UP Work From Home: अब हफ्ते में इतने दिन घर से काम करेंगे सरकारी कर्मचारी, अलग-अलग शिफ्ट में भी खुलेंगे दफ्तर, जानिए किस वजह से लिया गया ये फैसला

UP Work From Home: अब हफ्ते में इतने दिन घर से काम करेंगे सरकारी कर्मचारी, अलग-अलग शिफ्ट में भी खुलेंगे दफ्तर, जानिए किस वजह से लिया गया ये फैसला

UP Work From Home: अब हफ्ते में इतने दिन घर से काम करेंगे सरकारी कर्मचारी, अलग-अलग शिफ्ट में भी खुलेंगे दफ्तर, जानिए किस वजह से लिया गया ये फैसला

UP Work From Home | Photo Credit: Ai

Modified Date: May 18, 2026 / 07:13 am IST
Published Date: May 18, 2026 7:12 am IST
HIGHLIGHTS
  • सरकारी कर्मचारियों को हफ्ते में दो दिन घर से काम करने की अनुमति
  • भीड़ कम करने के लिए अलग-अलग शिफ्ट में दफ्तर खोलने का फैसला
  • कर्मचारियों को सार्वजनिक परिवहन का अधिक उपयोग करने के निर्देश

नई दिल्ली। UP Work From Home प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईंधन बचत की अपील का असर अब पूरे देश में देखा जा रहा है। कई राज्यों में सीएम और मंत्रियों ने अपने काफिले की वाहनों में कटौती कर दी है। इस बीच अब उत्तर प्रदेश सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने वर्क फ्रॉम होम (Work from Home) लागू कर दिया है। यहां के सरकारी दफ्तरों के कर्मचारी अब हफ्ते में दो दिन घर से ही काम करेंगे।

हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम

दरअससल, उत्तर प्रदेश के श्रम विभाग ने रविवार को अहम बैठक की। बैठक में श्रम विभाग ने हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम (Two Days Work From Home) की व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही अलग-अलग शिफ्ट में दफ्तर खोलने का फैसला भी लिया गया है। इस बैठक में हफ्ते में दो दिन वर्क फ्रॉम होम का फैसला प्रदेश के बड़े संस्थानों में लागू होगा। यह फैसला औद्योगिक इकाइयों में भी लागू होगा।

इस संबंध में श्रम विभाग ने गाइडलाइन जारी की है। इसके तहत, अलग-अलग शिफ्ट में ऑफिस खोलने पर जोर दिया गया है। साथ ही पब्लिक ट्रांसपोर्ट का इस्तेमाल बढ़ाने पर भी जोर दिया गया है।

ईंधन की बचत के लिए CM योगी ने दिए निर्देश

दरअसल, प्रदेश में बढ़ती लागत और गैस की कमी के चलते कई उद्योगों पर संकट गहराने लगा है। जिसको लेकर उत्तर प्रदेश सरकार ने पिछले हफ्ते कैबिनेट बैठक (Cabinet Meeting) में ईंधन बचत (Fuel Conservation) अभियान के तहत कई निर्देश हैं। इनमें सरकारी वाहनों के बेड़े में 50 प्रतिशत की कमी, मंत्रियों और नौकरशाहों द्वारा सार्वजनिक परिवहन (Public Transportation) का अधिक उपयोग, वर्चुअल मीटिंग्स को बढ़ावा, कारपूलिंग, साइकिलिंग और इलेक्ट्रिक वाहनों को प्रोत्साहन शामिल है।

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