एनडीआरएफ जैसे बचाव दल का गठन करेगी उत्तर प्रदेश सरकार

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एनडीआरएफ जैसे बचाव दल का गठन करेगी उत्तर प्रदेश सरकार

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  • Publish Date - June 8, 2026 / 11:25 PM IST,
    Updated On - June 8, 2026 / 11:25 PM IST

लखनऊ, आठ जून (भाषा) उत्तर प्रदेश में जटिल आपातकालीन परिस्थितियों से निपटने के लिए राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) की तर्ज पर जल्द ही एक विशेष बचाव समूह (एसआरजी) का गठन किया जाएगा। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को यह जानकारी दी।

राज्य सरकार के अनुसार, विशेष बचाव समूह (एसआरजी) की शुरुआत पहले चरण में 10 जिलों में की जाएगी। इसके लिए 240 कर्मियों को एनडीआरएफ, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) तथा अन्य विशेषज्ञ संस्थानों द्वारा प्रशिक्षित किया जाएगा।

सरकार ने बताया कि एसआरजी को भवन ध्वस्त होने, बाढ़, रासायनिक दुर्घटनाओं, ऊंची इमारतों में बचाव कार्य तथा सीमित एवं दुर्गम स्थानों में अभियान चलाने जैसी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से निपटने के लिए तैयार किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं विभाग के कार्यों की समीक्षा करते हुए कहा कि राज्य में तेजी से बढ़ते शहरीकरण, औद्योगिक विकास और निवेश गतिविधियों के मद्देनजर आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को और मजबूत बनाने की आवश्यकता है।

आदित्यनाथ ने कहा, “अग्निशमन सेवाएं अब केवल आग बुझाने तक सीमित नहीं हैं। वे लोगों के जीवन, संपत्ति, उद्योगों और निवेश की सुरक्षा से भी जुड़ी हुई हैं।”

बैठक में बताया गया कि प्रदेश की 350 तहसीलों में से वर्तमान में 296 तहसीलों में 326 स्थायी अग्निशमन केंद्र कार्यरत हैं। 26 नए अग्निशमन केंद्र उद्घाटन के लिए तैयार हैं, जबकि 25 अन्य केंद्रों का निर्माण कार्य जारी है।

इसके अलावा 47 प्रस्तावित अग्निशमन केंद्रों के लिए विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (डीपीआर) तैयार किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शेष तहसीलों तक भी अग्निशमन सेवाएं पहुंचाने के प्रयासों में तेजी लाई जाए।

उन्होंने कहा कि नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, वाराणसी और प्रयागराज जैसे शहरों में बहुमंजिला इमारतों के तेजी से निर्माण के कारण अग्नि सुरक्षा संबंधी नयी चुनौतियां सामने आ रही हैं।

अधिकारियों ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 में 102 मीटर क्षमता वाले 10, 90 मीटर क्षमता वाले तीन तथा 72 मीटर क्षमता वाले सात हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म खरीदने की योजना है।

इसके अलावा विभाग 100 मंजिल तक की इमारतों में संचालन करने में सक्षम 14 अत्याधुनिक अग्निशमन वाहनों की भी खरीद करेगा।

सरकार के अनुसार, वर्ष 2017 से अब तक अग्निशमन केंद्रों की संख्या 140 से बढ़कर 260 हो गई है, जबकि अग्निशमन वाहनों की संख्या 750 से बढ़कर 1,660 हो चुकी है।

सरकार ने बताया कि जल्द ही 400 और वाहन बेड़े में शामिल किए जाएंगे।

अधिकारियों ने कहा कि डायल-112 से एकीकरण, ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार और नयी भर्तियों से विभाग की कार्यकुशलता में सुधार हुआ है।

मुख्यमंत्री ने फसल अवशेषों में आग लगने की घटनाओं की रोकथाम के लिए जनजागरूकता और सामुदायिक भागीदारी बढ़ाने पर भी जोर दिया।

बयान के अनुसार, वर्ष 2025-26 के दौरान प्रदेश में 1.20 लाख से अधिक अग्नि सुरक्षा ऑडिट किए गए। इसके अलावा 31,000 से अधिक मॉक ड्रिल और 75,000 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए।

आदित्यनाथ ने अधिकारियों को अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) प्रणाली को और सरल तथा पारदर्शी बनाने के निर्देश भी दिए।

अधिकारियों ने बताया कि अग्निशमन एनओसी की वैधता अवधि तीन वर्ष से बढ़ाकर पांच वर्ष कर दी गई है। एक जनवरी से 31 मई के बीच प्राप्त 14,717 ऑनलाइन आवेदनों में से 10,670 एनओसी जारी किए गए।

सरकार ने बताया कि सभी विकासखंडों में अग्निमित्र और अग्निसचेतक स्वयंसेवकों का प्रशिक्षण पूरा हो चुका है।

बयान के अनुसार, वर्ष 2026 में लगभग 44,000 स्वयंसेवकों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया गया है और उनके लिए एक समर्पित वेब पोर्टल तथा मोबाइल एप विकसित करने की योजना है।

भाषा

आनन्द रवि कांत