उप्र: लखनऊ अग्निकांड में बचें आसिफ ने कहा,‘अंदर दम घुटने से मरता या कूदकर बचने की कोशिश करता’
उप्र: लखनऊ अग्निकांड में बचें आसिफ ने कहा,‘अंदर दम घुटने से मरता या कूदकर बचने की कोशिश करता’
लखनऊ, 23 जून (भाषा) उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में एक व्यावसायिक इमारत में लगी आग में बाल-बाल बचे आसिफ ने बताया कि उनके पास केवल दो विकल्प थे, ‘या तो अंदर दम घुटने से जान गंवा दें या इमारत से कूदकर बचने की कोशिश करें’।
इस हादसे में 15 लोगों की मौत हो गयी।
इमारत की दूसरी मंजिल पर स्थित एनिमेशन सेंटर में काम करने वाले आसिफ आग से बचने के लिए लपटों से घिरी इमारत से कूद गए।
उनका इलाज जारी है और दोनों हाथ सहित शरीर के कई हिस्सों पर जलने के निशान हैं।
आसिफ ने एक टीवी चैनल को बताया कि सोमवार अपराह्न करीब दो बजे वह और अन्य कर्मचारी भोजन कर रहे थे कि तभी उन्हें बताया गया कि इमारत में कुछ समस्या है और सभी लोग बाहर निकल जाएं।
उन्होंने कहा, ‘‘हमें आग लगने की जानकारी नहीं दी गई। लगा कि शायद मामूली शॉर्ट सर्किट होगा, क्योंकि पहले भी ऐसा हो चुका था।’’
आसिफ ने बताया कि उन्होंने बायोमेट्रिक लॉक के जरिए बाहर निकलने की कोशिश की लेकिन बिजली चले जाने के कारण सिस्टम काम नहीं कर रहा था।
उन्होंने बताया कि इसे खोलने में कुछ समय लगा और तब तक धुआं फैलने लगा था।
पीड़ित ने बताया कि सीढ़ियों की ओर जाने पर वहां भी घना धुआं था और दूसरी ओर जाने पर भी स्थिति ऐसी ही थी।
उन्होंने कहा, ‘‘कुछ ही मिनटों में हालात बिगड़ गए। पास खड़े लोग एक-दूसरे को भी नहीं देख पा रहे थे। मैंने डेस्क उठाकर कांच की खिड़की तोड़ने की कोशिश की। सांस लेने के लिए गीले तौलिए से चेहरा ढका। कांच तोड़ने पर बाहर लपटें दिखाई दीं और नीचे मौजूद लोग कूदने के लिए कह रहे थे।’’
आसिफ ने बताया कि बाहर निकलने का कोई रास्ता नहीं बचा था इसलिए उन्होंने सामने से कूदने का फैसला किया।
उन्होंने बताया, ‘‘सामने बिजली का तार दिख रहा था। पता नहीं था कि उसमें करंट है या नहीं लेकिन कूदना ही एकमात्र विकल्प था क्योंकि अंदर रहना धुएं से मौत के बराबर था।’’
आसिफ ने बताया कि गर्मी के कारण तार पिघल रहा था और गिरने से उन्हें चोटें आईं।
उन्होंने बताया कि उनके बाद चार-पांच अन्य लोग भी नीचे कूदे और तब तक आग व धुआं दूसरी मंजिल तक फैल चुका था।
आसिफ ने दावा किया कि मंजिलों को जोड़ने वाली सीढ़ियां चिमनी की तरह काम कर रही थीं, जिससे धुआं और लपटें तेजी से ऊपर पहुंचीं।
उन्होंने कहा कि छत पर जाने का रास्ता भी बंद था और अगर निकास खुला होता तो कई लोगों की जान बच सकती थी।
पीड़ित ने दावा किया कि घटना के समय एनिमेशन सेंटर में 20 से अधिक लोग मौजूद थे और इमारत में पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम नहीं थे।
आसिफ के अनुसार, आग लगने पर बजने वाला अलार्म नहीं लगा था हालांकि, उनके इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकी।
उन्होंने आशंका जताई कि आग भूतल पर स्थित पालतू जानवरों के क्लिनिक से शुरू हुई होगी, जहां कई एसी और ज्वलनशील सामग्री रखी थी।
आसिफ ने बताया कि उनके साथी जयंत गुप्ता भी कूदे और लोहे की रेलिंग पर गिरने से गंभीर रूप से घायल हो गए।
कुछ लोगों ने उन्हें ऑटो से अस्पताल पहुंचाया।
अधिकारियों के अनुसार, सोमवार दोपहर अलीगंज के उषा मेहता मार्ग स्थित तीन मंजिला इमारत में आग लगने से 15 लोगों की मौत हो गयी और कई लोग घायल हो गये।
सरकार ने मामले की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
भाषा किशोर आनन्द जितेंद्र
जितेंद्र

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