजपा विधायक अंजुला माहौर ने कहा, ‘‘ आरक्षण केवल अवसर देता है, सफलता तो मेहनत पर निर्भर करती है। आज मुझे क्रोध बहुत है आज मुझे आक्रोश बहुत है। जब नारी सशक्त होगी तभी राष्ट्र सशक्त होगा।’’

सुभासपा अध्‍यक्ष व पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने कहा कि प्रधानमंत्री ने 10 रुपये की झालमुरी खरीद ली (मोदी ने कोलकाता में चुनाव प्रचार के दौरान झालमुरी खरीदी थी) तो पूरे विपक्ष को बेहोशी आ गई।

राजभर ने कहा कि वह अगर झालमुरी खा रहे हैं तो आपको क्या पीड़ा है।

भाजपा सदस्य केतकी सिंह ने 17 अप्रैल को काला दिन के रूप में याद किया। सपा विधायक फरीद महफूज किदवई ने कहा कि ”आज आप आरक्षण लागू करें हम आपके साथ खड़े हैं, लेकिन आपका मतलब आरक्षण लागू नहीं करना, परिसीमन लागू करना है और हम किसी भी हाल में परिसीमन लागू नहीं होने देंगे।” जनसत्ता दल (लोकतांत्रिक) के अध्‍यक्ष रघुराज प्रताप सिंह ”राजा भैया” ने भी प्रभावशाली ढंग से अपनी बातें रखीं।

भाषा आनन्द शोभना

शोभना