उप्र: नाबालिग बच्चों के यौन शोषण व आपत्तिजनक वीडियो विदेश भेजने के दोषी दंपति को मृत्युदंड
उप्र: नाबालिग बच्चों के यौन शोषण व आपत्तिजनक वीडियो विदेश भेजने के दोषी दंपति को मृत्युदंड
बांदा, 20 फरवरी (भाषा) उत्तर प्रदेश के बांदा जिले की एक विशेष अदालत ने शुक्रवार को सिंचाई विभाग के एक निलंबित अवर अभियंता व उसकी पत्नी को 33 नाबालिग बच्चों का यौन शोषण करने और उनके अश्लील वीडियो व तस्वीरें विदेश भेजने के मामले में दोषी करार देते हुए मृत्युदंड दिया। एक शासकीय अधिवक्ता ने यह जानकारी दी।
विशेष अदालत के लोक अभियोजक सौरभ सिंह ने बताया कि अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनने के बाद अपर जिला एवं सत्र न्यायालय (पॉक्सो) के न्यायाधीश प्रदीप कुमार मिश्रा की अदालत ने निलंबित अवर अभियंता रामभवन और उसकी पत्नी दुर्गावती को दोषी करार देते हुए यह सजा सुनाई।
उन्होंने बताया कि पीड़ित बच्चों की उम्र तीन से 18 साल से कम है।
अदालत ने केंद्र व राज्य सरकार से पीड़ित बच्चों को दस-दस लाख रुपये देनेका भी आदेश दिया।
केन्द्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 18 अक्टूबर, 2020 को यह मामला दर्ज किया था।
सीबीआई को मामले की जांच के दौरान पता चला कि जिले के नरैनी शहर का रहने वाला राम भवन चित्रकूट जिले में एक किराए के कमरे में रह रहा था, जहां ये अपराध किए गए थे और उसकी पत्नी इसमें कथित तौर पर मदद कर रही थी।
अभियोजक ने बताया कि आरोपियों ने कई साल तक नाबालिगों को लालच दिया व धमकाया, जिससे उनका शारीरिक व मानसिक शोषण हुआ।
उन्होंने बताया कि आपत्तिजनक सामग्री का इस्तेमाल कथित तौर पर ब्लैकमेल और दूसरी आपराधिक गतिविधियों के लिए किया गया था।
अदालत ने दंपति को तत्कालीन भारतीय दंड संहिता की धारा 377 (अप्राकृतिक दुष्कर्म), 506 (आपराधिक धमकी) और 120 बी (आपराधिक साजिश), पॉक्सो अधिनियम के संबंधित प्रावधानों और आईटी एक्ट के तहत दोषी ठहराया।
अदालत ने अपराध की गंभीरता को देखते हुए कहा, “ऐसे अपराध न केवल बच्चों की जिंदगी बर्बाद करते हैं बल्कि समाज की नैतिक नींव को भी हिला देते हैं।”
अदालत ने चेतावनी दी कि ‘ऐसे मामलों में कोई भी नरमी एक खतरनाक संदेश देगी’।
अदालत ने राज्य सरकार और संबंधित विभागों को पीड़ित बच्चों के पुनर्वास, मनोवैज्ञानिक इलाज और सुरक्षित भविष्य के लिए ‘ठोस कदम’ उठाने का निर्देश दिया।
भाषा सं आनन्द जितेंद्र
जितेंद्र

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